उस बारिश के बाद - 36

 उस बारिश के बाद - 36

“विल यू मेरी मी!” - सार्थक उसी तरह घुटनों के बल बैठा रेड रोज रोशनी की तरफ बढ़ाते हुए बोला।

“थैंक यू फॉर दिस।” - कहते हुए रोशनी बड़े प्रेम से मुस्कुराई।

उसने अपना हाथ आगे बढ़ाकर सार्थक के हाथ से रेड रोज ले लिया।

सार्थक एक पल के लिए खुश हुआ ही था कि अगले ही पल उसकी खुशी पर तुषारापात करते हुए रोशनी ने उस गुलाब को नीचे जमीन पर गिराकर अपने पैरों तले रौंद दिया।

“ये तुमने क्या किया !... अगर यही हाल करना था तो इसको लिया ही क्यों!”

“आई हॉप कि आगे से तुम ऐसी बेवकूफी फिर कभी नहीं करोगे।”

“तुम खुद को समझती क्या हो!... है क्या तुममें ऐसा। न तो तुम्हारा ड्रेसिंग सेंस कोई बहुत अच्छा है और न ही तुम्हारी कोई स्टाइल ऐसी अट्रैक्टिव है कि कोई तुम पे फिदा हो!... ऊपर से इतने बड़े - बड़े ग्लासेस वाला चश्मा, जो बिलकुल बेहूदा लगता है!... फिर इतना घमंड किस बात पर है तुमको!” - अचानक ही सार्थक जहर उगलने लगा।

ये सब किसी ऑर्डिनरी लड़की से कहा गया होता, तो या तो वह बिल्कुल ही मायूस होकर नेगेटिविटी में फंस चुकी होती या फिर वहीं ऑन दी स्पॉट सार्थक को सबके सामने पीट चुकी होती।

लेकिन, ये रोशनी थी। ऐसे नॉर्मल लड़की की तरह रिएक्ट कैसे कर सकती थी!

सार्थक की बात सुनकर वह मुस्कुराई। फिर बोली - “ओह! तब तुम क्यों मेरे पीछे पड़े हो ?... तुमको कोई खूबसूरत लड़की भी भाव नहीं देती क्या ?”

रोशनी के कहे उस एक वाक्य ने ही सार्थक की घोर इंसल्ट कर दी थी। इसके बाद वह आगे बढ़ी तो उसकी फ्रेंड बरखा मिल गई।

“वाह! रोशनी! तेरा जवाब नहीं।” - रोशनी को देखते ही वह बोली - “सार्थक जैसे रोड रोमियो के साथ ऐसे ही सलूक करना चाहिए।”

“कॉलेज में फर्स्ट ईयर ही है उसका, तो अभी ज्यादा ही आजादी फील कर रहा है। धीरे - धीरे उसकी समझ में आ जाएगा कि यूं हर किसी से फ्लर्ट करते रहने से लेने के देने पड़ सकते हैं।”

“वैसे ये बता, उसने कितना कुछ उल्टा - सीधा बोला, तुझे बुरा नहीं लगा ?”

“बुरा क्यों लगेगा ?... मुझे तो और अच्छा लगा।”

“तू नहीं बदलने वाली।”

जवाब में रोशनी बस मुस्कुरा दी।

इसके बाद वे दोनों ही क्लासरूम की तरफ बढ़ चली।

***

हिस्ट्री की क्लास चल रही थी।

प्रोफेसर राघव चंद्रगुप्त मौर्य का चैप्टर पढ़ा रहे थे। स्टूडेंट्स जरूरी चीजें नोट करते जा रहे थे।

लिखते - लिखते अचानक रोशनी का पेन चलना बंद हो गया।…मतलब चल तो रहा था, पर रुक - रुककर!

वह पेन को कॉपी पर घिसटने लगी। उसके पीछे बैठे अंकुर ने देखा, तो अपना पेन उसे देते हुए बोला - “इससे लिख लो।”

“तुम्हारे पास एक्स्ट्रा पेन है ?”

“नहीं।”

“तो तुम किससे लिखोगे ?”

