मर्डर ऑन वेलेंटाइन नाइट - 45

 मर्डर ऑन वेलेंटाइन नाइट - 45


सब कुछ एक सपने की तरह लग रहा था।
मुझे यकीन नहीं हो रहा था कि काव्या अब इस दुनिया में नहीं रही !
मैं नहीं जानती थी कि अब आकाश के साथ क्या होने वाला है।
मैंने सब कुछ वक्त और भाग्य पर छोड़ दिया था।
उस रात मैं बिना कुछ खाये ही सो गई।
पेट में भूख तो थी , लेकिन कुछ भी खाने का मन नहीं हुआ।
बहुत देर तक मैं सिर्फ करवटें ही बदलती रही।
एक जीते - जागते इंसान का कत्ल हुआ था और निश्चित रूप से गुनहगार मैं ही थी , क्योंकि कत्ल मेरी ही वजह से हुआ था , अभय तो बस एक जरिया बना था।
नींद मुझे बड़ी मुश्किल से आ पाई और वो भी टूट - टूटकर !
सुबह उठकर बेमन से मैं कॉलेज के लिए तैयार हुई।
काव्या के कत्ल के लिए मैं बहुत गिल्टी फील कर रही थी।
एक बार तो मन हुआ कि सीधे पुलिस स्टेशन जाकर सब कुछ बता दूँ। लेकिन , आवेश में आकर मैं कोई मूर्खता नहीं करना चाहती थी।
कॉलेज पहुंचते ही मुझे अभय दिखाई दिया।
वह आम दिनों की तरह ही दिखाई दे रहा था।
उसके चेहरे से बिल्कुल भी नहीं लग रहा था कि काव्या के मारे जाने का उसे कोई भी अफसोस है !
उसे देखकर मेरे दिमाग में एक बात आई।
भले ही मेरी वजह से काव्या को अपनी जान गंवानी पड़ी , लेकिन मैंने उसे नहीं मारा , फिर भी उसके लिए मैं गिल्टी फील कर रही हूँ और अभय , वह शख्स , जिसने काव्या पर हमला करके उसे मार डाला , उसे इस बात का कोई भी अफसोस नहीं है !...फिर मैं क्यों खुद को दोषी मान रही हूँ ?
इस विचार ने मुझे थोड़ा रिलेक्स किया।
मैंने अपना पूरा दिन आम दिनों की तरह बिताया।
मैं अभय से भी मिली और उससे आम दिनों की तरह ही बातें भी की।
सब कुछ ठीक रहा।
लेकिन , शाम कॉलेज से छुट्टी होने के करीब आधा घंटा पहले मेरे मोबाइल पर एक मैसेज आया।
एक ऐसा मैसेज , जिसने मुझे अंदर तक से हिलाकर रख दिया !
मैसेज सौरभ का था।
उसमें लिखा था - " तुम्हारी जान खतरे में है। अभय को तुम पर भरोसा नहीं है। खुद को बचाना चाहती हो , तो बिना किसी को बताए मेरे घर पहुँचो। "
वह मैसेज पढ़कर मैं दहशत में आ गई।
सौरभ की बात पर भरोसा न करने का तो सवाल ही नहीं उठता था। सब उसे पागल जरूर बोलते थे , लेकिन हर कोई जानता था कि पूरे कॉलेज में उससे ज्यादा समझदार और डिसेंट लड़का और कोई नहीं है।
कॉलेज से छुट्टी होने पर मैं सीधे सौरभ के घर पहुंची।
और उस दिन से लेकर अब तक मैं वहीं रही थी।
हर किसी को लगा कि मैं लापता हो चुकी हूँ और लोगों को तो यहाँ तक संदेह था कि पता नहीं , मैं जिंदा भी हूँ या नहीं !...लेकिन , आप लोग देख सकते हैं कि मैं न केवल जिन्दा हूँ , बल्कि पूरी तरह से सुरक्षित भी हूँ।

