उस बारिश के बाद - 14

उस बारिश के बाद - 14

शाम के 7 बजे से तैयार होना शुरू हुई सौम्या को ठीक तरह से सजने में पूरा एक घंटा लग गया।

आज उसने अपनी पसंदीदा ड्रेस पहनी थी।

रेड कलर की उस ड्रेस में वह काफी आकर्षक लग रही थी।

उसने अपना फेवरेट रेड टी शर्ट और ब्लू कलर की जीन्स पहनी थी।

“तो तैयार हो जाने के लिए ?” - सौम्या को रेडी देखकर संजना बोली।

“सिर्फ जाने के लिए नहीं, मूवी देखने जाने के लिए और वो भी ईशान के साथ!” - खुशी से चहकते हुए सौम्या बोली।

उसने स्कूटी की चाभी उठाई, जिस पर दिल के शेप का रेड कलर का ही छल्ला लगा हुआ था।

फिर वह बाहर निकली और स्कूटी स्टार्ट कर जल्दी ही ईशान के घर जा पहुंची।

उसने ईशान के घर की कॉल बेल बजाई।

जल्द ही दरवाजा खुला।

सामने ईशान दिखा।

बाहर आते ही वह सौम्या के साथ संजना को भी ढूंढने लगा।

लेकिन, संजना वहां थी ही कहां, जो उसे दिखती!

“संजना कहां है ?” - जब संजना उसे दिखाई नहीं दी तो उसने सीधे ही सौम्या से पूछ लिया।

“वो तो घर पर है।” - सौम्या ने जवाब दिया।

“वह नहीं चल रही हमारे साथ ?”

“नहीं।”

सौम्या का जवाब सुनकर ईशान एक पल तो यूं ही खड़ा रहा।

फिर बोला - “तो चलें हम ?”

“हां!”

ईशान ने अपनी बाइक ली और सौम्या की स्कूटी वहीं पार्क कर दी।

ईशान ने बाइक स्टार्ट की।

सौम्या उसके पीछे बैठी।

बाइक चली।

सौम्या ईशान से बिल्कुल सटकर बैठी थी।

हालाँकि ईशान को यह अच्छा नहीं लग रहा था।

लेकिन, सौम्या को यह बात कहां पता थी!

उसे तो ईशान पसंद आ गया था और उसके करीब आने का वह कोई भी मौका छोड़ना नहीं चाहती थी।

जबकि ईशान सोच रहा था कि कितना अच्छा होता अगर उसकी बाइक पर उसके पीछे सौम्या के बजाय संजना बैठी होती!

लेकिन, यह तो सिर्फ उसका विचार था, सच्चाई तो कुछ और ही थी।

सौम्या उसके पीछे बैठी थी और अपना एक हाथ उसने ईशान के कंधे पर रखा हुआ है।

बाइक वह काफी स्पीड से चला रहा था।

रास्ते में कहीं - कहीं ब्रेकर भी थे तो जब - जब रास्ते में ब्रेकर आते थे, ईशान को बाइक के गियर कम करके अचानक स्पीड कम करनी पड़ती।

अचानक स्पीड कम करने से सौम्या सीधी ईशान पर गिरती थी।

ऐसा कई बार हुआ और जब - जब हुआ, सौम्या का दिल खुशी से नाच उठा।

सौम्या की इस हरकत से ईशान के दिल में भी थोड़ी सी हलचल मचनी शुरू हो गई थी।

शायद यही वजह थी कि चाहते हुए भी वह बाइक की स्पीड कम नहीं कर पा रहा था।

दो - तीन ट्रैफिक सिग्नल और शहर की भीड़ भरी सड़कें क्रॉस कर वे आलोक टॉकिज पहुंचे।

ईशान ने अंडरग्राउंड पार्किंग में अपनी बाइक पार्क की और सौम्या के साथ वह टॉकिज में दाखिल हुआ।

टिकट वह पहले ही ऑनलाइन बुक कर चुका था।

लोगों की भीड़ और टॉकिज की चकाचौंध देखते हुए वे अपनी नियत सीट तक जा पहुंचे।

8.55 हो रहे थे।

9 बजे का शो शुरू होने ही वाला था।

हॉल में अंधेरा था, जिससे कि दर्शक मूवी को एकाग्रता से देख सके।

“हम सही टाइम पर पहुंच गए।” - सौम्या सीट पर बैठते हुए खुशी से बोली।

“हां, मुझे तो टेंशन हो रही थी कि कहीं हम लेट न हो जाए।” - ईशान बोला - “तभी तो मैं बाइक तेज स्पीड से चला रहा था।”

ईशान की बात से सौम्या के होंठों पर शरारती मुस्कान खेल गई - “हां, अच्छा हुआ। तुमने बाइक तेजी से चलाई, नहीं तो हम लेट हो सकते थे।”

सौम्या बहुत फास्ट लड़की थी।

वह बहुत जल्दी आप से तुम पर आ गई थी।

ईशान ने भी इस बात को नोटिस किया था।.. पर बोला कुछ नहीं।

जल्दी ही मूवी शुरू हो गई।

मूवी रोमांटिक थी।

शहर में और भी अच्छे - अच्छे टॉकीज थे।

लेकिन सौम्या की दिलचस्पी टॉकीज से ज्यादा मूवी में थी।

तभी तो उसने ऐसा टॉकीज चुना, जिसमें सबसे ज्यादा रोमांटिक मूवी लगी हो!

और यह टॉकीज ऐसा ही था।

जल्दी ही स्क्रीन पर मूवी का नाम लिखा आया - ' इश्क हुआ है धीरे - धीरे '

कॉलेज स्टोरी से शुरू होकर मूवी धीरे - धीरे आगे बढ़ती है और लव स्टोरी का तड़का लेकर कई स्ट्रगल करते हुए एंड में हीरो - हीरोइन की शादी तक पहुंचकर खत्म हो जाती है।

बीच - बीच में कई जगहों पर कुछ रोमेंटिक सीन भी आते जा रहे थे।

सौम्या ने नोट किया कि उनके आगे - पीछे की सीट पर और बगल की सीटों पर भी ज्यादातर यंगस्टर्स ही बैठे थे।

और सिर्फ बैठे नहीं थे, बल्कि एक - दूसरे के हाथों में हाथ लिए हुए या गले बाहें डाले हुए भी बैठे थे।

लेकिन सीट पास होने के बाद भी उसे लग रहा था कि ईशान उससे काफी दूर बैठा है।

उसे यह अच्छा नहीं लगा।

अचानक उसने अपना एक हाथ ईशान की तरफ बढ़ाया और उसका हाथ खींचकर अपने हाथों में ले लिया।

इतना ही नहीं, उसने अपने हाथों की अंगुलियां ईशान के हाथों की अंगुलियों में उलझा ली।

उसकी इस अप्रत्याशित हरकत से ईशान हड़बड़ा गया।

वह अपना हाथ खींच ही लेना चाहता था कि उसी समय स्क्रीन पर कोई रोमेंटिक सीन शुरू हो गया।

फिर ईशान का मन हाथ खींचने को नहीं हुआ।

सौम्या के हाथों की गर्माहट उसे अच्छी लग रही थी।

उसके हाथों के स्पर्श में जादू था।

ऐसा जादू, जिससे बच पाना ईशान को असंभव लग रहा था।

ईशान के विचारों में अभी भी संजना ही घूम रही थी।

लेकिन, अब धीरे - धीरे सौम्या उसके दिल के किसी कोने में जगह बनाने लगी थी।


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