मर्डर ऑन वेलेंटाइन नाइट - 16

मर्डर ऑन वेलेंटाइन नाइट - 16


साकेत कार ड्राइव करते हुए आर्ट्स काॅलेज पहुंचा।
भीतर प्रविष्ट होते ही उसने एक स्टूडेंट से प्रिंसिपल रूम के विषय में पूछा और उसकी बतायी दिशा की ओर बढते हुए शीघ्र ही वह प्रिंसिपल रूम तक जा पहुंचा।

"क्या मैं अंदर आ सकता हूँ ? " - जवाब की प्रतीक्षा में वक्त जाया करना साकेत को जरा भी पसंद नहीं था , इसीलिये अपनी तरफ से अनुमति लेने की औपचारिकता पूरी करने के साथ ही साकेत भीतर प्रविष्ट हो गया।

" आप..." - प्रिंसिपल महेंद्र चौबीसा दिमाग पर जोर देते हुए बोले।

" साकेत अग्निहोत्री।...प्राइवेट डिटेक्टिव। "

" हाँ , याद आया। " - प्रिंसिपल बोले - " पेपर में पढ़ा था आपके बारे में।...प्लीज , टेक सीट। "

प्रिंसिपल महेंद्र चौबीसा करीब 55 साल के रौबीले चेहरे वाले शख्स थे।

साकेत प्रिंसिपल चौबीसा की मेज के सामने ही रखी एक कुर्सी पर बैठा।

" आप चाय लेंगे या कोई कोल्ड ड्रिंक वगैरह ! "

" यह सब रहने दीजिये। " - साकेत बोला - " फिलहाल मुझे आपके सहयोग की जरूरत है। "

" कैसा सहयोग ? "

" आपके काॅलेज में फाइनल ईयर की स्टूडेंट रिचा का गत 14 फरवरी कत्ल हो गया था , उसी केस की इन्वेस्टीगेशन मुझे यहाँ तक ले आयी है। "

" ओह , उस लड़की के साथ बहुत बुरा हुआ। " - प्रिंसिपल चौबीसा बोले - " कल पुलिस वाले भी आये थे , काफी पूछताछ की थी उन्होंने। "

" क्या ? " - साकेत चौंक उठा - " इंस्पेक्टर सोमेश मुखर्जी आये थे ? "

" हाँ , यही नाम बताया था। "

" आप यहाँ कितने समय से है ? "

" पिछले 4 साल से इस काॅलेज में हूँ। लेकिन , पिछले कुछ दिनों से जो घटनायें यहाँ हुई है , पहले कभी नहीं हुई।"

" कैसी घटनायें ? "

" मैंने कभी कल्पना तक नहीं की थी कि इस काॅलेज में यह सब भी होगा। "

" ऐसा क्या हुआ है ? "

" 12 फरवरी को काव्या काॅलेज से घर के लिये निकली , लेकिन घर नहीं पहुंची और अभी तक उसका कोई पता नहीं है। 13 फरवरी को सलोनी के साथ भी यही हुआ और 14 फरवरी की रात रिचा घर नहीं पहुंची और अगली सुबह यूनिवर्सिटी रोड़ पर उसकी लाश पायी गयी। "

" ओह ! "

" पिछले दो दिनों से सब ठीक है , लेकिन इंस्पेक्टर मुखर्जी ने चेतावनी दी है कि अब अगर ऐसी कोई भी घटना काॅलेज में होती है तो मामला काफी बिगड़ सकता है।...हालांकि मैंने पुलिस को दिए अपने बयान में यह स्पष्ट कर दिया है कि रिचा के कत्ल का इस काॅलेज से कोई लेना देना नहीं है , क्योंकि यह वारदात रात के वक्त में हुई थी। जबकि काॅलेज शाम 5 बजे तक बंद हो जाता है और इसके बाद कौन कहाँ जाता है और किसके साथ क्या होता है , इसके लिये काॅलेज प्रशासन जिम्मेदार नहीं है। "

" मेरे विचार से तो इन तीनों मामलों में आप और आपका काॅलेज पूरी तरह से सुरक्षित है , क्योंकि ये सभी घटनायें काॅलेज - टाइम के बाद ही हुई है। "

" यह दलील भी दी थी मैंने , लेकिन इंस्पेक्टर मुखर्जी का कहना है कि इस तरह के मामलों में एकाध घटना को नजरअंदाज किया जा सकता है। तीन - तीन घटनायें लगातार तीन दिनों तक घटित होने से और वो भी लडकियों के लापता होने या कत्ल होने से काॅलेज शक के दायरे में तो आ ही गया है। "

" लडकियों की गुमशुदगी की रिपोर्ट तो थाने में दर्ज हुई होगी ? "

" हाँ , हुई थी। "

" किस थाने में ? "

" भूपालनगर पुलिस स्टेशन में। "

" क्या ? " - साकेत चौंका।

" जी हाँ , यह एरिया उसी थाने के अन्तर्गत तो आता है। "

" फिर तो पुलिस पहले भी यहाँ आई होगी पूछताछ करने ?"