“तुम्हारा लिखना ज्यादा जरूरी है।” - अंकुर मुस्कुराते हुए बोला।

“थैंक यू!” - कहते हुए रोशनी ने उससे पेन ले लिया।

रोशनी बड़े - बड़े ग्लास वाला चश्मा पहनती थी, जिसकी वजह से सबको ऐसा लगता था कि वह बहुत ज्यादा स्टडी करती है। बात सही भी थी। उसे पढ़ना और लिखना दोनों ही बहुत पसन्द थे।

***

क्लास रूम में सौम्या का ध्यान प्रोफेसर राघव के लेक्चर और किताबों से ज्यादा उसके मोबाइल पर था, जो कि डेस्क पर उसकी आंखों के सामने ही रखा हुआ था। मोबाइल उसने साइलेंट किया हुआ था। लेकिन, इंटरनेट ऑन था और वॉट्सएप पर ईशान से उसकी चैटिंग चल रही थी।

“आज शाम को फ्री हो ?” - उसने msg टाइप करके send किया।

“हां, हमेशा की तरह!” - ईशान का जवाब आया।

“ओके। मिलते हैं फिर शाम को।”

सौम्या ईशान के प्यार में पड़ चुकी थी। अब पढ़ाई लिखाई भला कहां होने वाली थी उससे!

अंकुर देख रहा था कि सौम्या का ध्यान मोबाइल पर ही था। जब से उसने सौम्या को पब में उस हालत में देखा था, उसकी चिन्ता बढ़ गई थी।

***

“उससे तुझे क्या लेना - देना ?... उसकी लाइफ है, जैसे उसको जीना है, जीने दे।” - केशव ने अंकुर से कहा - “वैसे भी तू बेवजह ही उसकी पर्सनल लाइफ में इंटरफेयर कर रहा है।”

केशव और अंकुर इस समय कॉलेज कैंटीन में थे।

“बेवजह तो नहीं।” - चाय की ग्लास हाथ में थामे अंकुर बोला - “तू खुद सोच, जो लड़की दिखने में बेहद खूबसूरत हो।…कभी किसी को घास न डालती हो, वो अगर किसी के प्यार में पड़ जाए, तो किस हद तक जा सकती है ?”

“हां, ये तो है कि वो अपने लवर के लिए हर हद पार कर सकती है। लेकिन मैं ये नहीं समझ पा रहा हूँ कि कॉलेज में एक से एक हैंडसम लड़के भरे पड़े हैं, फिर ये सौम्या किसी बाहरी लड़के के प्यार में कैसे पड़ गई ? है कौन वो ?”

“ये तो मैं भी नहीं जानता। पर कोई है जरूर। और यही मेरी चिन्ता की वजह है। अगर उस लड़के ने सौम्या को धोखा दे दिया तो इसकी तो लाइफ खत्म ही हो जाएगी।”

“बात तेरी सही है। लेकिन, तू सौम्या की इतनी परवाह क्यों कर रहा है ? इस कॉलेज में उसके दीवाने वैसे भी बहुत है।…कहीं तू भी उनमें से एक तो नहीं है ?”

“क्या बकवास कर रहा है ?... ऐसी कोई बात नहीं है। मैं तो बस इंसानियत के नाते उसकी हेल्प करने की सोच रहा हूं।”

“और लड़कियां भी तो है कॉलेज में, जिनको तेरी मदद की जरूरत हो सकती है।”

“मजाक उड़ा रहा है मेरा ?”

“नहीं भाई ! मजाक नहीं उड़ा रहा। सौम्या जैसी एक और लड़की है, जो हमेशा लड़कों से दूर भागती है।”

“अच्छा ! कौन है ऐसी ?... जरा नाम तो बताओ।”

“रोशनी सक्सेना!” - केशव बोला।

“रोशनी सक्सेना!... वो.. वो एलियन!... उसको भला किसी की मदद की क्या जरूरत! वो तो खुद हर रोज कई लोगो की मदद करती रहती है।”

“लोगों की मदद करती रहती है ?... कैसे ?”

“ये तो मैं नहीं बता सकता। लेकिन, वो बड़ी रहस्यमयी लड़की है। मुझे नहीं लगता कि उसको कभी किसी की हेल्प की जरूरत पड़ेगी भी।…अभी के लिए मेरी सारी चिन्ता सौम्या को लेकर ही है।”


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