मर्डर ऑन वेलेंटाइन नाइट - 17
" मे आइ कम इन सर ? "
" यस कम इन। "
पलक प्रिंसिपल रूम में प्रविष्ट हुई।
वह करीब 21 वर्षीय नवयुवती थी , जो व्हाइट कलर की ड्रेस में परी जैसी सुन्दर दिख रही थी।
वह साकेत के पास ही रखी एक कुर्सी पर बैठ गयी।
" पलक ! ये प्राइवेट डिटेक्टिव साकेत अग्निहोत्री है। " - प्रिंसिपल महेंद्र चौबीसा बोले।
" डिटेक्टिव ? " - पलक थोड़ा घबराते हुए बोली।
प्रिंसिपल मुसकराया - " घबराने की जरूरत नहीं है , ये रिचा के केस की इन्वेस्टीगेशन कर रहे हैं और उसी संबंध में तुमसे कुछ सवाल करना चाहते हैं। "
" अच्छा ! "
" आकाश को जानती हो ? " - साकेत ने पूछा।
" जी सर ! "
" उसने तुम्हारी रिंग चोरी की थी ? "
" पूरे काॅलेज को पता है। "
" लेकिन , आकाश का कहना है कि रिंग उसने नहीं चुरायी थी। "
पलक मुसकरायी - " उसके कहने से क्या होता है ! अब ऐसा तो हो नहीं सकता ना कि हम एक चोर से पूछे कि तुमने चोरी तो नहीं की और वह कहे कि हाँ मैंने ही चोरी की है। "
" तुम्हारा कहना सही है , लेकिन यह भी तो जरूरी नहीं कि जिसने चोरी नहीं की हो , वह खुद को चोर स्वीकार कर ले।"
" आपका मानना है कि आकाश बेगुनाह है ? "
" तुम्हें क्या लगता है ? "
" मुझे जो लगता है , वो आप भी जानते हैं। "
" मतलब , तुम मानती हो कि रिंग चोर आकाश ही है ? "
" सिर्फ मानती नहीं हूँ , मुझे पूरा यकीन है कि रिंग उसी ने चुरायी है। "
" कैसे ? "
" क्या ? "
" यकीन कैसे है ? "
" कैसे क्या ?...पूरे काॅलेज को पता है। सबने देखा था , तलाशी में आकाश के बैग से ही रिंग बरामद हुई थी। "
" मतलब , रिंग आकाश के बैग से निकली तो इसका अर्थ यह है कि चोर आकाश ही है ? "
" जाहिर सी बात है। "
" मिस्टर अग्निहोत्री ! आप एक महीने पुरानी रिंग चोरी की घटना को इतना सीरियसली क्यों ले रहे हैं ? इसका तो चोर भी पकड़ा गया था और पुलिस में कोई केस भी दर्ज नहीं हुआ था।...मेरे विचार से तो आपको रिचा और गायब हुई दोनों लडकियों के बारे में जांच पड़ताल करनी चाहिये , फिर इस पहले से ही सुलझे हुए रिंग चोरी के केस में उलझने का क्या मतलब ? " - प्रिंसिपल महेंद्र चौबीसा बोले।
साकेत मुसकराया - " रिचा के मर्डर का इस रिंग चोरी की घटना से परोक्ष संबंध है। "
" मैं समझा नहीं। "
" रिचा और आकाश एक - दूसरे के बेहद करीब थे और दो साल से वे रिलेशनशिप में थे। ब्रैकअप जैसी स्थिति उनके रिश्ते में कभी नहीं आयी। लेकिन , रिंग चोरी की घटना ने उनके रिश्ते को तोड़कर रख दिया। निश्चित रूप से उस घटना की वजह से उनके जीवन में जो सैलाब आया था , बिना तबाही मचाये गुजरने वाला तो वह था नहीं। "
" तो आप कहना चाहते हैं कि रिचा का कत्ल इसलिये हुआ , क्योंकि आकाश ने रिंग चुरायी। अगर वो चोरी नहीं करता तो रिचा आज जीवित होती ? "
" मुमकिन है। "
