उस बारिश के बाद - 15

 उस बारिश के बाद - 15

12 बजे शो खत्म होने पर ईशान और सौम्या टॉकिज से बाहर निकले।

“मूवी बहुत अच्छी थी ना!” - खुशनुमा चेहरे के साथ सौम्या ने ईशान से पूछा।

“हां, बट थोड़ी बोल्ड थी।”

“तो तुम किसी ओल्ड मूवी को एक्सपेक्ट कर रहे थे क्या!” - सौम्या एक आंख मारते हुए बोली।

ईशान झेंप गया।

पार्किंग एरिया तक सौम्या कुछ न कुछ बोलती ही जा रही थी।

उसका सिर हिला हिलाकर बात करना, ईशान को बहुत अच्छा लग रहा था।

पार्किंग एरिया से बाइक निकालकर ईशान ने बाइक स्टार्ट की।

सौम्या पीछे की सीट पर ईशान से पहले की तरह ही सटकर बैठ गई।

बल्कि इस बार तो इतना करीब बैठी कि हवा भी उनके बीच से निकल न सके।

ईशान ने बाइक स्टार्ट की।

इस बार वह बाइक नॉर्मल स्पीड से चला रहा था।

“बड़े आराम से चल रहे हो ?.. घर पहुंचने की जल्दी नहीं है क्या ?” - सौम्या ने यूं ही पूछा।

“मैं ऐसे ही ड्राइव करता हूं।” - ईशान बोला - “वो तो आते टाइम लेट हो रहे थे, इसीलिए तेज चलानी पड़ी थी।”

“बस! और कोई वजह नहीं थी ?”

“और क्या वजह होगी!”

ईशान के जवाब ने सौम्या को थोड़ा मायूस कर दिया।

लेकिन फिर भी वह पहले की तरह ही ईशान से सटकर बैठी रही।

कुछ देर तक दोनों चुप रहे।

ईशान खामोशी से ड्राइव करता रहा।

फिर अचानक ही बोला - “वैसे, बाइक की सीट इतनी छोटी भी नहीं है कि दो लोग आराम से बैठ न सके।”

“क्या मतलब ?” - सौम्या ने धड़कते दिल के साथ पूछा।

“तुम थोड़ा पीछे खिसककर भी बैठ सकती हो।”

ईशान से इस तरह के जवाब की उसे बिल्कुल उम्मीद नहीं थी।

अचानक उसका चेहरा तमतमा उठा।

उसे भयंकर इंसल्ट फील हुई।

वह तेजी से चीखी - “बाइक रोको!”

“क्या!”

“मैंने कहा बाइक रोको!!” - सौम्या और तेजी से चीखी।

ईशान ने बाइक एक साइड में रोकी।
“क्या हुआ ?” - ईशान ने पूछा - “कोई प्रोब्लम ?”

सौम्या बाइक से उतरी।

उसने घूरकर ईशान को देखा - “जाओ अब यहां से!”

“क्या ?” - ईशान हड़बड़ा गया - “तुम ऐसा क्यों बोल रही हो ?.. हुआ क्या ?”

“अच्छा !... अब ये भी मुझे ही बताना पड़ेगा!”

“ओह!” - कुछ सोचते हुए ईशान बोला - “लगता है तुमको मेरी बात बुरी लग गई। अरे, वो तो मैंने…”

“मुझे अब कुछ सुनना नहीं है। तुम जाओ यहां से!” - सौम्या नाराजगी भरे अंदाज में बोली।

सौम्या को अचानक क्यो हो गया था, ये तो वो खुद भी नहीं समझ पा रही थी।

लेकिन ईशान ने अभी - अभी जो बात कही थी, वो उसे बहुत बुरी लगी थी।

अब जाकर उसे समझ आ रहा था कि वह खुद ही ईशान के पीछे पड़ी थी।

ईशान को कॉल करना…मूवी के लिए चलने का ऑफर देना…हॉल में उसका हाथ पकड़ना - सब कुछ तो उसने खुद ही किया था!.. ईशान के लिए उसके दिल में फीलिंग इकतरफा ही थी।…कितनी बेवकूफ थी वो!... ईशान ने तो अभी तक ऐसा कुछ भी नहीं किया था, जिससे पता लगे कि उसके दिल में सौम्या के लिए कोई फीलिंग है!... फिर वह क्यों पागल बन रही है!... वैसे भी ये डॉक्टर लोग बड़े निष्ठुर होते हैं।…इनमें कोई इमोशंस वगैरा नहीं होते!

