उस बारिश के बाद - 37
“तो, इसमें भला तू क्या कर सकता है ?” - सौम्या के लिए अंकुर को चिन्तित होते देख केशव ने पूछा - “तुझ पर ना, जो ये समाज सेवा का भूत सवार है, उसको उतार फेंक और अपने करियर पर फोकस कर।”
“बट, आई लव यू सौम्या!” - कैंटीन में उसके मुंह से निकले इन तीन शब्दों के साथ ही 'चटाक' की एक तेज आवाज कैंटीन में गूंज उठी।
अगले ही पल उसका बायां गाल लाल दिखाई दे रहा था। गाल पर पांचों अंगुलियां छप चुकी थी।
जिस गाल पर अंगुलियां छपी थी, वह यश का था और अंगुलियां छापने वाली सौम्या थी। वह बस अभी कैंटीन में आई ही थी और उसके पीछे - पीछे यश भी बस अभी ही वहां आया था।
सौम्या गुस्से में थी। वह एक मेज पर जाकर बैठी। यश अभी अपना गाल सहलाते हुए सोच ही रहा था कि वह भी सौम्या के आसपास ही कहीं बैठे या उससे दूर!
उसको यूं कश्मकश में पड़ा देखकर केशव बोला - “भाई! अब भी कोई कन्फ्यूजन है क्या!.. जवाब मिल तो गया।”
“तुम अपने काम से काम रखो ना!” - आहत भाव से केशव की तरफ देखते हुए यश बोला और सौम्या से दूर रखी एक मेज की तरफ बढ़ गया।
“सौम्या को देखो अंकुर!” - केशव अंकुर से मुखातिब हुआ - “गुस्से में तो यह और भी ज्यादा खूबसूरत लगती है ना!”
“तो!”
“ये लड़कों से पता नहीं क्यों इतना चिढ़ती है ?”
“ये सब तेरी गलतफहमी है। ये हर एक के सामने एटीट्यूड में रहती है। इसका तो गुस्सा भी नकली है!”
“नकली गुस्सा!”
“हां, एकदम दिखावटी!”
“मुझे तो नहीं लगता। वैसे उस रात पब में सच में तूने इसी को देखा था ना!”
“हां। अब कितनी बार कहूं ये एक ही बात!”
“नहीं, इसे देखकर लगता नहीं कि ये इस टाइप की लड़की है।”
“प्यार में लड़कियां कुछ भी कर सकती है।”
“तुझे तो इसकी बड़ी चिन्ता है ना!”
“हां। है तो सही।”
“तो क्या करेगा तू इसके लिए ?”
“पहले ये तो पता चले कि इसका अफेयर है किसके साथ!”
***
“क्या बात है सौम्या! आज तो तू कुछ ज्यादा ही गुस्से में दिखाई दे रही है!” - सौम्या जिस मेज पर आकर बैठी थी, वहां पहले से ही बैठी रश्मि आश्चर्यचकित होते हुए बोली।
“हां, दिखाई दे रही हूँ, क्योंकि मैं हूँ।”
“क्यों है ?”
“देखा नहीं, वो यश पिछ्ले सप्ताह से अब तक मुझे तीन बार प्रपोज कर चुका है।”
“तो तू उसे रिजेक्ट करके पीछा छुड़ा।”
“कर तो चुकी हूँ और प्रूफ के तौर पर थप्पड़ भी मार चुकी हूँ। लेकिन वो पीछा छोड़ कहां रहा है!”
“तो, उसका प्रपोजल एक्सेप्ट कर ले, तब शायद वह पीछा छोड़ दे।”
रश्मि की कही बात पर सौम्या ने उसे घूरकर देखा। फिर जोर से हँस पड़ी - “अच्छा! तो एक्सेप्ट करने से वह पीछा छोड़ देगा!”
रश्मि भी हँसी - “इन लड़कों से पीछा छुड़ाना आसान तो नहीं है, पता नहीं पॉसिबल भी है या नहीं।”
“सही कहा।”
“वैसे एक बात तो है।”
“क्या ?”
“लड़कों के मामले में तू बड़ी लकी है।”
“अच्छा!... कैसे ?”
“अरे, कितने लड़के तेरे पीछे पड़े रहते हैं!”
“प्रॉब्लम जब तक खुद की ना हो, तब तक उस पर डिस्कस करने में बड़ा मजा आता है।”
“मतलब ?”
“ये लड़के बड़ी मुसीबत होते हैं।”
“अच्छा! चल ये सब छोड़। तू तो ये बता कि तुझे अपने कॉलेज में कोई पसंद आया क्या ?”
