मर्डर ऑन वेलेंटाइन नाइट - 46
" हाँ। " - सलोनी बोली - " लेकिन , तुमने तो मुझसे ये कहा था कि तुम अभय से मुझे बचाने के लिए ये सब कर रहे हो। पर , अब तुम कहते हो कि अभय से मुझे कोई खतरा नहीं था। तब तुमने मुझे अपने घर में छिपाकर क्यों रखा ? "
एकाएक ही अभय ने भी पूछा - " तब तो तुम्हारे पास वे फोटोज अभी भी होंगे ? "
" हाँ। " - मुस्कराते हुए सौरभ ने फोटोज निकालकर टेबल पर रख दी।
हर कोई उत्सुकता से उन्हें देखने लगा।
" अब तुम इस बात से इनकार नहीं कर सकते कि सलोनी ने तुम्हारे बारे में जो कुछ बताया है , वो सब सच है। " - सौरभ बोला।
" हाँ। " - पराजय की मुद्रा में अपना सिर नीचे की ओर झुकाते हुए अभय बोला - " मेरी किस्मत खराब थी जो उस दिन मैं सलोनी का पीछा करते हुए आयड़ की छतरियों तक पहुंच गया था। लेकिन , तुम वहाँ किस वजह से आये थे ? "
" यह तुमने अच्छा सवाल किया है। " - हँसते हुए सौरभ बोला - " मैं वहाँ कैसे पहुंचा ?...मैं तुम्हारा पीछा करते हुए वहाँ पहुंचा था , अभय ! "
" मेरा पीछा ? " - चौकते हुए अभय ने पूछा - " लेकिन , तुम्हें मेरा पीछा करने की क्या जरूरत पड़ गयी ? "
सौरभ साफ शब्दों में बोला - " मेरे वहाँ पहुँचने और सलोनी को किडनैप करने की वजह तुम ही हो अभय ! और इतना ही नहीं , मेरे जीने की , मेरी साँसों के चलने की एकमात्र वजह तुम हो अभय ! "
" ये तुम क्या बेवक़ूफ़ीभरी बातें कर रहे हो ? " - अभय कुछ समझ नहीं पा रहा था।
" तुम कैसे समझोगे अभय ! तुम्हारे पास कुछ सोचने - समझने के लिए वक्त ही कहाँ होता है कभी। " - सौरभ आवेशित स्वर में बोला - " लोगों को बेवजह परेशान करना , उनकी जिंदगियां तबाह करना - इन सबसे तुमको फुर्सत मिले , तो तुम कुछ सोच - समझ पाओगे ! "
" तुम ये क्या बके जा रहे हो ? "
" सलोनी ! तुमने अभी तक ये नहीं बताया कि तुम्हें ड्रग्स मिलते कहाँ से थे ? " - अभय की बात पर ध्यान ना देकर सौरभ ने सलोनी से पूछा।
" किसी भी बार से। " - सलोनी बोली - " पहले वे लोग मुफ्त में देते है और फिर जब इसकी लत लग जाती है तो मनचाही कीमत वसूलते हैं। "
" तुम सबकी बात मत करो , अपने सप्लायर का नाम बताओ। "
" अभय ! "
सलोनी के मुँह से निकले उस शब्द ने हर किसी को विस्मय में डाल दिया।
" ये तुम क्या कह रही हो ? " - पलक बोली - " अभय तुम्हें ड्रग्स सप्लाई करता था ? "
" हाँ। " - सलोनी बोली।
" तुम्हें ये सब कैसे पता ? " - अभय ने सौरभ से पूछा।
