मर्डर ऑन वेलेंटाइन नाइट - 21

 मर्डर ऑन वेलेंटाइन नाइट - 21

आकाश पहले थोड़ा हिला , फिर आंखें मलते हुए उठा।

" अरे , पापा ! आप कब आये ? " - पलंग के सिरहाने से अपनी पीठ सटाकर बैठते हुए उसने पूछा।

" बस अभी ही। लेकिन , यह क्या तुमने अभी तक डिनर क्यों नहीं किया ?...तबीयत तो ठीक है ना बेटा ? "

" हाँ , बस मन नहीं है। " - उसने मायूसी भरे स्वर में कहा।

" रोज तो होता है , फिर आज क्यों नहीं है ? "

" बस यूँ ही। " - कहते हुए उसने पूछा - " आपने खा लिया ? "

" बेटा भूखा रहे और बाप खाना खा ले , ऐसा कभी हो सकता है भला ? "

मेरी बात सुनकर वह एकाएक ही इमोशनल हो उठा और अचानक से मेरे लगकर रो पड़ा।

" क्या हुआ आकाश ? " - मै बोला - " अब मैंने तो ऐसे ही डायलाॅग मार दिया था , इसमें इतना इमोशनल होने की क्या जरूरत है ? "

" पापा ! आज मेरे साथ कुछ बुरा हुआ है , कुछ ऐसा जिसके होने की कभी मैंने कल्पना तक नहीं की थी। "

" क्या हुआ है बेटा ! साफ - साफ बताओ। "

" पलक आज काॅलेज में सोने की नयी रिंग लेकर आयी थी , जिसे बड़े ही शौक से उसने सबको दिखाया। वह रिंग किसी ने चुरा ली। "

" ओह ! यह तो बहुत बुरा हुआ। "

" हाँ , लेकिन इससे भी बुरा कुछ हुआ था , जिसे आप तो शायद सुन भी नहीं पायेंगे। "

" क्या हुआ था ? "

" आज ही चोर पकड़ा गया। "

" यह तो अच्छा ही हुआ ना , इसमें ना सुन पाने जैसी क्या बात है ! "

" जानते हैं , चोर कौन था ! "

" कौन ? "

" मैं पापा ! " - आवेशपूर्ण स्वर में बहते आंसूओं को रोकने की असफल चेष्टा करते हुए आकाश बोला - " आपका बेटा आकाश ! उदयपुर शहर के एक सफल बिजनेसमेन का बेटा अपने ही काॅलेज में रिंग चुराने वाला एक मामूली चोर निकला। "

" क्या बकते हो ? " - मैं बुरी तरह से चौंककर उठ खड़ा हुआ।

" हाँ , पापा ! " - रोते हुए आकाश बोला - " आज पूरे काॅलेज में सबके सामने यह साबित हो चुका है कि आपका बेटा आकाश रिंग चोर है। "

" तुम ऐसा कैसे कर सकते हो ? "

मारे हैरत के उसकी आंखें फट पडी - " पापा ! मैंने कोई चोरी नहीं की है। लेकिन , जुर्म मुझ पर साबित हो चुका है।"

" क्या ? ये तुम कैसी विरोधाभासी बातें कर रहे हो ?...एक तरफ तो तुम कहते हो कि तुमने चोरी नहीं की और दूसरी तरफ तुम्हारा कहना है कि जुर्म तुम पर साबित हो चुका है ? "

" रिंग गायब होने की बात पता चलते ही प्रिंसिपल सर के आॅर्डर से सबकी तलाशी ली गयी और उस तलाशी के दौरान मेरे बैग से रिंग बरामद हुई। इसका यह अर्थ निकाला गया कि रिंग मैंने ही चुरायी है और रिंग चोर मैं ही हूँ , जबकि मुझे बिल्कुल भी नहीं पता कि वह रिंग मेरे बैग में आयी कैसे !... किसी ने मुझे बदनाम करने की साजिश की है। " - आकाश ने एक ही सांस में पूरी ट्रेजडी समझा दी।

" वे लोग ऐसा कैसे कर सकते हैं ? " - क्रोधभरे स्वर में मैं बोला - " मैं कल ही जाकर प्रिंसिपल से बात करता हूँ। "

