मर्डर ऑन वेलेंटाइन नाइट - 20
" आकाश काव्या के साथ भी रिलेशनशिप में था ? " - साकेत को अभी भी यकीन नहीं हो रहा था।
अपनी इन्वेस्टीगेशन के दौरान हर बार साकेत के मस्तिष्क में एक नया सवाल उठता था , जिसका जवाब और किसी के पास हो ना हो , आकाश के पास जरूर होता था।
" क्यों ? " - साकेत समझ नहीं पा रहा था - " आकाश इस केस में इतना महत्वपूर्ण क्यों है ?...कत्ल के ठीक पहले वह रिचा के साथ था , रागिनी ने उसे घर बुलाया तो वह इसलिये नहीं पहुंच सका , क्योंकि उसी रात उसका एक्सीडेंट हो गया था , रिंग चोरी की घटना में भी आकाश का हाथ बताया जाता है और अब काव्या के साथ उसके रिलेशनशिप में होने के संकेत मिलना - आकाश इस केस में इतना महत्वपूर्ण क्यों है ? "
साकेत को कोई जवाब न सूझा।
वह कार ड्राइव करता रहा।
दो बज चुके थे।
कार जल्द ही हिरणमगरी सेक्टर - 4 में स्थित आकाश के मकान के सामने रूकी।
" आकाश ने बताया था कि आज सुबह ही उसे हाॅस्पिटल से डिस्चार्ज कर दिया जायेगा , इस हिसाब से तो इस वक्त आकाश को घर पर ही होना चाहिये। " - सोचते हुए साकेत कार से निकला।
काॅलबैल के बजते ही गेट खुला।
साकेत के सामने आकाश के पिता पवन माथुर खड़े थे।
" मैं साकेत अग्निहोत्री…"
" हाँ , भीतर आइये। " - पवन माथुर ने साकेत को पहचान लिया था।
साकेत ने देखा , घर काफी बड़ा था।
वे ड्राइंग रूम में पहुंचे।
" आकाश से मिल सकता हूँ ? " - बिना किसी औपचारिकता के साकेत ने पूछा।
" वह घर पर नहीं है। " - जवाब भी औपचारिक और रूखा सा मिला।
" लेकिन कल तो उसने बताया था कि आज सुबह ही उसे हाॅस्पिटल से डिस्चार्ज कर दिया जायेगा , फिर…"
" वह हाॅस्पिटल से घर आ चुका है , लेकिन अभी घर पर नहीं है। किसी काम से बाहर गया हुआ है। "
" ओह ! " - साकेत बोला - " पैर कैसा है अब उसका ? "
" काफी हद तक ठीक है , थोड़ा दर्द है पैरों में। लेकिन वह जल्द ही रिकवर हो जायेगा। "
" घर काफी अच्छा है आपका। " - साकेत चारों तरफ नजरें घूमाते हुए बोला।
" शुक्रिया ! शाही जिन्दगी जीने की इच्छा का एक छोटा सा फल है बस। "
" अच्छा ! वैसे घर में और कौन - कौन है ? "
" मेरी पत्नी रीना और बेटा आकाश , बस और कोई नहीं। " - पवन माथुर ने बताते हुए कहा - " आप बैठिये , मैं बस दो मिनट में आया। "
अपने कहे मुताबिक सिर्फ दो ही मिनट के अंतराल में वह प्रकट हुआ।
" आकाश आपका इकलौता बेटा है ? "
" हाँ और यही वजह है कि मैंने उसकी परवरिश में कभी कोई कमी नहीं रखी। उसे हमेशा ही मैंने आरामदेह जिन्दगी मुहैया कराने का प्रयास किया है। "
साकेत थोड़ा चौंका।
" फिर एक्सीडेंट के बाद उसे जनरल हाॅस्पिटल में एडमिट कराने की कोई खास वजह ? "
" यह पुलिस वालों की मेहरबानी का नतीजा था। वे लोग उसे सीधे एम बी हाॅस्पिटल ले गये। वहीं से मुझे फोन के द्वारा आकाश के एक्सीडेंट की सूचना मिली और वह भी करीब 1 घंटे बाद ; उस समय जबकि आकाश होश में आकर उन लोगों को मेरा मोबाइल नंबर बताने की स्थिति में आ चुका था। " - पवन माथुर ने कहा - " इसके बाद भी मैंने आकाश को अच्छे सुविधापूर्ण प्राइवेट हाॅस्पिटल में एडमिट करवाने की अपनी इच्छा जाहिर की , लेकिन पुलिस वालों ने यह कहकर अनुमति नहीं दी कि एक तो यह एक्सीडेंट का मामला होने के कारण पुलिस केस बन चुका है और दूसरे आपके बेटे को बहुत हल्की चोटें आयी हैं। "
