मर्डर ऑन वेलेंटाइन नाइट - 48

 मर्डर ऑन वेलेंटाइन नाइट - 48

आकाश ! तुमने रिचा को मारा ? " - रागिनी बुरी तरह से चौंकते हुए बोली - " मुझे बिल्कुल भी यकीन नहीं हो रहा। तुम ऐसा कैसे कर सकते हो ? तुम तो रिचा से बहुत प्यार करते थे , फिर तुमने उसकी जान क्यों ली ? "
" हाँ आकाश ! " - साकेत ने रहस्यमय ढंग से मुस्कराते हुए पूछा - " बताओ , तुमने रिचा का कत्ल क्यों किया ? "
" और तुमने अपनी ही कार से खुद का एक्सीडेंट कैसे किया और सबसे जरूरी सवाल क्यों ?...तुम्हें खुद अपनी ही कार से अपना ही एक्सीडेंट करने की जरूरत क्यों पड़ी ? " - पलक ने पूछा।
" मुझे तो ये नहीं समझ आ रहा कि तुम जैसे सीधे लड़के ने कत्ल की इतनी शानदार योजना कैसे बनाई ? कोई सबूत , कोई सुराग तक नहीं छोड़ा। " - अभय ने पूछा।
" चुप हो जाओ तुम सब लोग ! " - एकाएक ही चिल्लाते हुए आकाश अपनी चेयर से उठ खड़ा हुआ - " मैंने जो करना था , कर दिया और जो भी सजा मुझे मिलनी है , उसके लिए मैं तैयार हूँ। लेकिन , मुझसे कोई सवाल मत करो। मैं किसी भी सवाल का जवाब देने की हालत में नहीं हूँ। "
" यह तो बहुत छोटे स्तर का मामला है आकाश ! " - साकेत आकाश को दोबारा बैठने का संकेत करते हुए बोला - " यहाँ तो सब अपने है , तुम किसी के सवाल का जवाब दो या ना दो , तुम पर किसी तरह का कोई दबाव नहीं है। लेकिन , जल्द ही यह मामला पुलिस तक पहुंचेगा और इतना तो हम सब जानते ही है कि पुलिस वालों के सच उगलवाने के तरीके कितने भयावह होते हैं। "
" आप मुझे डराने की कोशिश कर रहे हो ! " - आकाश बिल्कुल निडरता से बोला - " लेकिन , मैं किसी से डरने वाला नहीं हूँ। "
" ठीक है , फिर मैं इंस्पेक्टर मुखर्जी को कॉल करके मामले की जानकारी दे देता हूँ। वैसे भी कातिल का पता लगाने तक का काम ही हम जासूस लोग करते हैं , इसके आगे का काम तो पुलिस वालों को ही करना होता है। " - कहते हुए साकेत ने एक कॉल किया , फिर रागिनी से बोला - " केस सॉल्व हो गया। मैंने अपना काम पूरा कर दिया। "
" थैंक्स सर ! " - रागिनी बोली - " लेकिन , जब तक मुझे अपनी बहन के कातिल का पता नहीं था , तब तक एक तरह की बैचेनी थी मन में। चाहती थी कि बस एक बार किसी तरह पता चल जाये कि रिचा को किसने मारा , फिर मैं उस कातिल को वो सबक सिखाऊंगी कि जिंदगीभर किसी और का कत्ल करने के बारे में सोचेगा तक नहीं। लेकिन , अब जबकि आकाश ने ही रिचा को मारा था , तो यह सच्चाई जानकर मन एक तरह की वितृष्णा से भर उठा है। "
इसी समय एक शख्स ने भीतर प्रवेश किया।
उसे देखकर हर कोई आश्चर्यचकित हो उठा।
और आकाश !...आकाश को तो मानो , अपनी आँखों पर विश्वास ही नहीं हो रहा था।
" पापा ! आप यहाँ ? " - चौंकते हुए आकाश साकेत से बोला - " आपने तो पुलिस को कॉल किया था ना ? "
" सोचा तो था , लेकिन मुझे लगा कि पहले तुम अपने पापा से मिलना चाहोगे। आखिर , जो अपराध तुमने किया है , उसके लिए गिल्टी तो फील कर ही रहे होंगे और जब भी तुम दुख या तकलीफ में होते हो , तब तुम्हारे पिताजी ही तो तुम्हें सपोर्ट करते हैं। इसीलिये मुझे लगा कि तुम इनसे जरूर मिलना चाहोगे। "
आकाश ने अजीब निगाहों से साकेत की ओर देखा।
" यहाँ हो क्या रहा है और मेरे बेटे ने कौनसा अपराध कर दिया ? " - आकाश के पिता पवन माथुर ने साकेत से पूछा।
" अपराध ? " - साकेत ने व्यंग्य भरे लहजे में कहा - " यह तो आकाश ज्यादा अच्छे से बता सकता है। "
पवन माथुर ने आकाश की ओर देखते हुए पूछा - " ये अग्निहोत्रीजी क्या कह रहे हैं आकाश ! क्या अपराध कर दिया तुमने ? "
" कत्ल। "
" क्या ? "
" रिचा का कत्ल मैंने ही किया था। "
पवन माथुर बुरी तरह से चौंक उठे।
" य.. ये क्या बकवास कर रहे हो तुम ? "
" बकवास नहीं कर रहा। " - साकेत बीच में बोला - " अपना अपराध स्वीकार कर रहा है वो।...वो अपराध जो उसे बहुत पहले ही स्वीकार कर लेना चाहिए था। "
" मेरा बेटा किसी का कत्ल नहीं कर सकता और आपके पास क्या सबूत है कि आकाश ने ही रिचा का कत्ल किया है ? "
" उसका खुद अपना अपराध स्वीकार कर लेना पर्याप्त नहीं है क्या ? "
" वो किसी के दबाव में आकर ऐसा कर रहा होगा। "
साकेत ने A अक्षर वाली रिंग पवन माथुर को दिखाते हुए कहा - " सबूत तो हमारे पास बहुत है , लेकिन मेरा विचार है कि आपका काम इसी से चल जाएगा।...पहचानते है आप इस रिंग को ? "
A अक्षर वाली उस रिंग को देखकर पवन माथुर के चेहरे पर अजीब से भाव आये।
उन्होंने आकाश के भावहीन चेहरे की ओर देखा।


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