उस बारिश के बाद - 11
शलभ दीवान, सौरभ के पिता सनशाइन स्टील कंपनी के डायरेक्टर थे। वे चाहते थे कि उनका बेटा सौरभ उनका बिजनेस संभाले।
लेकिन, सौरभ की शुरू से ही उनके बिजनेस में कोई रुचि नहीं थी।
और पिछले तीन सालों से तो लगता था कि उसकी जीने में ही कोई रुचि नहीं थी।
शलभ दीवान समझ नहीं पा रहे थे कि अपने इकलौते बेटे को कैसे फैमिली बिजनेस की तरफ आकर्षित करें।
देखा जाए तो इसमें गलती उन्हीं की थी।
उन्होंने कभी भी सौरभ को नजदीक से जानने की कोशिश नहीं की।
की होती तो उन्हें पता होता कि तीन साल पहले खुद के दम पर कुछ कर दिखाने के लिए इस शहर को छोड़कर नए शहर में जाने की सौरभ की जिद के पीछे असली वजह क्या थी!
उनको तो ये भी नहीं पता था कि सौरभ कभी किसी लड़की के प्यार में भी पड़ा था!
सौरभ की मां को जरूर उसके बारे में सब कुछ पता था। लेकिन उन्होंने कभी सौरभ के पिता को इस बारे मे कुछ नहीं बताया था और आगे भी बताने का कोई इरादा नहीं रखती थी।
अब जबकि पूरे तीन साल बाद सौरभ लौटकर शहर वापस आ चुका था, तब सौरभ की मां को लगा कि शायद अब वह अपना अतीत भूल चुका होगा और एक नई शुरुआत करने के लिए वह वापस आया है।
लेकिन उसने तो पहले ही दिन अपनी मां के विचारों को गलत साबित कर दिया था।
***
कॉफी पीने के बाद भी संजना को रह - रहकर ठंड लग रही थी।
सौम्या को अपनी बहन की चिन्ता होने लगी।
आखिर इस दुनिया वे दोनों ही तो एक - दूसरे का सहारा थी।
“संजू! तुम्हारा ठंड लगना तो बंद ही नहीं हो रहा। मुझे लगता है कि हमें किसी डॉक्टर को दिखाना चाहिए।” - सौम्या संजना को ठंड से काँपते देख बोली।
“हां। मुझे भी ऐसा ही लग रहा है। लेकिन, मुझे तो इतनी ज्यादा ठंड लग रही है कि मेरा यहां से हिलने तक का मन नहीं हो रहा। फिर अभी हम हॉस्पिटल कैसे जाएंगे ?”
“डोंट वरी, संजू! हमें हॉस्पिटल जाने की जरूरत नहीं पड़ेगी।”
“क्यों ?”
“अरे, वो शर्माजी का लड़का है ना, ईशान शर्मा !”
“वो डॉक्टर!”
कुछ ही देर बाद दोनों बहनें डॉक्टर ईशान से मिलने जाने के लिए तैयार हो चुकी थी।
संजना ने ग्रीन कलर का सूट पहना था और सौम्या पिंक टी शर्ट और व्हाइट जींस पहने थी।
स्कूटी पर सवार होकर वे डॉक्टर ईशान के घर की तरफ चल पड़ी।
सौम्या स्कूटी चला रही थी और संजना पीछे बैठी थी।
बारिश रुक चुकी थी। लेकिन, सड़के अभी भी गीली थी।
इसीलिए सौम्या सावधानी से स्कूटी चला रही थी।
डॉक्टर के घर पहुंचकर सौम्या ने स्कूटी उसके घर के बाहर खड़ी की।
फिर बेल बजाई।
जल्द ही दरवाजा खुला।
सामने ईशान ही था।
26 वर्षीय ईशान देखने में बिल्कुल चॉकलेटी बॉय लग रहा था।
उसका क्लीन शेव्ड चेहरा किसी भी लड़की को अपनी तरफ आकर्षित कर सकता था।
“ हाई!” - ईशान को देखते ही सौम्या ने हाथ हिलाते हुए कहा - “हम आपके घर के पीछे वाली गली में ही रहते हैं।”
“तो ?”
“मेरी बहन संजना की तबियत बहुत खराब है। क्या आप उसे देख लेंगे ?” - सौम्या बोली।
“तो मुझे तुम्हारे घर चलना पड़ेगा ?” - कुछ सोचते हुए ईशान बोला।
“नहीं, नहीं। वो तो यहीं आई है ना।”
सौम्या, संजना और ईशान के बिल्कुल बीच में खड़ी थी।
इस वजह से डॉक्टर ईशान को सिर्फ सौम्या ही दिखाई दी।
संजना को ईशान की नजरें देख नहीं पाई थी।
सौम्या को जब अपनी गलती समझ आई, तो वह ईशान के सामने से हटकर एक तरफ हो गई।
उसके हटते ही डॉक्टर ईशान ने संजना को देखा और देखते ही रह गया।
ईशान ने पहले कभी संजना को देखा नहीं था। वह आज पहली बार संजना को देख रहा था।
ग्रीन कलर के सलवार सूट और व्हाइट चुन्नी के साथ ही संजना के खुले बाल काफी आकर्षक लग रहे थे।
वह ठंड से कांप रही थी और अपने दोनों हाथ कसकर एक दूसरे से पकड़े हुए थे।
शायद ऐसा करने से उसे ठंड कम लग रही थी।
संजना का चेहरा काफी फेयर था और उसके आई कॉन्टैक्ट ने डॉक्टर ईशान को काफी प्रभावित किया था।
ईशान को एक ही नजर में वह भा गई।
“देखिए इसको अभी भी कितनी ठंड लग रही है। आप देखिए ना!” - सौम्या डॉक्टर ईशान से बोली।
“हां, आप लोग अंदर आइए।”

1 Comments
आपकी लिखी रचना ब्लॉग "पांच लिंकों का आनन्द" पर शुक्रवार 27 मार्च 2026 को लिंक की गयी है....
ReplyDeletehttp://halchalwith5links.blogspot.in पर आप सादर आमंत्रित हैं, ज़रूर आइएगा... धन्यवाद!
!