मर्डर ऑन वेलेंटाइन नाइट - 49

 मर्डर ऑन वेलेंटाइन नाइट - 49

" हाँ। यह मेरे बेटे की रिंग है। लेकिन , आपको ये कहाँ से मिली ? "
" उसी कार में से , जिसकी सहायता से आकाश ने रिचा का कत्ल किया था। "
" क्या ? " - पवन माथुर फिर चौंके - " रिचा का कार एक्सीडेंट हुआ था ? "
साकेत व्यंग्य से मुस्कराया - " मुझसे तो झेला नहीं जा रहा आकाश ! तुम्हीं समझाओ अपने पापा को। बताओ इन्हें कि कैसे तुमने रिचा का कत्ल किया। "
साकेत का यह वाक्य सुनकर आकाश समझ गया था कि अब खेल ज्यादा लंबा नहीं खिंचने वाला। इसीलिये उसने अपने पिताजी से दो टूक बात कही - " पापा ! आप जानते हैं कि कैसे क्या हुआ है। आप अनजान बनने की कोशिश क्यों कर रहे हैं , जबकि मैं आपको सारी सच्चाई पहले ही बता चुका हूँ। सारे सबूत मेरे खिलाफ है और इसीलिए मैं अपना अपराध भी स्वीकार कर चुका हूँ। प्लीज अब आप शांत रहिये। "
पवन माथुर समझ चुके थे कि उनका बेटा बुरी तरह से फंस चुका है। अब ज्यादा कुछ किया नहीं जा सकता।
" मामले को किसी तरह रफा दफा नहीं किया जा सकता ? " - पवन माथुर के इस आकस्मिक सवाल से कॉन्फ्रेंस रूम में कुछ पलों के लिए मुर्दाघर सी खामोशी छा गई।
कुछ क्षणों के बाद साकेत व्यंग्य से मुस्कराते हुए बोला - " कमाल करते हैं आप भी मथुरजी ! इतने लोगों और विशेषकर , जिसकी बहन का कत्ल हुआ है , उस रागिनी के सामने आप मामले को रफा दफा करने की बात कर रहे हैं ! "
" तो अब मेरे बेटे का क्या होगा ? "
" वही , जो एक कातिल का होता है। " - साकेत बोला - " वैसे , आपके बेटे के केवल अपराध स्वीकार कर लेने भर से काम नहीं चलेगा। यहाँ तो यह अपना मुँह खोलने को तैयार ही नहीं हो रहा। लेकिन , कोर्ट में आप जानते ही है , कैसे कैसे सवाल पूछे जाते हैं। वहाँ इसकी चुप्पी काम नहीं आएगी , इसीलिए चाहता हूँ कि यह अच्छे से प्रैक्टिस कर ले। "
" कैसी प्रैक्टिस ? "
" यह बताने की कि इसने कत्ल किया कैसे ? न कोई सबूत छोड़ा , न सुराग ! इतने योजनाबद्ध तरीके से की गई हत्या का रहस्य तो हर कोई जानना चाहेगा , ऐसे में अगर कोर्ट में यह चुप रहा , तो कैसे चलेगा ? "
" आकाश अगर नहीं बताना चाहता , तो माथुरजी तो बता ही सकते हैं। " - अनिकेत ने पहली बार अपना मुँह खोला - " आकाश सब कुछ तो इन्हें बता चुका है। "
" तुम बिल्कुल ठीक कह रहे हो। " - साकेत बोला - " क्यों माथुरजी ! ठीक रहेगा ना , ऐसा करना ?...वैसे भी आकाश जैसा मासूम और सीधा लड़का ज्यादा कुछ बोल भी नहीं पायेगा , तो आप ही बता दीजिए कि इसने कत्ल किया कैसे ? "
" हाँ , पापा ! आप ही बता दीजिए। आपको तो सब पता है ना ! " - आँखों मे आँसू लिए आकाश बोला।
" बस , बहुत हो गया। " - कहते हुए पवन माथुर आकाश के पास गए और बोले - " अब मैं और नहीं सह सकता। तुम्हें बलि का बकरा नहीं बनने दूँगा। जो अपराध तुमने किया ही नहीं , उसे स्वीकार करने की कोई जरूरत नहीं है। "
