मर्डर ऑन वेलेंटाइन नाइट - 42
" काव्या ! मेरी बात सुनो। " - मैं खौफ में चिल्लाई - " तुमने ये तो बता दिया कि मेरी वजह से तुमको कितनी प्रॉब्लम हुई है। लेकिन , ये जानने की तुमने जरा भी कोशिश नहीं की कि मैं तुमसे इतने रुपये क्यों ले रही हूँ ?...तुमने ये जरा भी नहीं सोचा कि मेरी भी कोई मजबूरी हो सकती है ! "
" क्या बकवास है ये। मजबूरी ? और वो भी तुम्हारी ? "
" हाँ , काव्या ! मेरी मजबूरी ! तुमने कभी ये जानने की कोशिश नहीं की कि मैं तुमसे रुपये उधार क्यों लेती थी और अब तुमको ब्लैकमेल करके , तुमसे इतने सारे रुपये लेकर मैं कर क्या रही हूँ ?...तुमने कभी ये जानने की कोशिश नहीं की कि मुझे इतने रुपयों की जरूरत क्यो पड़ती है ! "
" मुझे बहुत आश्चर्य हो रहा है यह जानकर कि तुम जैसी लड़की की भी कोई मजबूरी हो सकती है !...फिर भी तुम कहती हो , तो मान लेती हूँ। " - काव्या उपेक्षा भरे लहजे में बोली - " बताओ , क्या मजबूरी थी तुम्हारी ? "
" बताती हूँ। " - कहते हुए मैंने अपनी जीन्स के पॉकेट की ओर हाथ बढ़ाया।
" हे रुको ! " - संदेह भरी नजरों से देखते हुए काव्या चिल्लाई - " क्या कर रही हो तुम ? "
" टेंशन मत लो , मैं तुम्हारी तरह रिवॉल्वर लिये नहीं घूमती। कुछ दिखाना है तुमको। "
मैंने अपनी पॉकेट से कुछ निकाला और काव्या की ओर बढाते हुए बोली - " ये देखो। "
" क्या है ये ? "
" मेरी मजबूरी ! "
" क्या ? " - बुरी तरह चौंकते हुए काव्या बोली।
मेरे हाथ में एक पैकेट था , जो व्हाइट कलर की पॉलीथिन से बना हुआ था।
उस पॉलीथिन के भीतर जो चीज थी , वह साफ दिखाई दे रही थी।
" यह तो नमक का पैकेट है ! " - काव्या बोली।
मुझे उसके भोलेपन और उसकी मासूमियत पर हँसी आ रही थी।
" मूर्ख लड़की ! यह नमक नहीं , ड्रग्स है। " - बोलते हुए मैंने उस पैकेट को खोला और थोड़ा सा ड्रग्स अपनी हथेली पर लेकर मुँह में डाल दिया।
" तुम ये क्या बकवास कर रही हो ? " - काव्या के स्वर में घबराहट थी।
" बकवास ? " - मैं बोली - " बकवास तो मेरी जिंदगी हो चुकी है। ये सिर्फ ड्रग्स नहीं है , ये मेरे गले मे फंसी हुई वो हड्डी है , जो न उगलते बनती है , न निगलते।...तुम क्या बोल रही थी ?...हाँ , तुम्हारी जिंदगी नरक बन गई है , तुम्हें अपनी सोने की चैन बेचनी पड़ी , पापा से झूठ बोलना पड़ा , तुम्हारी रातों की नींद गायब हो गई है ! ….तुम्हारी जितनी भी प्रॉब्लम्स है , जरा सोचकर बताओ , वे ज्यादा बड़ी है या मेरी ये ड्रग्स - एडिक्ट वाली प्रॉब्लम ज्यादा बड़ी है। "
" मुझे तो अभी तक यकीन नहीं हो रहा कि तुम सच में ड्रग्स लेती हो , लेकिन अगर ये सच है तो मुझे समझ नहीं आ रहा कि तुम्हें ये आदत पड़ी कैसे ? "
" यह सब लेट नाईट पब में होने वाली पार्टीज की बदौलत हुआ है। ऐसी जगहों पर फ्री में ड्रग्स सप्लाई होती है और जब आप उसके एडिक्ट हो जाते हैं , तो वही फ्री में मिलने वाली ड्रग्स इतने महंगे दामों में मिलती है कि उसे हासिल करने के लिए वो सब करना पड़ता है , जो मैंने तुम्हारे साथ किया।...यही ड्रग्स मेरी मजबूरी है। " - कहते हुए मैंने ड्रग्स का वह पैकेट दोबारा अपनी जेब मे रख दिया।
" बस अब बहुत हो गया।….मैं तुम पर भरोसा नहीं कर सकती। आकाश को अपना बनाने और तुमसे पीछा छुड़ाने का मेरे पास अब यही एक रास्ता बचा है।...मरने के लिए तैयार हो जाओ सलोनी ! "
" नहीं काव्या ! ऐसा मत करो। "
" मुझे माफ़ कर दो सलोनी !...मैं तो आकाश की दोस्त बनकर ही खुश थी। लेकिन , तुमने फिर से मुझे ये भरोसा दिलाया कि आकाश मेरा हो सकता है और रिचा को आकाश से दूर करके तुमने इस संभावना को और भी ज्यादा बढ़ा दिया। अब तुमको जिन्दा छोड़कर आकाश को खोने का रिस्क मैं नहीं ले सकती। " - बोलते हुए काव्या की अंगुली ट्रिगर की ओर बढ़ी।
डर से मैंने अपनी आंखें बंद कर ली।

0 Comments