" हाँ। "

" कब ? "

" 13 फरवरी को काव्या और 14 फरवरी को सलोनी के विषय में पूछताछ करने इंस्पेक्टर सोमेश मुखर्जी आये थे। "

" कोई निष्कर्ष निकला ? "

" नहीं। " - प्रिंसिपल महेंद्र चौबीसा बोले - " आप तो जानते ही हैं कि पुलिस वाले आते है , अपनी तहकीकात करते हैं और रिपोर्ट तैयार करके फाइलों में जमा करते जाते हैं , निष्कर्ष कभी कुछ नहीं निकलता। अब आप आए हैं , तो कुछ उम्मीद है। किसी भी तरह हो , बस ये केस साॅल्व करके इस काॅलेज को बचा लीजिये। "

" आप बेवजह परेशान हो रहे हैं। काॅलेज पूरी तरह सुरक्षित है , आप निश्चिंत रहिये। "

" निश्चिंत कैसे रहूँ ? अभी तक सब कुछ ठीक है तो इसका अर्थ यह तो नहीं कि आगे भी ठीक ही रहेगा ? "

" आप कहना क्या चाहते हैं ? "

" यह मामला अभी तक मीडिया की नजर में नहीं आया है। अगर जल्द ही लडकियों का पता नहीं चला और गलती से भी अगर मामला उछला तो काॅलेज का नाम खराब हो जायेगा , कमेटियां बैठायी जायेगी और सबसे बुरी बात तो यह है कि हमारा यह काॅलेज सुखाडिया यूनिवर्सिटी कैम्पस में बना होने की वजह से पूरी यूनिवर्सिटी ही सवालों के घेरे में आ जायेगी। "

" ऐसा कुछ नहीं होगा। " - साकेत बोला - " आप बस मेरा सहयोग करिये और मैं जल्द ही हकीकत का एक एक पन्ना आपके सामने खोलकर रख दूंगा। "

" इस काॅलेज से आपको पूरा सहयोग मिलेगा। "

" थैंक्स ! " - साकेत बोला - " रिचा और गायब होने वाली दोनों लडकियों का नैचर कैसा था ? "

" लड़कियां ठीक ही थी। रिचा और काव्या नाॅर्मल स्टूडेंट्स थी , जैसे कि आमतौर पर काॅलेज स्टूडेंट्स होते ही है। लेकिन सलोनी , वो थोड़ी अलग थी। "

" अलग मतलब ? "

" मतलब , लडकों की तरह रहना , बाकी स्टूडेंट्स को बेवजह परेशान करना। "

" ये काव्या और सलोनी अचानक से गायब कैसे हो गयी ?...किसी ने किडनैप किया होगा या अपनी मर्जी से कहीं चली गयी होगी ? "

" पुलिस वालों का कहना है कि अगर किडनैप हुआ होता तो कम से कम 24 घंटे के भीतर तो कोई न कोई इनके घर वालों से पैसों की डिमांड के लिये सम्पर्क जरुर करता।...घर से भागी होती तो कोई ' नोट ' छोड़कर जाती और नोट नहीं भी छोडती तो दो - तीन दिन में तो घर लौट ही आती या किसी भी तरह से सम्पर्क करती , लेकिन ऐसा कुछ भी नहीं हुआ। इसीलिये उनका मानना है कि काव्या और सलोनी का भी रिचा की ही तरह किसी ने कत्ल कर दिया है , फर्क सिर्फ इतना है कि रिचा की लाश मिल गयी और उन दोनों लडकियों की लाशें तक गायब कर दी गयी।"

" ये पुलिस वाले भी , कुछ भी बोल देते हैं। " - झुंझलाहट भरे स्वर में साकेत बोला - " एक तरफ तो हर छोटी से छोटी चीज़ के लिये सबूत मांगते हैं और दूसरी तरफ हवाई अनुमान लगाते रहते हैं। "

प्रिंसिपल मुसकराया - " केस बस रफा दफा होना चाहिये , जब गवाह , सबूत और सुराग - कुछ ना मिले तब मनमाफिक अनुमान लगाओ और फाइल क्लोज कर दो , यही तो काम होता है पुलिस वालों का। "

" ऐसा नहीं है , पुलिस अपने ढंग से काम कर रही है और फिर भी कहीं कोई कमी रह जाती है तो हम जैसे प्राइवेट डिटेक्टिव तो है ही मदद के लिये। "