“सौम्या! अभी रात का समय है।…तुम्हें अकेला छोड़कर कैसे जा सकता हूं।” - सफाई देते हुए ईशान बोला - “मैं तो बस तुमको थोड़ा पीछे खिसकने को बोल रहा था और कोई भी बात नहीं है।”

“अच्छा!... अरे हां.. मेरे शरीर में कांटे लगे है ना, तुमको चुभ रहे होंगे!” - सौम्या गुस्से से बोली।

उसकी इस बात पर ईशान को जोरों से हँसी आ गई - “अरे, ऐसा नहीं है। बस मुझे ड्राइव करने में थोड़ी दिक्कत हो रही थी।”

“तो अब जाओ अकेले ही।…अब पूरी सीट तुम्हारी है। तुमको अब कोई दिक्कत नहीं होगी। पूरी सीट पर आराम से बैठकर जाना।”

“देखो सौम्या!... ये मजाक का वक्त नहीं है।…बाइक पर बैठो और घर चलो। काफी लेट हो गया है।”

“मैं कैब करके आ जाऊंगी। तुम जाओ।”

“ठीक है। अगर तुमने जिद पकड़ ही ली है तो जाता हूं। लेकिन इतना जान लो कि तुमको थोड़ा सा पीछे खिसककर बैठने को मैंने सिर्फ इसलिए कहा था, क्योंकि मैं बाइक चलाने पर कंसंट्रेट नहीं कर पा रहा था।”

“क्या!.. क्या बोला तुमने!” - हैरत से आँखें बड़ी करते हुए सौम्या बोली।

“तुम मुझसे बिल्कुल चिपक कर बैठी हुई थी, इसीलिए मेरा ध्यान बार - बार तुम्हारी तरफ ही जा रहा था और मैं बाइक चलाने पर फोकस नहीं कर पा रहा था।”

“और इसीलिए तुमने कहा कि बाइक की सीट इतनी छोटी भी नहीं है कि दो लोग आराम से बैठ न सके!”

“हां!”

ईशान की लास्ट कोशिश सफल हुई थी।

अपने रूप का जादू चलते देख सौम्या खुश हो गई।

उसे लग रहा था कि उसकी एकतरफा फीलिंग अब इकतरफा नहीं रह गई थी।

“ठीक है तो चलूं मैं।” - कहते हुए ईशान ने बाइक स्टार्ट की।

“मुझे अकेले छोड़कर जाओगे !” - सौम्या मासूमियत से बोली।
“जब तुम आना नहीं चाहती हो तो..”

“मैं आना चाहती हूँ।”

“तो अब तुम नाराज नहीं हो ?”

सौम्या ना में सिर हिलाते हुए बोली - “नहीं।”

“बैठो फिर!”

सौम्या बाइक पर बैठी।

ईशान ने पहले से ही स्टार्ट बाइक में गियर डाला और बाइक आगे बढ़ाई।

सौम्या अब बाइक पर ईशान से कुछ गैप लेकर बैठी थी।

उसका हाथ भी ईशान के कंधे पर नहीं था।

लेकिन फिर भी उसका दिल खुशी से झूम रहा था।

वह मन ही मन बहुत खुश हो रही थी।

उसे लग रहा था कि अब ईशान के दिल में भी उसके लिए फीलिंग जन्म लेने लगी है।

उसकी फीलिंग अब इकतरफा नहीं रही थी।


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