मर्डर ऑन वेलेंटाइन नाइट - 25
आकाश कैंटीन में एक तरफ उदास - सा बैठा था। उसने कॉफी ऑर्डर की हुई थी। काफी देर हो चुकी थी , कॉफी नहीं आयी। उसने काउंटर की ओर देखा , काॅफी अभी भी नहीं आ रही थी। लेकिन , वो...वो उसे आती हुई दिखी। वो मतलब , रिचा !
हसरत भरी नजरों से उसने रिचा की ओर देखा।
लेकिन , रिचा ने उसे तवज्जो नहीं दी।
एक मेज के चारों ओर लड़कियों का एक ग्रुप बैठा था , वह भी वहीं जाकर बैठ गई।
आकाश की दिली ख्वाहिश थी कि रिचा बात चाहे उससे ना करें , लेकिन कम से कम एक बार , गलती से ही सही , उसकी ओर देख तो ले ; यूं अजनबी बनकर तो ना बैठी रहे !
लेकिन , उसकी ये ख्वाहिश भी पूरी होती नहीं दिख रही थी।
10 मिनट और वेट करने के बाद उसकी कॉफी आई।
उसने कॉफी लेकर रख ली , पी नहीं।
कुछ देर और वह रिचा को एकटक देखता रहा।
लेकिन , रिचा तो उसकी ओर से बेखबर बनी , अपनी फ्रेंड से बातें करने में मशगूल थी।
कुछ देर बाद आकाश को कॉफी का ख़याल आया।
उसने कप छूकर देखा , कॉफी ठंडी हो चुकी थी।
उसने एक बार फिर रिचा की ओर देखा , रिचा अब भी उससे अनजान बनी बैठी थी।
रिचा की बेरुखी और कॉफी के ठंडेपन ने उसका दिमाग गर्म कर दिया।
गुस्से में आकर वह उठने ही वाला था कि उसने अपने कंधे पर किसी के हाथ का स्पर्श महसूस किया।
उसने पीछे मुड़कर देखा , यह काव्या थी।
'' हैलो , आकाश ! '' - वह मुस्कराते हुए बोली।
" काव्या ! कैसी हो ?...बैठो ना। "
काव्या आकाश के सामने ही एक कुर्सी पर बैठ गई।
" जिंदगी भी कितनी अजीब होती है ना , एक पल में सब कुछ बदल कर रख देती है। " - काव्या ने कहा।
" क्या फर्क पड़ता है। " - आकाश ने उपेक्षा से उदासी भरे स्वर कहा।
" फर्क ? " - काव्या बोली - " यह तो तुम्हारा चेहरा देखकर कोई भी बता सकता है कि इससे तुम्हें कितना फर्क पड़ा है। " " मैं परवाह नहीं करता , बिल्कुल नहीं।...किसी की भी नहीं। " - आकाश बोला।
काव्या धीमे - से मुस्करायी - " परवाह नहीं होती , तो यहाँ बैठकर रिचा की ओर उम्मीद भरी नजरों से ना देख रहे होते। "
आकाश को थोड़ा संकोच हुआ।
काव्या की निगाह ठंडी हो चुकी कॉफी पर पड़ी - " तुम कॉफी क्यों नहीं ले रहे हो ? "
" रखी - रखी ठंडी हो गई है। " - आकाश बोला - " अब पीने लायक नहीं रही। "
" इट्स ओके ! मैं दूसरी कॉफी ऑर्डर कर देती हूं। "
" नहीं , रहने दो। " - आकाश बुझे मन से बोला - " मन नहीं है अभी।....तुम कुछ लोगी ? "
" नो थैंक्स ! " - कहते हुए काव्या बोली - " इंसान को हमेशा खुश रहना चाहिये , हर हाल में। "
" तुम किसकी बात कर रही हो ? "
" निश्चित तौर पर , तुम्हारी। "
" मैं खुश हूं। "
" यह तो तुम्हारे चेहरे को देखकर कोई भी बता सकता है कि तुम कितने खुश हो ! " - काव्या व्यंग्य भरे स्वर में बोली। आकाश को चुप हो जाना पड़ा।
कुछ पल की खामोशी के बाद आकाश खुद ही बोला - " तुम्हें क्या लगता है ? "
" किस बारे में ? "
" रिचा के बारे में। "
जरा उस टेबल की ओर देखो , जहां रिचा बैठी थी। "
आकाश ने देखा।
रिचा वहां नहीं थी।
वह जा चुकी थी।
" उम्मीद करती हूं , जवाब तुम्हें मिल गया होगा। " - काव्या बोली - " आकाश ! प्यार हो या दोस्ती - ये दोनों ही रिश्ते विश्वास की नींव पर टिके होते हैं और जब नींव कमजोर हो तो अच्छे से अच्छी इमारत भी एक पल में ढह जाती है। "
काव्या एकाएक ही उठ खड़ी हुई - " तुम्हें रिचा का प्यार अब भी दिखाई दे रहा है , लेकिन मेरी दोस्ती नहीं।....भरोसा उसका भी टूटा है , भरोसा मेरा भी टूटा है। लेकिन , अब वह तुम्हारे साथ नहीं है और मैं.....मैं अब भी तुम्हारे साथ हूँ। "