" कैसे मुमकिन है ? " - पलक बोली - " उस घटना के बाद तो उनके बीच बोलचाल तक बंद हो गयी थी। "
" कत्ल की रात रिचा आकाश के साथ थी। "
" य...ये आप क्या कह रहे हैं ? " - प्रिंसिपल चौबीसा और पलक दोनों एक साथ चौंक उठे।
" आप लोगों को नहीं पता ? " - साकेत ने संशयात्मक नैत्रों से दोनों की ओर देखते हुए पूछा।
" नहीं। " - पलक बोली - " रिंग चोरी की घटना के बाद से ही रिचा ने आकाश से अपना रिश्ता हमेशा के लिये तोड़ दिया था तो उनके एक साथ होने का तो सवाल ही नहीं उठता। "
" सवाल तो उठ चुके हैं मिस पलक ! " - साकेत बोला - " और जवाब भी मिल चुके हैं , यह पूरी तरह से साबित हो चुका है कि कत्ल से ठीक पहले रिचा , आकाश के साथ थी। रागिनी इसकी गवाह है और आकाश खुद भी अपने बयान में यह बात स्वीकार कर चुका है। "
" लेकिन , यह कैसे हो सकता है ? " - पलक चौंकी - " उनके बीच मामला बहुत ज्यादा बढ़ चुका था , ऐसे में उन दोनों का साथ होना और वो भी वेलेंटाइन की रात को ; कैसे संभव है ? "
" संभव - असंभव जैसे प्रश्न फिलहाल हमें नियति पर छोड़ देने चाहिये। बहरहाल , इंस्पेक्टर मुखर्जी जब पहले ही यहाँ आकर इन्वेस्टीगेशन कर चुके है , तब तो आपको ये सब पता होना चाहिये। "
" उन्होंने आकाश के बारे में पूछताछ जरुर की थी , लेकिन कत्ल से पहले उनके साथ होने के संबंध में कुछ नहीं बताया और ना ही रिंग चोरी की घटना का कोई जिक्र किया था। " - प्रिंसिपल महेंद्र चौबीसा बोले।
" खैर , जो भी हो। इतना तो तय है कि उस रात रिचा और आकाश साथ थे और उनका साथ होना आप लोगों के लिये असंभव सी बात है। सही है ना ? "
" हाँ। " - दोनों एक स्वर में बोले।
" दोनों का साथ होना आपको असंभव इसलिये लग रहा है , क्योंकि आकाश ने रिंग चोरी जैसी गिरी हुई हरकत की और इसके लिये रिचा उसे कभी माफ कर ही नहीं सकती थी। क्लियर ? "
" स्वाभाविक रूप से। "
" तो अब ऐसे हालात में रिचा और आकाश के साथ होने की सिर्फ दो वजह हो सकती है। एक , रिचा आकाश से इतना अधिक प्रेम करती थी कि अपने प्रेम की खातिर उसने आकाश को माफ कर दिया। "
" यह नहीं हो सकता। " - पलक ने प्रतिवाद किया - " एक महीने तक खफा रहने के बाद एक दिन अचानक रिचा आकाश को माफ कर देती है और वो भी वेलेंटाइन के दिन ?...यह वो पहले भी कर सकती थी , फिर उसी दिन क्यों ? और वो भी अचानक ? बिना किसी वजह के यह हो ही नहीं सकता। "
" वजह मैं आपको बताता हूँ। " - साकेत बोला - " रिचा के आकाश को माफ करने की एक वजह मै बता चुका हूँ , जिससे कि आप सहमत नहीं है। अब दूसरी वजह सुनिये , आकाश ने रिंग चुरायी ही नहीं थी और रिचा यह बात जान चुकी थी कि रिंग चोर आकाश नहीं कोई और था। लेकिन , रिचा ने आकाश को भी यह बात नहीं बतायी। "