“नहीं। मेरे लायक लड़का इस कॉलेज में कोई है ही नहीं।”
“अच्छा!”
“तो तू अभी तक सिंगल है।”
“सिंगल तो नहीं हूँ।” - सौम्या शरारती मुस्कान के साथ बोली।
“मतलब, तेरा कोई BF है ?”
सौम्या दो बार तेजी से हां में सिर हिलाया।
“कौन है वो ?”
“बताती हूँ।” - कहते हुए उसने अपने मोबाइल में से ईशान की फोटो रश्मि को दिखाई।
“वाऊ! ये तो बहुत हैंडसम है।”
“मेरी चॉइस है, हैंडसम तो होगा ही।” - सौम्या मुस्कुराते हुए बोली।
***
रोशनी इस समय कॉलेज लाइब्रेरी में बैठी कोई बुक पढ़ रही थी। उसकी आंखों की पुतलियां बड़ी तेजी से बुक के पन्नों पर शिरकत कर रही थी।
बरखा वहीं उसके सामने बैठी कोई मैगजीन देख रही थी।
“तू इतना क्या पढ़ती है ?... बोर नहीं होती पढ़ - पढ़कर ?”
“बिल्कुल नहीं।” - रोशनी धीरे से बोली - “ये बुक्स ही है, जो मुझे लाइफ में नए - नए इनोवेशन करने की प्रेरणा देती है और लाइफ को मजेदार बनाती है।”
“मतलब, तुम्हारा दिमाग फिराने में अहम भूमिका इन बुक्स की ही है!”
“ऐसा तुमको लग रहा है कि मेरा दिमाग फिरा हुआ है, असल में वो अपनी जगह पर ही है।”
“अरे, वो तो होगा ही। लेकिन, तेरी अजीब हरकतें और अजीब आदतें देखकर सबको लगता है कि तेरा दिमाग थोड़ा खिसका हुआ है।”
“अच्छा! किसको लगता है ?”
“सबको।”
“तुझे क्या लगता है ?”
“वैसे तो तू बहुत इंटेलीजेंट है। लेकिन, कभी - कभी तेरी अजीब हरकतें देखकर मुझे संदेह होता है!”
“एक स्टडी के मुताबिक इस दुनिया में अभी तक इस बात का कोई पता नहीं लगा पाया है कि लोग पागल क्यों हो जाते हैं और अचानक से अजीब हरकतें क्यों करने लगते हैं!”
“अरे, मेरा वो मतलब नहीं था!”
“इट्स ओके बरखा! मुझे तेरी बात का बुरा नहीं लगा। एक्चुअली मुझे कभी किसी की किसी भी बात का बुरा नहीं लगता।.. मैंने तो बस एक फैक्ट बताया है और एक और फैक्ट ये भी है कि असल में कोई पागल होता नहीं है। लेकिन, जब कोई इंसान ऐसी हरकतें या कह सकते हैं कि ऐसी एक्टिविटी करने लगता है, जो आम इंसान नहीं करते, तो लोग उसे पागल मानने लगते हैं।…असल में, वह अपने हिसाब से बिलकुल ठीक होता है, पर लोगों को लगता है कि उसका दिमाग खिसक गया है।”
“अच्छा!”
“हां और जानती हो, हर इंसान खुद को बहुत स्मार्ट समझता है। यहां तक कि मूर्ख से मूर्ख इंसान भी खुद को इंटेलीजेंट समझता है।”
“तो, इन सब बातों का मतलब क्या निकलता है ?”
“बस इतना ही कि हर एक की एक आंतरिक दुनिया भी होती है। लोग बाहरी दुनिया में बिहेवियर की वजह से किसी इंसान का आकलन करते हैं, लेकिन कोई भी उस इंसान की आंतरिक दुनिया के बारे में नहीं जानता।…आंतरिक दुनिया के बारे में तो वह इंसान खुद ही जानता है और उसे पता होता है कि वह पागल या सनकी नहीं है, क्योंकि हर चीज की वजह उसके पास होती है। खुद को सही साबित करने का तर्क उसके पास होता है।”
रोशनी की कही बातें बरखा की समझ में तो नहीं आ रही थी। लेकिन, फिर भी वह समझने की कोशिश कर रही थी और करती भी क्यों नहीं, आखिर वह उसकी बेस्ट फ्रेंड जो थी।
रोशनी जो बातें बरखा को बता रही थी, वे बातें वह किसी और से कभी शेयर करने का सोचती भी नहीं थी। क्योंकि कुछ बातें ऐसी होती है, जो हर किसी से नहीं कही जाती, सिर्फ बेस्ट फ्रेंड से ही कही जा सकती है।

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