उस बारिश के बाद - 12

 उस बारिश के बाद - 12

संजना और सौम्या डॉक्टर ईशान के घर के भीतर गई।

हॉल के आगे एक रूम था, जिसे ईशान ने मरीजों के चैकअप के लिए रिजर्व रखा हुआ था।

कहने की जरूरत नहीं कि ईशान उनको उसी कमरे में ले गया।

वहां पर खुद मास्टर चेयर के हवाले होकर दोनों बहनों को उसने विजीटर्स चेयर पर बैठने का संकेत किया।

वे बैठी।

ईशान ने बातचीत शुरू करने के लिए कहा - “तो आप मेरे घर के पीछे वाली गली में ही रहते हो।”

“हां, अभी बताया तो मैंने!” - सौम्या कुछ ज्यादा ही उत्साहित स्वर में बोल रही थी - “संजू की तो हालत इतनी खराब है कि यह हॉस्पिटल चलने तक की कंडीशन में नहीं थी। तब मुझे आपका खयाल आया और मैं इसे यहां ले लेकर आई।”

“मतलब, संजना की हालत हॉस्पिटल जाने लायक होती तो आप यहां नहीं आते ?”

“नहीं! मेरा वो मतलब नहीं था!” - सौम्या हड़बड़ाहट में बोली।

“मैने अपना MBBS जस्ट अभी ही क्लियर करके प्रैक्टिस शुरू की है। लेकिन, यकीन मानिए मैं एक काबिल डॉक्टर हूँ।”

“वो तो तब मानेंगे, जब आप मेरी बहन को जल्दी से ठीक कर देंगे।” - सौम्या मुस्कुराते हुए बोली।

“वो तो हो ही जायेगी। पहले मैं चैकअप तो कर लूं।” - कहते हुए डॉक्टर ईशान ने संजना से कहा - “अपना हाथ दिखाइए।”
संजना ने अपना दाहिना हाथ मेज के ऊपर डॉक्टर ईशान के सामने बढ़ाया।

चेहरे की ही तरह संजना का हाथ भी काफी फेयर था।

ईशान ने अपना हाथ आगे बढ़ाकर संजना की कलाई को अपनी हथेली में थामा।

ईशान नया - नया डॉक्टर बना था और संजना वह पहली लड़की थी जो पेशेंट बनकर उसके पास इलाज के लिए आई थी।

शायद इसीलिए अभी वह बाकी उम्रदराज डॉक्टर्स की तरह
निर्विकार नहीं हो पाया था।

बहरहाल, संजना की कलाई को थामते ही उसे हल्की सी सिहरन हुई और संजना की कलाई के स्पर्श ने उसे अंदर तक से रोमांचित कर दिया था।

ये और बात थी कि अगले ही पल उसे अपना हाथ हटा लेना पड़ा, क्योंकि वह संजना की बीमारी से वाकिफ हो चुका था।

लेकिन उस एक पल के अहसास से ही उसे ऐसा लगा कि जैसे उसने स्वर्ग की किसी अप्सरा का हाथ थामा हो।

“इसे तो बुखार है!” - ईशान बोला - “ऐसा लगता है जैसे यह काफी देर तक पानी के संपर्क में रही हो।”

“हां, रही तो थी ना !” - सौम्या बोली - “अभी थोड़ी देर पहले जो इतनी जोरदार बारिश हो रही थी, उसमें ये खूब नहाई थी। इसीलिए तो इसे ठंड लग गई।”

“ओह! इट्स ओके। मैं अच्छी सी टैबलेट लिख देता हूं। आप इसे दे देना। ये कल तक बिलकुल ठीक हो जाएगी।” - कहते हुए ईशान ने एक पेपर पर टेबलेट लिखकर पेपर सौम्या की तरफ बढ़ा दिया।

सौम्या ने फीस देने के लिए 500 का नोट ईशान की तरफ बढ़ाया।

फीस देकर सौम्या, संजना के साथ जाने के लिए चेयर से उठी तो ईशान बोला - “तुम्हारी बहन संजना हमेशा ऐसे ही रहती है ?”

“ऐसे ही मतलब ?” - चकित स्वर में सौम्या ने पूछा।

“जब से तुम लोग आए हो, बस तुम ही बोले जा रही हो। इसने एक वर्ड भी नहीं बोला ?”

“वैसे, आप कभी तेज बारिश में खूब देर तक नहाए हैं ?” - जवाब देने के बजाय सौम्या ने डॉक्टर ईशान से ही प्रश्न पूछा।

“नहीं।” - ईशान ने जवाब दिया।

“तो कभी नहाकर देखिए और जब ठंड लगकर बुखार आ जाए तो फिर बोलकर दिखाएगा।” - सौम्या शरारती अंदाज में बोली।
ईशान बस मुस्कुरा दिया।

“थैंक्यू डॉक्टर ईशान!” - एकाएक ही संजना मुस्कुराते हुए बोली।

ईशान ने पहली बार वह आवाज सुनी थी।

उसे लगा जैसे इतनी मधुर आवाज उसने अपने पूरे जीवन में पहले कभी नहीं सुनी थी।

***

रात के 9 बजे थे।

ईशान अपने बेडरूम में डायरी लिखने वाली मेज पर बैठा हुआ था।

अमेरिका से MBBS करके 6 महीने तक उसने दिल्ली के एक प्रतिष्ठित हॉस्पिटल में अपनी प्रैक्टिस शुरू की थी।

अब वह इस शर्त पर अपने होमटाउन लौटा था कि उसे रहने के लिए एक अलग घर मिले।

उसके पिताजी ने उसकी यह शर्त मान ली और अब उसी शहर में उसका खुद का भी एक घर था। उसके माता - पिता और उसकी बहन श्वेता उसी शहर में उनके पुराने घर में ही रहते थे।

इस समय वह अपनी डायरी लिख रहा था।

डायरी में उसने संजना के बारे में लिखा।

पता नहीं कैसे, पहली नज़र में ही संजना ने उसे अपना दीवाना बना लिया था।

उसकी खूबसूरती, उसकी आवाज, उसकी हर एक स्टाइल, उसकी सादगी - इन सबने ईशान को बहुत अधिक प्रभावित किया था।

ऐसा नहीं था कि इससे पहले वह कभी किसी लड़की से मिला नहीं था या किसी लड़की ने उसके हृदय को छुआ न था!

लड़कियां उसकी लाइफ में बहुत आई थी।

स्कूल - कॉलेज में कई लड़कियों से वह मिला था।

लेकिन, संजना ने उसको जिस अनुभूति तक पहुंचाया था, वैसी फीलिंग उसने पहले कभी महसूस नहीं की थी।

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