" कमाल की कहानी है ! " - क्लेप करते हुए पलक ने कहा - " मतलब रिचा को असली रिंग चोर का पता चल गया था और उसने न आकाश को इस बारे में बताना जरूरी समझा , न मुझे। ऊपर से ऐसे बिहेव किया , जैसे चोर आकाश ही है फिर भी उसने उसे माफ कर दिया !...और जब रिचा ने किसी को यह बताया ही नहीं कि रिंग चोर आकाश नहीं कोई और था , तो आपको यह सब कैसे पता चला ? "
" आकाश को अहसास हो चुका था कि रिचा ने उसे बेगुनाह मानते हुए सच्चे दिल से माफ कर दिया है। "
" और ये अहसास उसे कैसे हुआ ? "
" दो बातों से। पहली , जब रिचा ने उसे माफ कर दिया तो उसने कहा था कि रिंग उसने नहीं चुरायी , तब जानती हो रिचा ने क्या कहा ? "
" क्या ? "
" उसने कहा कि इस बात को भूल जाना ही बेहतर होगा। "
" इसका क्या मतलब है ? " - प्रिंसिपल ने पूछा।
साकेत मुसकराया - " आकाश को माफ करते वक्त भी अगर रिचा के मन में ये बात होती कि रिंग चोर आकाश ही है तो वह आकाश से कम से कम यह तो कहती ही कि ' आगे से तुम इस तरह की कोई हरकत मत करना ' या यह कि ' इस बार तो मैंने तुम्हें माफ कर दिया लेकिन हर बार ऐसा ही हो , यह जरूरी नहीं ' ; लेकिन उसने ऐसा कुछ नहीं कहा , यहाँ तक कि उसने तो आकाश को आगे से रिंग चोरी की घटना का जिक्र तक करने से मना कर दिया।...इसका सीधा - सा अर्थ यही है कि वह आकाश से कुछ छिपा रही थी। "
" क्या ? " - पलक ने पूछा।
" रिंग को चुराने वाले असली अपराधी का नाम। "
" लेकिन , वह ऐसा क्यों करेगी ? "
" यही तो पता करना है कि उसने ऐसा क्यों किया। " - साकेत विचारपूर्ण मुद्रा में बोला - " उसकी कोई मजबूरी रही हो सकती है , हो सकता है कि रिंग चोर ने उसे ऐसा करने को कहा हो। "
" और ' दूसरी बात ' ? "
" रिचा की आंखें ! " - साकेत ने बताया - " आकाश ने बताया था कि जब रिचा ने उसे माफ किया , तब उसकी आंखें बता रही थी कि उसकी नजरों में आकाश निर्दोष साबित हो चुका था। "
" मुझे ऐसा नहीं लगता। " - पलक बोली - " रिंग आकाश ने ही चुरायी थी और ये सब अब पुरानी बातें हो गयी है। आप बेमतलब ही इस मामले को इतना महत्व दे रहे हैं। "
" तुम्हें क्या लगता है और क्या नहीं लगता , यह तुम्हारी निजी समस्या है। " - साकेत ने कहा - " अब मैं सिर्फ दो और ऐसी बातें बताऊंगा , जो इस तथ्य की ओर स्पष्ट संकेत करती है कि रिंग चोर आकाश नहीं कोई और है। "
" मुझे अब कुछ नहीं सुनना। " - कहते हुए पलक कुर्सी से उठ खडी हुई।
" पलक ! " - प्रिंसिपल चौबीसा ने बैठने का संकेत करते हुए कहा - " जब इतना कुछ सुन ही लिया है , तो दो - एक बातें और सही। "
पलक दोबारा बैठ गयी।
" बोलिये मिस्टर अग्निहोत्री ! " - प्रिंसिपल ने कहा।
