किस्से कहानियों के
कहानियाँ…कहानियाँ…कहानियाँ…
हर तरफ बिखरी पड़ी है कहानियां!
मेरी जिन्दगी - तेरी जिन्दगी,
इसकी जिन्दगी - उसकी जिन्दगी
सबकी जिन्दगी कहानी है।
सुबह के अखबार में,
पड़ोस के मकान में,
शहर के चौराहे पर,
गाँव की चौपाल में
सब जगह सुनाई दे रही है कहानियाँ।
कहानियों का रोना है,
कौन जाने कल क्या होना है!
कल की कहानी आज सुना रहे हैं,
आज फिर कोई कहानी बना रहे हैं,
कल अपनी कहानी खुद बनाएगा,
हम रहें ना रहें
सबको ये कहानी सुनायेगा।
कहानियों की दुनिया है
कि दुनिया की कहानियां है,
कहानियों में जिन्दगी है
कि जिन्दगी में कहानियां है,
कौन किसको बताएगा ?
खोलते हैं पिटारा किस्से कहानियों का!
सालों से जो झेली गई,
कही नहीं गई!...
अब कही जाएगी।
जिन्दगी की हर कहानी
अपना राज खुद बताएगी।
विजय कुमार बोहरा

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