उस बारिश के बाद - 13

 उस बारिश के बाद - 13

“हमारे पास ज्यादा समय नहीं है।” - आकाश चिन्तित स्वर में बोला - “सौरभ को बड़ी मुश्किल से हम इस शहर वापस बुलाने में कामयाब हो पाए हैं। वह वापस कभी भी जा सकता है और अगर एक बार फिर से वो ये शहर छोड़कर चला गया तो मुझे नहीं लगता कि वापस वह कभी आयेगा।…तुम समझ रही हो मै क्या कह रहा हूं !”

“समझ रही हूँ। लेकिन हम कर भी क्या सकते हैं।” - अंकिता हताशा भरे स्वर में बोली।

“ये तुम कह रही हो!”

“हां। ये मै कह रही हूं।”

“यकीन नहीं होता!”

“हां मैंने ही कहा था कि बस एक बार सौरभ किसी तरह शहर में वापस आ जाए, उसकी सारी गलतफहमी मै दूर कर दूंगी।” - अंकिता बोली - “मेरे ही कहने पर तुमने सौरभ को कॉल करके यहां आने पर मजबूर किया था। मुझे लगा था कि बस एक बार वह मेरी बात ध्यान से सुन ले, फिर वह समझ भी लेगा और सच्चाई जान भी लेगा।…लेकिन, वह तो मेरी कोई बात सुनने को तैयार ही नहीं है और अब तो लगता है कि सुन भी ले तो क्या हो जाने वाला है, क्योंकि उसे तो मुझ पर यकीन ही नहीं है।…उसका मुझ पर से भरोसा उठ चुका है आकाश! क्योंकि मैंने उसके साथ विश्वासघात किया है।”

“यह सच नहीं है !” - आकाश चीखते हुए बोला - “तुमने कोई विश्वासघात नहीं किया है। बस एक साजिश का शिकार हुई हो। मेरी तरह.. सौरभ की तरह!”

“क्या फर्क पड़ता है! अब जबकि सौरभ मुझ पर विश्वास करने को तैयार नहीं है तो क्या हुआ था, इससे क्या फर्क पड़ता है!... मुझे लगता है कि अब कुछ नहीं हो सकता।”

“सोच लो अंकिता! अगर सौरभ चला गया तो उसे वापस लाना असंभव हो जाएगा।”

“तुमको अभी भी उम्मीद है कि कुछ हो सकता है ?”

“नहीं! लेकिन हम कोशिश करना कैसे बन्द कर सकते हैं। हम सबकी जिन्दगी सौरभ की वजह से उलझकर रह गई है और सब कुछ ठीक तभी हो सकता है जब सौरभ की गलतफहमी दूर हो जाए और वह पहले की तरह तुमसे प्यार करने लगे और मेरी दोस्ती पर भरोसा कर सके।”

“पर ये होगा कैसे ?”

“सोचो अंकिता!... सोचो!”

***

जैसा कि डॉक्टर ईशान ने कहा था, संजना की तबियत अगले दिन सच में सुधर गई।

“कमाल का डॉक्टर है ये ईशान!” - संजना उत्साहित स्वर में बोली - “नहीं तो एक दिन में कौनसा बुखार ठीक होता है!”

“हां। ये तो तू सही बोल रही है संजू!” - संजना की बात से सहमत होते हुए सौम्या बोली - “इस बात के लिए हमें डॉक्टर ईशान को कम से कम थैंक्स तो बोलना ही चाहिए।”

“थैंक्स! वो कैसे ?”

“कॉल करके और कैसे!”

“डॉक्टर को कॉल करके थैंक्स कौन बोलता है! और वैसे भी हमने फीस भी तो भरी थी। फ्री में तो इलाज कराया नहीं।”

“अरे, तू भी क्या बात करने लगी!” - सौम्या चेयर से उठकर संजना के बेड के पास आते हुए बोली - “हम हर किसी डॉक्टर को थैंक्स थोड़ी ना बोल रहे हैं!”

“अच्छा!”

“हम तो उस डॉक्टर को थैंक्स बोल रहे हैं, जो हमारे पड़ोस में ही रहता है। जो बहुत हैंडसम हैं।”

संजना ने अजीब नजरों से सौम्या की तरफ देखा।

“अच्छा! बहुत हैंडसम है वो!” - संजना बोली।

“और नहीं तो क्या! देखा नहीं था क्या तूने उसे ?”