काव्या चली गयी।
लेकिन , जो वह बोल कर गई थी , उसने आकाश को काफी कुछ सोचने पर मजबूर कर दिया।
□ □ □
रिचा अपनी फ्रेंड्स पायल और प्रियंका के साथ लंच टाइम में बस यूं ही घूम रही थी।
अचानक ही वहां अभय आ गया।
अभय कॉलेज का सबसे बिगड़ैल लड़का था।
इस वक्त वह बाइक पर सवार था।
उसके तीन दोस्त और साथ में थे, वे भी दो अलग-अलग बाइक पर सवार थे।
इनमें से एक की बाइक के पीछे सलोनी भी बैठी थी।
बाकी तीन दोस्तों के नाम थे - " अनिल , सुभाष और जतिन। "
ये पांचों हमेशा ग्रुप में ही रहते थे , अभय ही इन सबका लीडर था।
तीनों बाइक रिचा और उसकी दोनों फ्रेंड्स के इर्द - गिर्द घूमने लगी।
वे तीनों ही रिचा , पायल और प्रियंका के चारों तरफ गोल - गोल राउंड काटने लगे।
" ये क्या बदतमीजी है ? " - रिचा गुस्से से बोली।
" सुना है अभी-अभी किसी का ब्रेकअप हुआ है ! कौन है वो बदकिस्मत ? " - रिचा की बात को अनसुना करते हुए अभय बोला।
" यही तो है , रिचा ! " - जतिन ने कहा।
" ओह ! यह तो बड़े दुख की बात है। " - कहते हुए अभय ने अपनी बाइक रोकी , तो बाकी सब ने भी अपनी - अपनी बाइक रोक ली।
लेकिन कोई भी बाइक से नीचे नहीं उतरा।
वे जहां थे , वहीं बाइक पर बैठे रहे।
अलबत्ता , एक पैर सब का जमीन पर जरूर था।
" पायल और प्रियंका ! " - अभय बोला - " तुम दोनों जाओ यहां से। "
दोनों ही वहां से खिसक ली। ''
'' पायल !.....प्रियंका !...प्लीज , रुको ! " - रिचा ने उन्हें रोकना चाहा , लेकिन वे रुकी नहीं ; चली गयी।
" ये कैसी फ्रेंड है तुम्हारी ? " - अभय चिढ़ाते हुए बोला - " तुम्हें मुसीबत में छोड़कर चली गयी ? "
" रास्ता छोड़ो। " - रिचा गुस्से में बोली।
" छोड़ देंगे , जल्दी क्या है ? " - अभय निर्लज्जता से बोला - " लेकिन , तुम जाओगी कहाँ ?....आकाश से तो तुम्हारा ब्रेकअप हो गया है ! "
" देखो , अगर तुम अपनी हरकतों से बाज नहीं आये तो मैं प्रिंसिपल सर से तुम्हारी शिकायत कर दूँगी। "
" शिकायत ? " - अभय कुछ सोचता हुआ बोला - " हाँ , एक शर्त पर मैं तुम्हे छोड़ सकता हूँ। तुम्हें प्रिंसिपल से मेरी शिकायत करनी पड़ेगी। "
" ये क्या बोल रहे हो ? "
" रिचा ! मैं तो खुद चाहता हूँ कि तुम प्रिंसिपल से मेरी शिकायत करो और प्रिंसिपल मुझे कुछ दिनों के लिये कॉलेज से बाहर निकाल दे , इसके बाद हर तरफ मेरे ही चर्चे होंगे। जैसे , आकाश पलक की रिंग चुराकर पूरे कॉलेज में फेमस हो गया है , वैसे ही मैं भी फेमस हो जाऊंगा। "
" तुम्हारे जैसा बेवकूफ लड़का मैंने आज तक नहीं देखा। "
" तो , जा रही हो ना , प्रिंसिपल से मेरी शिकायत करने ? "
" हां , जा रही हूँ। " - रिचा बोली - '' तुम्हारी इन अजीब बातों से मैं अपना इरादा बदलने वाली नहीं हूँ। "
" ओके। " - अभय अपनी बाइक पीछे हटाकर रास्ता देते हुए बोला - " जाओ। "
रिचा जाने के लिये सिर्फ दो ही कदम आगे बढ़ी थी कि पीछे से अभय ने आवाज़ देते हुए कहा - '' सुनो। "
रिचा ने चलते - चलते पीछे की ओर घूमकर देखा।
" बेस्ट ऑफ़ लक ! "
रिचा चली गयी।
" यह तुमने क्या किया अभय ! " - सुभाष बाइक से उतरकर अभय की ओर आते हुए बोला - " खुद अपनी ही शिकायत करने को बोल दिया ! "
" फेमस होने के लिए कुछ तो त्याग करना पड़ेगा ना ! " - अभय मुसकराते हुए बोला।
" तुम्हारे माइंड में कब कौनसी योजना जन्म ले लेती है , कोई नहीं जानता। "
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