इश्क़ का फैसला

 इश्क़ का फैसला 


हाँ!
जानता हूँ
इश्क है मुझको तुमसे।

और
है इश्क
तुमको भी मुझसे।

पर
स्वीकार नहीं कर पाया
न तब
न अब।

तब अनजान थी
तुम मेरे इश्क से
अब अनजान बन गया हूँ
मैं तेरे इश्क से।

क्यों ?
पूछो क्यों ?

वो इसलिए
क्योंकि
तब तुमने नकार दिया था
मेरे इश्क को।

अब मैं नकार देना चाहता हूँ
तेरे इश्क को।

बात महज इतनी सी है
तब मेरे इश्क का फैसला तेरे हाथ में था,
अब तेरे इश्क का फैसला मेरे हाथ में है।

© विजय कुमार बोहरा


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