उस बारिश के बाद - 16

 उस बारिश के बाद - 16

कुछ सिग्नल क्रॉस करके और ट्रैफिक के बीच से निकलकर कुछ ही समय बाद ईशान ने बाइक अपने घर के सामने रोकी।

सौम्या की स्कूटी उसने घर से बाहर निकाली।

स्कूटी साइड स्टैंड पर लगाते समय उसने सौम्या पर एक निगाह डाली।

उसका चेहरा उसके नाम के अनुरूप ही सौम्य लग रहा था।

उस पर थकान बिल्कुल भी नहीं दिख रही थी।

लेकिन साथ ही उसने यह भी नोट किया कि उसका मन अभी भी जाने को नहीं हो रहा था।

“ओके! गुड नाइट!” - ऐसा बोलकर ईशान ने एक तरह से अलविदा कह ही दिया था।

अपनी जीन्स की जेब से स्कूटी की चाभी निकालते हुए सौम्या स्कूटी की तरफ बढ़ी।

चाभी इग्निशन में डालने के ठीक बाद अचानक जैसे उसे कुछ याद आया।

वह ईशान की तरफ देखते हुए बोली - “मुझे प्यास लगी है। एक गिलास पानी मिलेगा ?”

ईशान अभी तक अपने घर के गेट के पास ही खड़ा था।

उसने सोचा था वह जल्दी से सौम्या को सी ऑफ करके ही भीतर जाए।

लेकिन जब सौम्या ने एक गिलास पानी मांगा तो उसे थोड़ा अजीब लगा।

सौम्या का घर बस अगली गली में ही था और वहां तक पहुंचने में उसे दो मिनट से भी कम समय लगना था।

फिर ऐसा भी नहीं था कि मूवी के बीच में उन लोगों ने पानी पिया न हो।

पानी और कुरकुरे तो लिए ही थे उन्होंने।

अब जबकि सौम्या ने पानी के लिए बोला तो ईशान को अजीब तो लगा था।

पर, ज्यादा अजीब उसे ये लग रहा था कि घर आए मेहमान को बाहर से ही पानी पिलाकर कैसे भेज दे!

“अंदर आओ ना! अब तो तुम्हारा घर पास में ही है। दो मिनट बैठकर चली जाना।” - ईशान बोला।

“अच्छा! ठीक है।” - कहते हुए सौम्या ने स्कूटी की चाभी इग्निशन से निकालकर फिर से अपनी जेब में डाल दी।

वे ईशान के घर के अंदर गए।

लोहे के गेट के बाद पोर्च था, जहां पर ईशान ने अपनी बाइक पार्क की हुई थी।

पोर्च के आगे का गेट खोलकर वे घर में दाखिल हुए।

अब वे हॉल में थे।

“तुम यहां बैठो। मैं पानी लेकर आता हूँ।” - एक सोफे पर बैठने का इशारा करते हुए ईशान बोला।

सौम्या ईशान के बताए हुए सोफे पर बैठी।

ईशान पानी लेने के किचन की तरफ गया।

उसने फ्रिज में से पानी की बॉटल निकाली और क्रिस्टल की गिलास में पानी भरा।

इसके बाद वह गिलास लेकर बाहर हॉल में आया।

सौम्या सोफे पर बैठे - बैठे ही सो चुकी थी।

“अरे! ये तो सो गई!” - ईशान खुद से ही बोला - “नहीं। सोई नहीं है। इसकी आंख लग गई है। झपकी ले रही है ये।…सौम्या!... सौम्या!”

दो बार आवाज देने पर भी उठना तो दूर सौम्या हिली तक नहीं।

ईशान ने उसके कंधे को छूकर फिर आवाज लगाई - “सौम्या!.. सो गई क्या!”

सौम्या हिली।

उसने आँखें खोली।

“ओह, सॉरी! मैं शायद सो गई थी।” - बोलते हुए सौम्या उठी।
“इट्स ओके! वैसे भी एक बजने को आया है।.. पानी पी लो।” - पानी का गिलास सौम्या की तरफ बढ़ाते हुए ईशान ने कहा।

सौम्या ने अपने हाथों की अंगुलियों से अपनी आँखें मली।

फिर हाथ बढ़ाकर पानी का गिलास पकड़ा।

पानी पीकर वह बोली - “बहुत तेज नींद आ रही है।.. पता नहीं घर पहुंच भी पाऊंगी या नहीं।”

