कहने को तो संजना कह गई।
लेकिन फिर उसका मतलब समझकर एकाएक ही उसे जोर से हँसी आ गई।
सौरभ हँसा तो नहीं, पर उसके होंठों पर मुस्कान जरूर उभर आई थी।
उसे जोर से हँसते देख कुछ पल तक सौरभ उसे बस यूं ही देखता रहा।
कितनी निश्छल और मासूम हँसी थी!
बिल्कुल बच्चों की तरह।
इसी बीच हँसते - हँसते संजना की नजरें सौरभ की नजरों से जा मिली।
उसे थोड़ा अजीब लगा और अचानक ही उसकी हँसी थम गई।
संजना की हँसी अचानक रुकी तो सौरभ भी थोड़ा झिझका।
उसने संजना के चेहरे से अपनी नजरें हटाई और बस यूं ही इधर - उधर देखने लगा।
“वैसे, तुमने ठीक से बताया नहीं था कि तुम यहां इस शहर में किस काम के लिए आए हो ?” - गाल तक आ चुकी अपनी एक शरारती जुल्फ को कान के पीछे करते हुए संजना ने पूछा।
सौरभ ने फिर से उसकी तरफ देखा।
एक समय था जब सौरभ अपने दिल की हर बात किसी न किसी से शेयर कर दिया करता था।
कभी मां से, कभी पापा से, कभी किसी दोस्त से।
लेकिन पिछले तीन साल से उसने अपने दिल की कोई बात किसी से शेयर नहीं की थी।
पर संजना में जाने कैसी कशिश थी कि वह उसके सामने अपना दिल खोलकर रख देना चाहता था।
“है कोई, जो कभी मेरा बेस्ट फ्रेंड हुआ करता था।” - सौरभ ने बताया - “लेकिन, अब मैं उससे नफरत करता हूं। उसी ने मुझे दोबारा इस शहर में आने के लिए मजबूर किया। सिर्फ इसलिए क्योंकि वो मुझसे मिलना चाहती है। मैं नहीं जानता क्यों ?”
बोलते - बोलते सौरभ काफी इमोशनल हो गया।
उसकी आँखें भी नम हो चली थी।
सौरभ एक ऐसी लड़की के सामने अपना दिल खोलकर रखने जा रहा था, जिससे मिले हुए उसे अभी 24 घंटे भी नहीं हुए थे!
सौरभ की हालत देखकर संजना समझ रही थी कि वह अपनी लाइफ की ऐसी बातें उसे बताने जा रहा है जो हर किसी को नहीं बताई जाती।
“पर क्यों ?” - संजना सोचने लगी - “मुझे तो यह ठीक से जानता भी नहीं। फिर यह मुझे क्यों बता रहा है ये सब ?”
वजह तो उसकी समझ में नहीं आई।
लेकिन अब सौरभ में उसकी रुचि बढ़ गई थी।
वह उसके बारे में जानना चाहती थी।
“कौन मिलना चाहती है ?” - संजना ने पूछा - “और अपने ही बेस्ट फ्रेंड से नफरत क्यों हो गई है तुमको ?”
“आकाश नाम है मेरे उस फ्रेंड का और जो लड़की मुझसे मिलना चाहती है, वो अंकिता है।” - सौरभ की आवाज में दुनियाभर का दर्द सिमटा हुआ था।
पिछले तीन सालों से उसने आकाश और अंकिता का नाम किसी के सामने नहीं लिया था।
मतलब, उनके बारे में किसी को कुछ नहीं बताया था और आज जबकि वह संजना को यह सब बता रहा था तो उसका अपने इमोशंस पर से कंट्रोल हट चुका था।
सौरभ आगे बोला - “अंकिता कभी मेरी गर्लफ्रेंड हुआ करती थी।
जल्दी ही हम शादी करने वाले थे।
लेकिन फिर अचानक से एक सैलाब आया, जिसने मुझसे मेरी अंकिता को हमेशा - हमेशा के लिए छीन लिया।”
कहते - कहते सौरभ ने अपना सिर झुका लिया था।
उसकी आंखों से आंसू की दो बूंदें मेज पर एक के ऊपर एक रखे उसी के हाथों पर गिर पड़ी।
वह चाहता तो नहीं था, लेकिन संजना आंसू की उन बूंदों को उसकी आंखों से गिरते देख चुकी थी।
फिर पता नहीं किस भावना के वशीभूत संजना ने अपने दोनों हाथ सौरभ के हाथों पर रख दिए और सौरभ के हाथों के साथ ही संजना की हथेलियां भी आंसू की उन बूंदों से भीग गई।
उसकी हथेलियों की छुअन से सौरभ के दिल को एक तरह के सुकून का अहसास हुआ।
ये वो अहसास था, जो बिना बोले ही बता देता था कि 'तुम अकेले नहीं हो। मैं तुम्हारे साथ हूँ।'
इसी सुकून भरे अहसास से सौरभ की पलकें मूंद गई, जिससे आंसू की दो और बूंदें छलक पड़ी।
लेकिन अबकी बार वे सौरभ के बजाय संजना के हाथों पर गिरी।
पिछले तीन सालों से जिस दर्द को सौरभ अकेला सह रहा था, उसे बांटने के लिए अब संजना आ चुकी थी।

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