" वैसे आपको क्या लगता है , लड़कियां के साथ क्या हुआ होगा ? "

" जब तक कोई ठोस जानकारी नहीं मिल जाती , तब तक कुछ भी कहना जल्दबाजी होगी। फिर भी इतना तो तय है कि हुआ उनके साथ कुछ बुरा ही है। " - साकेत ने कहा - " कोई ऐसी बात है जो इन तीनों ही लडकियों में काॅमन रही हो ? "

" काॅमन ? " - प्रिंसिपल कुछ सोचते हुए बोला - " लगता तो नहीं ऐसा कुछ। हाँ , तीनों ही एक क्लास की स्टूडेंट्स थी। "

" फाइनल ईयर ? "

" हाँ। "

" और कोई ऐसी चीज , जो उनमें काॅमन हो ? "

" नहीं। मेरा विचार है कि तीनों ही लडकियों के संबंध में आपको विस्तृत जानकारी उन्हीं की क्लास में पढने वाले स्टूडेंट्स से मिल सकती है। "

" हाँ , यह तो है ही। " - साकेत बोला - " मुझे काव्या और सलोनी के घर का एड्रेस और उनके पेरेंट्स का काॅन्टेक्ट नंबर मिल सकता है ? "

" श्योर ! " - कहते हुए प्रिंसिपल ने मेज़ पर रखी काॅलबैल बजायी।

अगले ही पल चपरासी संतोष प्रिंसिपल के समक्ष उपस्थित था।

" आॅफिस में जाओ और क्लर्क से फाइनल ईयर की स्टूडेंट्स काव्या और सलोनी का पूरा बायोडाटा कलैक्ट करके ले आओ। "

" जी सर ! "

" आकाश के बारे में आपका क्या विचार है ? "

" आकाश ? " - प्रिंसिपल चौंका।

" हाँ , आकाश ! वह भी इसी काॅलेज में फाइनल ईयर का स्टूडेंट है। "

" काफी अच्छे स्वभाव का और सीधा लड़का था। लेकिन , महीने भर पहले जो हरकत उसने काॅलेज में की , उसके बाद से उस पर भरोसा करना मुश्किल हो गया है। "

" कैसी हरकत ? "

जवाब में प्रिंसिपल चौबीसा ने ' रिंग चोरी ' वाली पूरी घटना सुना दी।

" लेकिन , आकाश का कहना है कि रिंग उसने नहीं चुरायी।"

" आप आकाश से मिले हैं ? "

" हाँ , रिचा के बारे में पूछताछ के लिये मिला था। "

" ओह ! "

" उसका तो यह भी कहना है कि इस मामले में उसे फंसाया गया है। "

" झूठ है ये। " - प्रिंसिपल चीखा - " रिंग उसी के बैग में से बरामद हुई थी और पूरी क्लास इस बात की गवाह है। "

" इट्स ओके सर ! " - साकेत बोला - " हम बस मामले की छानबीन कर रहे हैं। सच - झूठ का निर्णय तो समय आने पर हो ही जायेगा। "

प्रिंसिपल थोड़ा शांत हुए।

इसी पल संतोष भीतर प्रविष्ट हुआ।

दो टाइप किये हुए पेपर उसने प्रिंसिपल के हाथ में थमाये।

पेपर्स पर एक सरसरी निगाह डालकर प्रिंसिपल ने वे पेपर्स साकेत की ओर बढाते हुए कहा - " काव्या और सलोनी का बायोडाटा। "

" मेरा काम तो एड्रेस और मोबाइल नंबर से ही चल जाता , इस सबकी क्या जरूरत थी ? " - बायोडाटा हाथ में लेते हुए साकेत ने पूछा।

" मैंने कहा था कि काॅलेज से आपको पूरा सहयोग मिलेगा और वैसे भी , जितनी ज्यादा जानकारी आपको हासिल होगी , आपके लिये केस साॅल्व करना उतना ही सरल होगा। "

साकेत मुसकराया - " आप काफी शार्प माइन्डेड लगते हैं !"

" मैं बस इतना चाहता हूँ कि यह गुत्थी जल्द से जल्द सुलझ जाये। "

" यह तो सुलझेगी ही। " - साकेत बोला - " वैसे , फाइनल ईयर में पलक नाम की एक लड़की है , उससे मिल सकता हूँ ? "

" पलक ! " - प्रिंसिपल दूसरी बार चौंका।

" हाँ , वही लड़की जिसकी रिंग चोरी हुई थी। "

" श्योर ! " - कहते हुए प्रिंसिपल बोला - " संतोष ! पलक को भेजो यहाँ। "

" जी सर ! " - कहते हुए संतोष वहां से रूखसत हुआ।

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