सौरभ साकेत की ओर देखते हुए बोला - " आप जानना चाहते थे ना कि मेरी अभय से क्या दुश्मनी है ! ….तो आज बता रहा हूँ। बात उन दिनों की है जब मैं गुरुनानक स्कूल में पढ़ता था। अभय भी उसी स्कूल में था। मेरा एक दोस्त था , रघु। बहुत ही आम परिवार का लड़का था। एक दिन स्कूल से निकलकर सड़क क्रॉस करते वक़्त एक बस के नीचे आकर वह मर गया। मैं उस समय वहीं था। बस की स्पीड इतनी तेज नही थी कि ड्राइवर उसे कंट्रोल ना कर पाये।...रघु सड़क के बीच जाकर एकाएक ही अपने होंश खो बैठा था और इसी वजह से उसका एक्सीडेंट हुआ था। बाद में पता चला कि उसके शरीर में ड्रग्स की मात्रा पाई गई थी। सीधे - सीधे शब्दों में कहूँ तो एक 17 साल के लड़के ने ड्रग्स ली हुई थी।...यह असंभव सी बात थी। लेकिन , जहाँ अभय मौजूद हो , वहाँ ऐसी असम्भव चीज़ों का होना कोई बड़ी बात नहीं है। पुलिस ने जांच - पड़ताल की। लेकिन कुछ पता नहीं चल पाया। इस घटना की वजह से शायद अभय कुछ दिनों के लिए शांत हो गया था। मैं भी नहीं जानता था कि मासूम रघु को ड्रग्स कहाँ से मिला होगा। लेकिन , मैं इस घटना को भूल नहीं पाया। कुछ हफ्ते बाद मुझे पता चला कि ये सब अभय की वजह से हुआ था। बस उसी दिन से मैंने सोच लिया था कि अभय को मैं छोडूंगा नहीं।...उसके बाद से मैं अभय के पीछे साये की तरह लग गया। "
" लेकिन , तुमने उसी समय पुलिस को क्यों नहीं बताया। काव्या के मामले में भी तुमने पुलिस को खबर करना जरूरी नहीं समझा।...वजह जान सकता हूँ इसकी ? "
" मैं एक समाज सुधारक हूँ और अपने काम अपने तरीके से करना पसंद करता हूँ। 17 साल की उम्र में इसे बाल सुधार गृह में भेज दिया जाता। जबकि इसके सुधरने की मुझे कोई उम्मीद नहीं थी।...काव्या के मामले में मैं अभय के खिलाफ कुछ करने की सोच ही रहा था कि मुझे रिचा के कत्ल की जानकारी मिली। मुझे पूरी उम्मीद थी कि यह कत्ल भी अभय ने ही किया होगा। मैं इस बात का इंतजार करने लगा कि जल्द ही हक़ीक़त सामने आएगी और रिचा के कातिल के रूप में अभय पकड़ा जाएगा और ठीक उसके बाद मैं सलोनी को गवाह बनाकर काव्या के कत्ल की जानकारी भी पुलिस को दे दूँगा। लेकिन , उस दिन जब आपने मुझे यह बताया कि रिचा के कातिल का पता चल चुका है और वह अभय नहीं , बल्कि कोई और ही है। तब मुझे लगा कि अब मुझे आपको सब सच बता देना चाहिए और उसी दिन मैंने वो सब आपको बता दिया , जो आज यहाँ इन सबको बताया है। "
" मतलब , आपको सब कुछ पहले से पता था ? " - पलक ने चौंकते हुए साकेत से पूछा।
" हाँ। "
" कितने दिन पहले से ? "
" आज सुबह , जब मैं अभय से मिलकर लौट रहा था तो मैंने सौरभ से मिलने की योजना बनायी और वहीं पर उसने मुझे सारी सच्चाई बताई। "
" तो तुम बरसों पहले मुझे अपना दुश्मन बना चुके थे और मैं तुम्हे एक बेवकूफ और साइको समझता रहा , जबकि तुम गुप्त तरीके से मेरे लिए कब्र खोद रहे थे। " - अभय बोला।
" दुश्मन तुमको मैंने नहीं , तुम्हारे बुरे कामों ने बनाया है। “

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