" कोई फायदा नहीं। " - आकाश बोला - " वैसे भी प्रिंसिपल सर तो इस मामले को पुलिस स्टेशन तक ले जाना चाहते थे , लेकिन पलक ने यह कहते हुए उन्हें रोक दिया कि वो नहीं चाहती कि उसकी वजह से किसी का कैरियर खराब हो। "

" बड़ा अहसान किया ना उसने ! " - मैं व्यंग्य भरे स्वर में बोला ।

" पापा ! समझने की कोशिश कीजिये। पुलिस केस बनने पर मेरा कैरियर खत्म हो सकता था। रिंग चोरी की घटना का क्या है ; चार दिन में सब भूल जायेंगे। " - अपने डरपोक बेटे से मुझे यही उम्मीद थी।

" तो तुम उस जुर्म को भी कबूल करने को तैयार हो , जो तुमने कभी किया ही नहीं ? "

" हाँ। " - संक्षिप्त सा उत्तर देने के साथ ही वह बोल उठा - " वैसे भी , मुझे इस बात की कोई परवाह नहीं है कि लोग मेरे बारे में क्या सोचते हैं , तकलीफ तो मुझे इस बात को लेकर है कि रिचा ने भी मुझ पर भरोसा नहीं किया। बाकी सबकी तरह वो भी यही मानती है कि रिंग मैंने चुरायी है। "

" बेटा , ये प्यार - व्यार के चक्कर बड़े खराब होते हैं। तुम्हें किसी की परवाह करने की कोई जरूरत नहीं है। " - मैं जानता था कि आकाश पिछले दो सालों से रिचा के साथ रिलेशनशिप में था और इस बात से मुझे सख्त आपत्ति थी।

" आप नहीं समझेंगे पापा ! "

" हाँ , मैं कैसे समझूँगा। मेरी तो अरेंज मैरिज हुई थी ना ! " - मैं व्यंग्य भरे स्वर में बोला।

" बात ये नहीं है। "

" मैंने दुनिया देखी है और मैं सब समझता हूँ , लेकिन तुम नहीं समझते। जो लड़की तुम पर भरोसा नहीं करती , उसके लिये तुम दुखी हो रहे हो ? "

" थैंक्स ! " - अचानक ही आकाश के मुंह से निकला।

" अब ये किसलिये ? " - मैने चौंकते हुए पूछा।

" काॅलेज से आने के बाद न तो मैं किसी से मिला और न ही किसी से मेरी कोई बात हुई। अब आपसे बात करने के बाद काफी अच्छा लग रहा है। मन का सारा गुबार निकल गया है और अब मैं काफी बेटर फील कर रहा हूँ। जब भी मैं किसी तकलीफ में होता हूँ , तब आप ही मुझे सपोर्ट करते हैं। "

" अब यह सब भूल जाओ और चलकर डिनर कर लो। "

" हाँ , पापा ! चलिये। "

" इसके बाद रीना ने फिर से खाना गर्म किया और हम लोगो ने आराम से डिनर किया। " - पवन माथुर बोले - " मुझे लगा था कि बात आयी - गयी हो जायेगी और मुझे कुछ गलत नहीं लगा था , क्योंकि आकाश को अपने ऊपर लगे इल्जाम की परवाह नहीं थी। उसके कहे अनुसार , दो - चार दिन में ही सबने रिंग चोरी की उस घटना को भूला दिया था। लेकिन , रिचा...उसने गड़बड़ कर दी। उसने उस घटना के लिये आकाश को माफ नहीं किया। दो सालों का प्यार एक पल में भूला दिया था उसने और यही वजह है कि मैं लव मैरिज के बिल्कुल खिलाफ हूँ। फिर भी अपने बेटे आकाश की खुशी के लिये मैंने यह सोच रखा था कि अगर वह नहीं मानता है , तो मैं खुद इस रिश्ते के लिये मान जाऊंगा। लेकिन , होनी को शायद कुछ और ही मंजूर था।...3 - 4 दिन शांति से बीते और मैं तो इस घटना को लगभग भूल ही गया था। लेकिन , फिर एक दिन जब मैं घर पहुंचा , तो उस समय तक आकाश घर नहीं लौटा था। रीना से पूछने पर पता चला कि उसकी आकाश से फोन पर बात हुई थी और आकाश ने बताया था कि उसे घर लौटने में आज देर हो जायेगी।


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