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सलोनी के लापता होने की कहानी सुनकर हर कोई शॉक्ड था !
सब सौरभ की ओर ऐसे देख रहे थे मानो , वह कोई रहस्यमयी शख्स हो !
सौरभ समझ चुका था कि अब बोलने की बारी उसी की है।
सौरभ कुछ बोलने के लिये मुँह खोलने ही वाला था कि अचानक अभय हँसने लगा।
सबका ध्यान अभय की ओर आकर्षित हुआ।
" कहानी अच्छी है ! " - सलोनी की ओर देखते हुए वह बोला।
" क्या ? " - सलोनी चौंकी।
" इस सौरभ के साथ मिलकर अच्छी योजना बनाई है तुमने। मुझे लगा कि तुम मेरी दोस्त हो , लेकिन तुम जैसी लड़की कभी किसी की दोस्त नहीं हो सकती।...तुम्हारी दोस्ती सिर्फ रुपयों से है। " - अभय बोला।
" तो , तुम कहना चाहते हो कि सलोनी झूठ बोल रही है ! " - सौरभ ने कहा।
" मेरा सिर्फ कहना ही नहीं है , बल्कि सच भी यही है। " - अभय चिल्लाया - " झूठी कहानियां सुनाना बन्द करो और ये बताओ कि काव्या कहाँ है ? "
" अभय ! " - साकेत को बीच में बोल पड़ा - " पूरी बात सुने बिना यहाँ किसी भी तरह की बहस करना बेकार है। इसीलिए जब तक सारी बातें क्लियर नहीं हो जाती , बेहतर है कि हम सब शांत रहकर यह जाने कि आखिर हुआ क्या था ! "
अभय बेमन से चुप हो गया।
" सौरभ तुम कुछ बोल रहे थे। " - साकेत ने पूछा।
" हाँ। " - सौरभ बोला - " सलोनी की बातें सुनकर आप सबके मन में कुछ ऐसे सवाल उठ रहे होंगे , जिनके जवाब सिर्फ में ही दे सकता हूँ।….सबसे पहले ये कि मुझे कैसे पता चला कि अभय , सलोनी को मारना चाहता था ? "
" हाँ। " - पलक बोली - " बिल्कुल यही मैं भी सोच रही थी , तुम्हे कैसे पता चला कि सलोनी की जान को खतरा है ? "
" मेरा मैसेज झूठा था। " - सौरभ मुस्कराते हुए बोला - " सलोनी की जान को किसी से कोई खतरा नहीं था। मैंने ऐसा सिर्फ इसलिए किया , क्योंकि मैं चाहता था कि सलोनी बिना किसी दबाव के अपनी इच्छा से खुद किडनैप होने पर राजी हो जाये। "
सौरभ की वह बात सुनकर बाकी सबके साथ - साथ सलोनी भी बुरी तरह से चौंक उठी।
" मैंने पहले ही कहा था , ये सब मुझे जबरन फँसाने की साजिश है। " - अभय दोबारा चिल्लाया।
" ये तुम क्या कह रहे हो ? " - सलोनी ने पूछा - " अगर मुझे किसी से कोई खतरा नहीं था , तो तुमने मुझे इतने दिनों तक अपने घर में छिपा कर क्यों रखा ? "
पलक साकेत की ओर देखते हुए बोली - " मैंने कहा था ना कि सौरभ कब क्या करता है , कोई नहीं समझ सकता। अब इसी से पूछिये , इसने ये सब किस उद्देश्य से किया ? "
सौरभ ने खुद ही बताना शुरू किया - " जिस दिन सलोनी काव्या से अंतिम बार मिली थी , जिस वक्त काव्या के गन पॉइंट पर सलोनी थी और जिस वक्त अभय ने वहाँ पहुँचकर एक बड़े पत्थर से सलोनी को बचाने के लिए काव्या पर हमला किया था , उसके कुछ देर बाद मैं वहाँ अभय का पीछा करते हुए पहुंचा था। लेकिन , काव्या को बचाने के लिए मैं कुछ कर पाता , इससे पहले ही वह मर चुकी थी। ये तो मैं नहीं जानता था कि वहाँ पर इन तीनों के पहुँचने और उस हादसे के घटित होने की वजह क्या थी , लेकिन कुछ देर सलोनी और अभय की बातें सुनने के बाद सब कुछ क्लियर हो गया। मैंने बिना एक पल गँवाये , अपने मोबाईल से काव्या की लाश को उठाकर कार में रखते हुए अभय और सलोनी की कुछ फोटोज क्लिक की।
….इसके बाद मैं वहाँ नहीं रुका। इसकी दो वजह थी। एक , काव्या के कातिल का सबूत फोटोज के रूप में मुझे मिल चुका था और दूसरा , जीवन में पहली बार मैंने एक लाश को अपने सामने देखा था , जिससे मैं थोड़ा घबरा गया था और किसी भी मुसीबत में नहीं पड़ना चाहता था।...अगले दिन मैंने सलोनी को वह मैसेज भेजा। इसके बाद सलोनी बिना किसी की नजरों में आये मेरे घर पहुँची और मैंने उसे अपने घर के बेसमेंट में बने एक कमरे में नजरबंद कर लिया। “


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