" ओह ! " - साकेत बोला - " एक्सीडेंट की F.I.R. किस थाने में दर्ज हुई थी ? "
" प्रतापनगर पुलिस स्टेशन में , जो कि घटनास्थल का सबसे नजदीकी पुलिस स्टेशन था। "
" ओके। कल रात जब मैं आकाश से मिलने हाॅस्पिटल आया था , तब आपका बर्ताव काफी अलग था। "
" अलग नहीं , अजीब। " - पवन माथुर ने मुसकराते हुए कहा।
" पूछना मैं वही चाहता था। " - साकेत बोला - " इसकी कोई खास वजह ? "
पवन माथुर के चेहरे पर क्षुब्धता के भाव आये।
इसी पल रीना माथुर काॅफी ले आयी।
वहीं रखी एक टेबल पर उन्होंने काॅफी रखी और फिर जिस ओर से आयी थी , उस ओर ही चली गयी।
साकेत को अब समझ आया था कि पवन माथुर दो मिनट के लिये कहाँ गये थे।
दोनों ने काॅफी का अपना कप उठाया।
" आप कुछ पूछ रहे थे ? " - पवन माथुर ने कप से उठती हुई भाप की ओर देखते हुए पूछा।
" कल रात के आपके बर्ताव की वजह ? " - साकेत ने याद दिलाया।
" वही लड़की , जिसकी वजह से यह सब कुछ हो रहा है। " - क्रोध भरे स्वर में पवन माथुर बोले।
" आपका मतलब रिचा से है ? "
" बिल्कुल। "
" आपके एक्सप्रेशन से लग रहा है कि रिचा के प्रति काफी नफरत भरी पड़ी है आपके भीतर ! "
" लड़की ही वो नफरत के लायक थी। "
" वजह ? "
" सुनिये , मिस्टर अग्निहोत्री ! " - पवन माथुर संयमित शब्दों के साथ बोले - " कभी - कभी किसी एक के प्रति प्रेम किसी दूसरे के प्रति नफ़रत की वजह बन जाता है।...मैं अपने बेटे आकाश से बहुत प्यार करता हूँ और यही वजह है कि मुझे रिचा से नफ़रत थी , इतनी ज्यादा कि आज उसके मरने के बाद भी वह बरकरार है। "
" मैं समझा नहीं। "
" आकाश हमेशा से ही सीधा , मासूम और खुशमिज़ाज लड़का रहा है। मैंने उसे कभी दु:खी नहीं देखा है। लेकिन , एक घटना , महज एक छोटी - सी घटना ने उसकी हंसती - खेलती जिन्दगी में भूचाल सा ला दिया। "
" कैसी घटना ? "
पवन माथुर ने बताना शुरू किया - " करीब एक महीने पहले की बात है। आमतौर पर मैं शाम 6 बजे तक घर आ जाया करता हूँ , उस वक्त जबकि मेरे बेटे आकाश को काॅलेज से आये हुए आधा घंटा हो चुका होता है। लेकिन , उस दिन आॅफिस से घर आने में मुझे काफी देर हो गयी थी। मैं करीब 9 बजे घर पहुंचा। मुझे पूरा यकीन था कि आकाश अपने निर्धारित समय पर डिनर कर चुका होगा , जबकि मेरी पत्नी रीना , जो कि पिछले तीन घंटे के दौरान मुझे चार से भी ज्यादा बार काॅल कर चुकी थी ; मेरे इंतज़ार में अभी भी बैठी होगी। लेकिन , डिनर की टेबल पर जब रीना ने मुझे यह बताया कि आज आकाश का मूड ऑफ है और अभी तक उसने डिनर भी नहीं किया है , तो मुझे काफी आश्चर्य हुआ।
" मैं देखता हूँ। " - कहते हुए मैं उठा और जल्द ही आकाश के रूम में पहुंचा।
वह पलंग पर लेटा हुआ था।
उसकी आंखें नम थी , जिसका सीधा - सा अर्थ था कि वह रोया था।
मेरा बेटा आकाश रोया था ?...क्यों ?
" आकाश ! " - मैंने आवाज लगायी।
उसने कोई प्रतिक्रिया नहीं की।
मैं उसके निकट पहुंचा और उसके कंधे को छूते हुए दोबारा मैंने उसे पुकारा - " आकाश ! उठो बेटा। "

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