उस बारिश के बाद - 9

 उस बारिश के बाद - 9

शहर के उसी आलिशान बंगले में वह व्यक्ति मोबाइल पर किसी से कह रहा था - “तीन साल बाद शहर वापस लौटकर भी सौरभ कुछ नहीं कर पाया। हमने तो अभी खेल शुरू भी नहीं किया और वह खुद ब खुद एक नए चक्रव्यूह में फंसता जा रहा है। पहली मीटिंग में उसने खुद ही अंकिता से मिलने से मना कर दिया और दूसरी मीटिंग में कुछ ऐसा बोल दिया कि अंकिता खुद ही उससे खफा होकर चली गई।…हां, ये हमारे लिए अच्छा ही है कि सौरभ अभी तक भी हकीक़त से अंजान है।”

***


आकाश में बादल छाए हुए थे और रह - रहकर बिजलियां चमक रही थी।

मौसम काफी सुहावना हो रहा था।

अपने घर की छत पर घूमते हुए संजना अपने ही विचारों में खोई हुई थी - “वह कितना अकेला और तन्हा है। कितना गलत हुआ उसके साथ। उसका दोस्त आकाश और उसकी गर्लफ्रेंड अंकिता ने कितना गलत किया उसके साथ! सच में, आज के टाइम में किसी पर यूं ही आंख मूंदकर भरोसा करना तो बेवकूफी ही है।…उसे इस समय किसी के भावनात्मक सपोर्ट की बहुत जरूरत है।”

बिजलियों की चमक बढ़ने के साथ - साथ अब गहरे काले बादलों ने आकाश को घेर लिया था।

शायद इसी वजह से बारिश की बड़ी - बड़ी बूंदें धरती पर गिरने लगी थी।

संजना खुली छत पर ही घूम रही थी, तो जाहिर सी बात है कि बारिश की वे बड़ी - बड़ी बूंदें उसके ऊपर भी गिर ही रही थी।

लेकिन, उसे होश कहां था इसका!

वह तो अपनी ही दुनिया में खोई हुई थी और इस समय उसकी दुनिया तो बस सौरभ ही था।

“क्या मैं उसकी किसी तरह मदद कर सकती हूं ?... क्या मैं उसे इमोशनली सपोर्ट दे सकती हूं ? क्या मैं वह कंधा बन सकती हूं, जिस पर सिर रख के वह खूब रो सके और अपने जी का बोझ हल्का कर सके ?”

बारिश तेज होती जा रही थी और इसके साथ ही संजना के विचारों में भी तेजी आती जा रही थी।

“एक इंसान, जिसने किसी से सच्चा प्यार किया। उसी प्यार ने जब उसे छोड़कर किसी और को अपना लिया तो वह सहन नहीं कर पाया। उसका प्रेम प्रतिशोध बन सकता था। वह या तो उस लड़की की लाइफ तबाह कर सकता था या उस लड़के का खून कर सकता था। लेकिन, नहीं, उसने नहीं किया। उसने ऐसा कुछ भी नहीं किया।…शायद इसीलिए क्योंकि उसका प्यार सच्चा था।”

बारिश लगातार तेज होती जा रही थी।

बारिश की बूंदें टप - टप की आवाज करती हुई उस खुली छत के फर्श पर तो गिर ही रही थी।

साथ ही छत पर खड़ी, अपने विचारों में खोई संजना के ऊपर भी गिर रही थी।

वे बूंदें संजना के सिर को पूरी तरह से भिगो चुकी थी।

उसका पूरा शरीर बारिश के पानी से भीग चुका था।

उसका व्हाइट टी शर्ट और ब्लू जींस गीले होकर उसके शरीर से चिपक चुके थे।

बारिश की धाराएं उसके सिर से होती हुई चेहरे पर गिर रही थी।

चेहरे को तर करके उसके होंठों से फिसलकर उसकी ठुड्ढी से टपकते हुए हृदय स्थल पर भी गिर रही थी।…लेकिन, संजना को इसका जरा भी अहसास नहीं था।

वह तो बस अपनी सोच में ही खोई हुई थी - “कितनी अभागी है वो लड़की, जो सौरभ के सच्चे प्यार को समझ ना सकी।…और कितनी लकी होगी वो लड़की जिसकी लाइफ में सौरभ आएगा। क्या वो लकी लड़की मैं हो सकती हूं ?”

सोचते - सोचते संजना को एक तरह की खुशी महसूस हुई।

इसी समय उसे ऐसे लगा जैसे उसे कोई बुला रहा हो।

“संजना! छत पर क्या कर रही हो ?... नीचे आओ ना! भीग जाओगी तुम! देखो बारिश कितनी तेज हो रही है!”

बारिश शब्द सुनते ही संजना जैसे सोते से जागी।

उसे ऐसा लगा जैसे कि किसी ने उसे सपनो की दुनिया से खींचकर बाहर निकाला हो।

जैसे ही उसे अहसास हुआ कि वह बारिश में पूरी भीग चुकी है, तो उसे अचानक जोरों से ठंड लगने लगी।

बस फिर क्या था ?

वह तेजी सीढ़ियों की तरफ दौड़ी।

ठंड से काँपते हुए वह नीचे आई तो उसे समझ आया कि उसकी बहन सौम्या उसे कब से आवाज दे रही थी।

“ये क्या हो गया है संजू तुझे!... ठंड से कांप रही है तू तो!” - कहते हुए सौम्या ने एक तौलिया उसके शरीर के इर्द - गिर्द लपेटा और उसे कमरे में ले गई।

सौम्या संजना को अक्सर संजू कहकर ही बुलाती थी।

“अब जल्दी से चेंज कर ले नहीं तो तुझे सर्दी लग जाएगी।” - हिदायत देते हुए सौम्या ने कहा - “बारिश में भीगना तो वैसे सबको अच्छा लगता है, पर इतना भी क्या!”

ठंड से बुरी तरह काँपते हुए संजना ने नए सूखे कपड़े पहने।

सौम्या गर्म - गर्म कॉफ़ी बना चुकी थी।

इसके बाद उसने हीटर चला दिया , जिससे रूम थोड़ी ही देर में गर्म हो गया।

ठंड से थोड़ी राहत मिलने पर संजना ने अपने सिर के चारों तरफ लपेटे हुए तोलिए से बाल सुखाए और फिर बालों को खुला ही छोड़ दिया।

“अब कॉफी पी ले। तुझे अच्छा लगेगा।”

संजना बेड पर बैठी।

उसने ब्लैंकेट को अपने कंधे तक ओढ़ा।

फिर अपने दोनों हाथ ब्लैंकेट से बाहर निकाले।

सौम्या ने उसे कॉफी का कप थमाया।

कॉफी कप से उठती भाप इस बात का सबूत थी कि वह अभी भी गर्म थी।

संजना ने अपने दोनों हाथों की हथेलियों से कप को कसकर पकड़ लिया, जिससे कॉफी की गर्माहट कप के सहारे संजना की हथेलियों से होते हुए उसके हाथों में और फिर पूरे शरीर में दौड़ गई।

इससे संजना को काफी अच्छा लगा।

फिर जब कॉफी के कप को उसने होंठो से लगाया तब गर्म कॉफ़ी ने उसकी जीभ से होते हुए हलक में उतरकर पूरे शरीर को एक नई एनर्जी से भर दिया।

“अब कैसा लग रहा है ?” - सौम्या ने पूछा।

“काफी बैटर फील कर रही हूँ।” - संजना मुस्कुराते हुए बोली।


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