“देखूंगी क्यों नहीं! देखा था…जरूर देखा था।” - संजना शरारत भरे अंदाज में बोली - “लेकिन, तेरे जैसी नजरें तो मेरे पास है नहीं ना!”

“क्या मतलब ?”

“मतलब ये कि उस डॉक्टर ने इलाज जरूर मेरा किया, लेकिन बीमार तुझे कर दिया!” - संजना हँसते हुए बोली।

सौम्या ने हैरत से आँखें बड़ी करते हुए कहा - “अब बेकार की बातें रहने दे और मुझे कॉल करने दे।”

सौम्या ने बेड के पास वाली मेज पर रखा अपना मोबाइल उठाया और डॉक्टर ईशान का नंबर मिलाने लगी।

दो ही रिंग के बाद कॉल पिक हुई।

“हैलो!” - कॉल पिक करने वाले की अट्रैक्टिव आवाज को सौम्या ने तुरंत पहचाना।

यह ईशान की ही आवाज थी।

“हैलो डॉक्टर साहब ! थैंक यू सो मच! आपके इलाज ने तो एक ही दिन में अपना असर दिखा दिया।”

“कौन बोल रहा है ?”

“अरे, हम कल ही तो मिले थे। आप इतना जल्दी भूल गए।.. मैं सौम्या! कल अपनी बहन संजू के साथ आपके घर आई थी।”

“ओह! हां। संजना कैसी है अब ?”

“अब बिल्कुल ठीक है वो!”

“गुड!... वैसे मेरा कॉन्टैक्ट नंबर कैसे मिला आपको ?”

“आपकी मेज पर ही विजिटिंग कार्ड रखा था, तो मैने एक ले लिया था।”

“ओह, मै तो देना भूल ही गया।”

“पता है, तभी तो मैंने खुद ही ले लिया था।”

“संजना अब बिल्कुल ठीक है ना!”

“हां हां। बिल्कुल ठीक है।”

सौम्या बहुत इंट्रेस्ट लेकर ईशान से बात कर रही थी।

लेकिन ईशान को तो संजना में इंट्रेस्ट था।

पर, सौम्या ये बात समझ नहीं पा रही थी।

वह तो बस बातें करते रहने की स्कीम लगा रही थी।

“खाना हो गया आपका ?” - अचानक सौम्या ने पूछा।

उसके इस सवाल को सुनकर संजना को हँसी आ गई।

वह जोर से हँस पड़ी तो सौम्या ने नकली गुस्से से उसकी तरफ देखा।

तब संजना ने सॉरी का इशारा किया।

डॉक्टर ईशान भी थोड़ा हड़बड़ा गया। फिर संभलते हुए बोला - “नहीं। अब होगा।”

फिर कैजुअली उसने भी पूछ लिया - “आपका हो गया ?”

“नहीं। मैं भी अब करूंगी।”

“और संजना का ?”

“उसका भी नहीं हुआ।”

“ओह!”

“आज शाम को आप क्या कर रहे हैं ?”

सौम्या के इस सवाल ने तो ईशान को सच में यकीन दिला दिया कि सौम्या के दिल में क्या चल रहा है!... और सौम्या भी तो यही चाहती थी।

“कुछ खास नहीं।” - ईशान ने उत्तर दिया।

“तो मूवी देखने चले क्या ?” - सौम्या उत्साहित स्वर में बोली - “आलोक में कोई नई मूवी लगी है।”

“मूवी ?”

“हां।…आपको पसंद नहीं ?”

“नहीं ऐसा तो कुछ नहीं है।”

“ठीक है फिर आज शाम 8 बजे आती हूँ।…ओके बाय!” - कॉल कट करके सौम्या जोर से चिल्लाई - “यस!... काम बन गया।”

संजना ने सौम्या की तरफ देखते हुए कहा - “क्या काम बन गया!... तू ये कर क्या रही है!”

“ईशान के साथ मूवी जा रही हूं और क्या!” - सौम्या लगभग नाचते हुए बोली।

“तुझे इतना पसंद आ गया वो डॉक्टर ?”

“अब आ तो गया है!” - सौम्या बेड पर बैठकर एक वर्गाकार पिलो को अपनी बाँहो में भरते हुए अलसाये स्वर में बोली।


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