पवन माथुर की यह बात सुनकर सब चौंक उठे।
" आप कहना क्या चाहते हैं ? " - रागिनी ने पूछा।
" मेरे बेटे ने किसी का खून नहीं किया। यह बेगुनाह है। "
" क्या ? " - रागिनी चौंकी - " अगर आकाश कातिल नहीं है तो फिर मेरी बहन का कातिल आखिर है कौन ?...मिस्टर अग्निहोत्री ! क्या आप मुझे बताएंगे कि यहाँ पर यह सब हो क्या रहा है ?...कभी कहा जाता है कि आकाश कातिल है , कभी कहा जाता है कि वह कातिल नहीं है। आप ठीक से क्यों नहीं बताते कि मेरी बहन का कत्ल आखिर किसने किया ? "
" आपने बहुत धैर्य रखा है रागिनीजी !...बस थोड़ा और रखिये। " - कहते हुए साकेत पवन माथुर से बोला - " आप कुछ कह रहे थे। "
" रिचा का कत्ल मेरे बेटे ने नहीं , मैंने खुद किया है। "
किसी को अपने सुने हुए शब्दों पर यकीन नहीं हो रहा था।
" ये आप क्या कह रहे हैं ? " - रागिनी बोली - " आप अपने बेटे को बचाने के लिए झूठ बोल रहे हैं ना ? "
" नहीं। मैं सच बोल रहा हूँ। रिचा को मैंने। ही मारा था और इसका सबूत ये है कि मैं रिचा के कत्ल से जुड़े एक - एक सवाल का जवाब आसानी से दे सकता हूँ। आकाश ने तो बस मुझे बचाने के लिए इल्जाम अपने सर लिया है , तभी तो यह बिल्कुल नहीं बता पा रहा कि कत्ल हुआ कैसे ! इसके पास तो रिचा का कत्ल करने की कोई वजह भी नहीं थी , जबकि मेरे पास थी। " - पवन माथुर एक ही साँस में कह गया।
" तब तो मिस्टर अग्निहोत्री से कातिल को पहचानने में चूक हो गई ! " - रागिनी बोली।
" कोई चूक नहीं हुई है। " - एकाएक ही आकाश बोला - " ये जानते थे कि मैं इल्जाम अपने ऊपर ले रहा हूँ। A अक्षर वाली रिंग देखकर ही मैं समझ गया था कि मिस्टर अग्निहोत्री जान चुके हैं कि असली कातिल कौन है ! शायद इसलिये क्योंकि मेरी कार को रिचा का कत्ल करने के लिए इस्तेमाल किया जाना और मेरे ही प्लाट में कार को दफनाया जाना - ये सब इस तथ्य की ओर संकेत कर रहे थे कि कातिल मेरे पापा ही होंगे। लेकिन , मन में एक तरह की उम्मीद थी , इस बात की उम्मीद थी कि शायद कोई और कातिल हो ! मगर , उस रिंग के कार में से बरामद होने की बात सुनकर कोई उम्मीद बाकी नहीं रही। यह निश्चित हो गया कि रिचा का कत्ल मेरे पापा ने ही किया था और इसी के साथ मैंने फैसला भी कर लिया कि पापा को बचाने के लिए मैं सारा इल्जाम अपने ऊपर ले लूँगा। लेकिन , मिस्टर अग्निहोत्री को पता था कि मैं कातिल नहीं हूँ। इसीलिए इन्होंने पुलिस के बजाय मेरे पापा को कॉल किया , ताकि सच सबके सामने आ सके। "
रागिनी ने सवालिया नजरों से साकेत की ओर देखकर पूछा - " यहाँ कोई भी , कुछ भी बोल रहा है। लेकिन , मुझे सिर्फ आप पर यकीन है मिस्टर अग्निहोत्री ! आप बताईये , कौन है कातिल ?...आकाश , मिस्टर माथुर या फिर कोई और ?...”


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