मर्डर ऑन वेलेंटाइन नाइट - 24

मर्डर ऑन वेलेंटाइन नाइट - 24

रिंग चोरी की घटना के बाद से ही आकाश मायूस और उदास - सा रहने लगा था। वजह ये नहीं थी कि सब उसे चोर समझने लगे थे , उसकी तकलीफ का एकमात्र कारण था , रिचा की बेरुखी। 

रिचा ने आकाश से ब्रैकअप कर लिया था और आकाश से बात करना तो दूर उसकी ओर देखना भी उसने बंद कर दिया था।

अब रिचा अकेली थी और आकाश तन्हा !

यह अवसर था उन वन साइड लवर्स के लिये , जिन्हें कभी घास तक नहीं डाली थी ; न रिचा ने और न ही आकाश ने।

ऐसे सभी वन साइड लवर्स के लिये यह गोल्डन चांस था और इस चांस को मिस करने की गलती कोई नहीं करना चाहता था।

रिंग चोरी की घटना के अगले ही दिन से इस सुअवसर का लाभ उठाने के प्रयास शुरू हो चुके थे।

' सीधा और मासूम होने का अर्थ यह नहीं है कि इंसान दिल का भी साफ  हो ! " - अपने विचारों में खोयी रिचा जैसे ही काॅलेज में प्रविष्ट हुई , शुभम बोल उठा।

शुभम उसी की क्लास का एक डिसेंट लड़का था। अन्य दिनों की अपेक्षा आज वह कुछ अधिक ही स्मार्ट दिख रहा था। उसकी व्हाइट शर्ट के ऊपर ब्लैक कलर का ब्लेजर बहुत आकर्षक लग रहा था।

" कुछ कहा तुमने ? " - रिचा ने पूछा।

" आकाश !... आकाश दिखने में बड़ा सीधा है , लेकिन जो हरकत उसने की है , उसके बारे में हम में से किसी ने कभी सोचा तक नहीं था। "

कल की घटना को भूलाकर रिचा बड़ी खुश होकर काॅलेज पहुंची थी। लेकिन , शुभम की बातों ने उस घटना को फिर से ताजा कर दिया। रिचा का मन दोबारा उदासी से भर उठा।

" वक्त लगा , लेकिन हकीकत उसकी सामने तो आ ही गयी। " - शुभम बोला।

" इन सब बातों से तुम्हें क्या मतलब ? " - रिचा गुस्से भरे लहजे में बोली - " तुम जाओ और अपना काम करो। "

" रिचा ! तुम्हारे सुख - दुख से मेरा सुख - दुख जुड़ा हुआ है। " - एकाएक ही शुभम इमोशनल हो उठा - " मैं काफी समय से तुमसे कुछ कहना चाह रहा था। लेकिन सिर्फ और सिर्फ तुम्हारी खुशी के लिये मैं हमेशा चुप रहा , पर आज...आज मैं चुप नहीं रहूंगा। "

" तुम...तुम कुछ कहना चाहते हो ? " - रिचा ने संशय भरे स्वर में पूछा।

" हाँ। " - कहते हुए शुभम एक रेड रोज रिचा की ओर बढ़ाते हुए बोला - " आई लव यू रिचा ! "

शुभम की हार्टबीट अप्रत्याशित रूप से बढ़ गयी थी। 

उसे पूरा भरोसा था कि रिचा उसका प्रपोजल जरूर स्वीकार कर लेगी , क्योंकि अब आकाश नाम का कांटा उसके रास्ते से निकल चुका था। 

रिचा ने हतप्रभ होकर पहले शुभम को देखा , फिर रेड रोज को ! एक बार फिर उसकी निगाह शुभम पर पड़ी , जो धीमे - धीमे मुसकरा रहा था और फिर अगले ही पल रिचा के हाथ की पांचों अंगुलियां शुभम के क्लीन शेव्ड चेहरे पर छप गई।

" चटाक ! " - इस आवाज ने वहां एकत्र सभी स्टूडेंट्स को हैरत में डाल दिया। 

शुभम के लाल हो चुके गाल की दास्ताँ उसके हाथ में थमा गुलाब बयां कर रहा था।

रिचा वहां से जा चुकी थी।

शुभम का एक हाथ अपने चोटिल गाल को सहलाने में व्यस्त था , तो दूसरे हाथ ने अभी भी उस रेड रोज को थाम रखा था , जो उसके सच्चे प्यार की बेशकीमती निशानी था। 

वहाँ एकत्र स्टूडेंट शुभम को अजीब नज़रों से देख रहे थे। 

लेकिन उसे लोगों की परवाह नहीं थी। 

उसे परवाह थी तो बस , अपने सच्चे प्यार की ; रिचा की !

ऐसे वक़्त में और कोई साथ दे या ना दे , दोस्त जरूर साथ देते हैं। 

" तुमने तो कहा था कि आज सही मौका है और रिचा तुम्हारा प्रपोजल जरूर स्वीकार कर लेगी , लेकिन उसने तो तुम्हें घास तक नहीं डाली। " - निखिल बोला। 

" अवसर तो मैंने ठीक ही चुना था। पता नहीं , यह  दांव उल्टा कैसे पड़ गया ? " - अपना गाल सहलाते हुए शुभम धीरे से बोला। 

" ठीक अवसर चुना था ? " - साहिल ने लगभग डांटते हुए कहा - " अभी - अभी उसका ब्रेकअप हुआ है। वह अपसेट है , दुखी है और ऐसे वक्त में तुम उसे प्रपोज कर रहे हो ?...इस वक्त उसे किसी प्रपोजल की नहीं , सहानुभूति की जरूरत है। " 

" तुम सही कह रहे हो , मैं अभी जाकर उसे सहानुभूति देकर आता हूं। " - शुभम के शब्दों में दृढ़ता थी। 

" सहानुभूति कोई वस्तु है क्या , जो तुम जाकर उसे दे दोगे ? " - सतीश ने कहा- " रहने दो , यह तुम्हारे बस की बात नहीं है। "

" बात बस की हो या ना हो , जाने तो मैं दूंगा नहीं। " - बोलते हुए शुभम काफी सीरियस हो गया था। 


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