“अरे, क्यों नहीं पहुंच पाओगी। पास ही तो है।” - ईशान बोला। कोई प्रोब्लम हो तो मैं छोड़ आता हूँ।”

“इसकी जरूरत नहीं है। मैं चली जाऊंगी।” - सौम्या मुस्कुराते हुए बोली।

“अच्छा! तुम आराम से जा सको। इसके लिए थोड़ी सी कॉफी बना लाता हूं।”

“इसकी जरूरत नहीं है।”

“अरे, बस थोड़ी ही देर लगेगी।” - कहते हुए ईशान फिर से किचन की तरफ चला गया।

कुछ ही देर बाद वह कॉफी का मग लेकर लौटा तो सौम्या सोफे पर थी ही नहीं।

“ये कहां चली गई ?” - सोचते हुए ईशान ने पूरे हॉल पर सरसरी निगाह डाली।

लेकिन सौम्या उसे कही दिखाई नहीं दी।

“कहीं बिना बताए वो घर तो नहीं चली गई ?” - सोचते हुए उसने कॉफी के मग को मेज पर रखा और घर से बाहर पोर्च में पहुंचा। बाहर सौम्या की स्कूटी अभी खड़ी थी। लेकिन सौम्या बाहर नहीं थी।

“पता नहीं कहां चली गई!” - सोचते हुए ईशान फिर से हॉल में पहुंचा।

वह अभी मेनगेट बन्द कर ही रहा था कि उसे अपने पीछे से सौम्या की आवाज सुनाई दी - “ईशान! मुझे कोई नैपकिन या तौलिया दो ना!.. मैंने माउथ वॉश तो कर लिया है। पर, अपना मुंह किससे साफ करूं ?”

ईशान ने पीछे मुड़कर देखा।

उसके सामने सौम्या खड़ी थी। उसका मुँह भीगा हुआ था। उसके चेहरे पर जगह - जगह पानी की बूंदें दिखाई दे रही थी।
सौम्या ने शायद अपनी नींद भगाने के लिए वॉशरूम जाकर अपना माउथ वॉश किया था और अब वह तौलिया ढूंढती फिर रही थी।

“ईशान! तौलिया दो ना!” - सौम्या चंचलता भरे स्वर में बोली।

“हां। देता हूं।” - कहते हुए ईशान बैडरूम की तरफ गया और एक नया तौलिया लेकर आया।

“ये लो।” - सौम्या के पास जाकर ईशान बोला।

सौम्या ने तौलिया लेने के लिए हाथ आगे बढ़ाया तो उसका हाथ ईशान के हाथ को छू गया।

इसी समय दोनों की नजरें मिली।

सौम्या के दिल में तो ईशान के लिए भर भर के फीलिंग्स थी।

तो, उसकी आंखों में तो ईशान के लिए प्यार दिखाई देना अब आम बात थी।

वह प्यार भरी नजरों से ईशान की आंखों में देख रही थी।

उसका इस तरह लगातार देखे जाने का ईशान पर भी असर होने लगा था।

आधी रात का समय, घर में सिर्फ वे दोनों और ईशान के लिए उसकी फीलिंग्स!... इन सबने ईशान को मदहोश सा कर दिया।

उस पर भी प्यार की खुमारी सी छाने लगी।

ईशान की नजरें भी सौम्या के चेहरे से हट नहीं रही थी।

सौम्या के चेहरे पर बिखरी पड़ी पानी की बूंदों ने ईशान के दिल में हलचल सी मचा दी।

इसी समय बाहर आकाश में बिजलियां चमकने लगी। बादलों की गर्जन के साथ ही तेज मूसलाधार बारिश भी शुरू हो गई।

एक - दूसरे की आंखों में देखते हुए सौम्या और ईशान के चेहरे करीब आने लगे।…धीरे - धीरे वे इतने करीब आ गए कि एक - दूसरे की गर्म सांसों को भी महसूस करने लगे।

सौम्या के चेहरे पर बिखरी पानी की कुछ बूंदें उसके होंठों पर भी बिखरी पड़ी थी। उसकी तरफ बढ़ते ईशान ने अपने कांपते होंठ सौम्या के होंठों पर मोती की तरह बिखरी पड़ी पानी की बूंदों पर रख दिए।

बाहर बारिश के तेज होने के साथ - साथ बादलों की गर्जन और बिजलियों की चमक भी बढ़ती जा रही थी।


Post a Comment

0 Comments