साकेत ने बोलना शुरू किया - " आकाश एक अच्छे नैचर का सीधा लड़का है , किसी तरह का नशा नहीं करता और एक सम्पन्न परिवार से ताल्लुक रखता है ; यह सब बातें मुझसे ज्यादा अच्छी तरह से आप लोग जानते हैं। आकाश के पास ऐसी कोई वजह थी ही नहीं , जिसके लिये उसे गोल्डन रिंग चोरी करनी पड़े। लेकिन , अगर मान लिया जाये कि रिंग उसी ने चुरायी तो उसे रिंग अपने बैग में रखने के स्थान पर कहीं और रखनी चाहिए थी , किसी ऐसी जगह जिसके बारे में कोई अनुमान तक ना लगा सके। साथ ही जब उसने रिंग चुरायी तो उसे यह अहसास भी होना चाहिये था कि जब पलक को रिंग चोरी होने की बात पता चलेगी , तो तलाशी जरुर ली जायेगी। ऐसे में चोरी की हुई रिंग को बैग में छिपाना , हजम होने वाली बात नहीं है।"
" तो आप कहना चाहते हैं कि आकाश के बैग से बरामद हुई रिंग को उस बैग में आकाश ने नहीं किसी और ने रखा है ? " - प्रिंसिपल चौबीसा बोले।
" बिल्कुल। " - साकेत ने कहा - " और जिस किसी ने भी ये हरकत की है , उसे इतना अनुमान तो था ही कि चोरी के बारे में पता चलते ही तलाशी जरूर ली जायेगी। "
" मतलब , ये सब आकाश को बदनाम करने के लिये किया गया था ? "
" लगता तो ऐसा ही है। "
" लेकिन , ऐसा करेगा कौन ? "
" यही तो पता करना है। "
" आपकी पूछताछ पूरी हो गयी हो तो क्या अब मैं जा सकती हूँ ? " - साकेत की ओर देखते हुए पलक ने पूछा।
" आप भी कमाल करती है मैडम ! यहाँ एक बेगुनाह शख्स मुफ्त में बदनाम हो गया है और बजाय असली अपराधी तक पहुंचने में हमारी मदद करने के , आप इस मामले से पीछा छुडाना चाहती है ? "
" असली अपराधी ?...ये जो असली - नकली का खेल है ना , इसे आप ही खेलिए। चार बातें बनाकर आप सोचते हैं कि आप सच को झूठ में बदल सकते हैं और ये आकाश के पक्ष में जितनी दलीलें आपने दी है , इनका आधार क्या है ?...आकाश का बयान ना ! क्या आप लिखकर दे सकते हैं कि आकाश ने जो कुछ कहा , वो सब सच ही है ?...क्या आप इस बात की गारंटी दे सकते हैं कि आकाश ने आपसे कुछ भी झूठ नहीं बोला है ? " - पलक गुस्से से चीखी।
" यह मामला केवल रिंग चोरी की एक घटना का नहीं है। एक कत्ल हुआ है , दो लड़कियां लापता हुई है और इन सब घटनाओं के तार इसी रिंग चोरी की घटना से जुड़े हैं। " - साकेत बोला - " खैर , यहाँ आने का मेरा उद्देश्य सिर्फ तुमसे मिलना था , क्योंकि यह सारा मामला मुझे गोल्डन रिंग से जुड़ा हुआ लग रहा था ; उस गोल्डन रिंग से , जिसकी मालकिन तुम हो। मुझे उम्मीद थी कि तुमसे काफी जानकारी हासिल हो सकेगी , लेकिन…"
" मिस्टर अग्निहोत्री ! मैंने कहा ना , इस केस को साॅल्व करने में यह काॅलेज आपकी हर मुमकिन मदद करेगा। " - प्रिंसिपल बोला।
" यह मेरा विजिटिंग कार्ड है। " - प्रिंसिपल की ओर एक कार्ड बढाते हुए साकेत बोला - " उन तीनों लडकियों के बारे में कोई भी नयी जानकारी मिले , तो मुझे इन्फाॅर्म जरूर करियेगा। "
" श्योर ! "
" अब मैं चलता हूँ। " - कहते हुए साकेत कुर्सी से उठा और तीव्र गति से प्रिंसिपल रूम से बाहर निकल गया।
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