उस बारिश के बाद - 10
सौम्या संजना की छोटी बहन थी और शहर के ही आर्ट्स कॉलेज में फाइनल ईयर की स्टूडेंट थी।
“तुमको आज ऐसी क्या सूझी कि तुम बारिश में बिल्कुल ही भीग गई। संजू! ऐसे तो तू बीमार पड़ जाएगी।” - सौम्या बोली।
“बस यूं ही मौसम अच्छा था तो बारिश में नहाने का मन हो गया।” - संजना ने सौम्या को तो किसी तरह समझा लिया।
लेकिन वह अपने मन को समझा नहीं पा रही थी।
“ये कैसे हो गया !” - कॉफी पीते हुए संजना सोच रही थी - “मैं तो छत पर घूमते हुए सौरभ के बारे में सोच रही थी। कब बारिश आई और कब मैं इतनी ज्यादा भीग गई कि मुझे जोर से ठंड भी लगने लगी - पता ही नहीं चला!... क्यों पता नहीं चला ?... मैं सौरभ के बारे में सोचने में इतनी खो गई कि बारिश का अहसास तक नहीं हुआ मुझे!... ऐसा तो तभी होता है जब कोई किसी के प्यार में पड़ता है। तब क्या मैं सौरभ के प्यार में पड़ चुकी हूं !... क्या मुझे सौरभ से प्यार हो गया है!”
***
“क्या हुआ अंकिता ? तुम्हारा चेहरा इतना तमतमाया हुआ क्यों है ? तुम तो सौरभ से मिलने गई थी ना!” - आकाश ने पूछा।
“हां, गई तो थी।” - अंकिता अपना पर्स बेड पर जोर से पटकते हुए बोली - “लेकिन, वह तो कुछ सुनना ही नहीं चाहता। उसे तो मुझ पर बिल्कुल यकीन नहीं है। उसको लगता है कि मैं उसे कोई मनगढ़ंत कहानी सुना रही हूं और वो भी इसलिए ताकि तुम्हारी और मेरी लव स्टोरी…”
“हमारी कोई लव स्टोरी नहीं है!” - आकाश तेज स्वर में बोला।
“मुझसे कहने से क्या होगा!” - अंकिता भी चीखी - “ये बात तो तुम उसको समझाओ , जो पिछले तीन सालों से इस गलतफहमी में जी रहा है कि तुम्हारे और मेरे बीच में कुछ है!”
“यही समझाने के लिए तो उसे यहां बुलाया है हमने।” - आकाश विनम्र स्वर में बोला - “लेकिन वह तो कुछ सुनने के लिए तैयार ही नहीं है।…मुझे तो लगता है कि अब कुछ नहीं हो सकता।”
“तो क्या वो खुद को ऐसे ही बर्बाद करता रहेगा ?”
“बर्बाद ?” - आकाश व्यंग्य भरे स्वर में बोला - “वो कहां बर्बाद हो रहा है। उसकी गलतफहमी की वजह से तो हम ही बर्बाद हो रहे हैं।”
“वो हमारी मजबूरी समझ लेता तो कभी गलतफहमी में नहीं रहता। लेकिन…” - अंकिता बोली।
“अब बस एक ही रास्ता बचा है।”
“क्या ?”
“हमें उसे सब कुछ सच - सच बता देना चाहिए।”
“नहीं! ऐसा नहीं कर सकते।…ऐसा किया तो वह टूट जाएगा।”
“और कितना टूटेगा !”
“टूटकर बिखर जाएगा।…हम उसे सीधे - सीधे पूरी बात नहीं बता सकते। बस किसी तरह उसकी गलतफहमी दूर हो जाए तो सब ठीक हो जाएगा।”
***
“तो, तुम जॉब छोड़कर हमेशा - हमेशा के लिए वापस आ गए हो ?”
“नहीं। बस कुछ दिन की छुट्टी लेकर आया हूं।”
“मतलब, वापस जाने का इरादा रखते हो ?”
“हां।”
“जब यहां रुकना ही नहीं है तो वापस आने की वजह जान सकता हूं ?”
“मैं बताना जरूरी नहीं समझता।” - कहते हुए सौरभ तेजी से चलता हुआ अपने रूम की तरफ चला गया।

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