मर्डर ऑन वेलेंटाइन नाइट - 38
" क्या ? " - वह गुस्से में बोला - " ये रिचा खुद को ज्यादा ही इंटेलिजेंट समझती है। उसे सबक सिखाना पड़ेगा। "
" नहीं , जतिन ! अभी कुछ मत करना। रिचा को सबक सिखाने से ज्यादा जरूरी इस वक़्त सीमा का भरोसा जीतना है। "
" मैंने बहुत कोशिश की , सीमा को समझाने की। लेकिन , वो नहीं मानी । " - अभय बता रहा था - " कुछ दिनों के बाद उसने कॉलेज आना भी बंद कर दिया। शायद , उसने कॉलेज में मेरे बारे में पता किया होगा और मेरे स्वभाव को जानकर वह डर गयी होगी। किसी तरह कॉलेज में उसने एक साल पूरा किया , फिर वह किसी दूसरे कॉलेज में चली गयी।... मैंने उसका पीछा करने की जरूरत इसलिये नही समझी , क्योकि वह मुझसे डरने लगी थी और जिस शख्स से आप डरते हो , उससे प्यार कैसे कर सकते हैं ! "
" और यह सब हुआ सिर्फ रिचा की वजह से ? "
" और नहीं तो क्या ! उस दिन अगर वो बीच में नहीं आती तो यह सब कभी नहीं होता। " - अभय बोला - " आप चाहे यकीन ना करे , लेकिन सीमा की वजह से मुझमे कुछ सुधार आया था। लेकिन , रिचा ने सब गड़बड़ कर दी और ऐसा पहली बार नहीं हुआ था। रिचा की खुद की लाइफ अच्छी चल रही थी , इसीलिए वह हर किसी की पर्सनल लाइफ में दखल देती रहती थी। "
" तो , रिचा से तुम्हारी दुश्मनी की वजह यही थी ? "
" निश्चित तौर पर। "
" तुमने बदला कैसे लिया ? "
" क्या ?...कैसा बदला ? "
" रिचा ने जो तुम्हारे साथ किया , उसका बदला लेना था ना तुमको ? " - साकेत ने सीधे अभय की आँखों में देखते हुए पूछा - " कैसे लिया ? "
अभय हँसा - " जब किस्मत अच्छी हो तो मनचाही इच्छाएं स्वतः ही पूरी हो जाती है। "
" क्या मतलब ? "
" सीमा को बुरा ना लगे , इसीलिए जब तक वो कॉलेज में रही , मैंने रिचा से बदला लेने के बारे में सोचा तक नहीं। " - अभय ने बताया - " लेकिन , जब मुझे पता चला कि सीमा ने अपना कॉलेज बदल लिया है , तो मेरे सामने सिर्फ एक ही काम बचा था - ' रिचा से बदला लेना। '
हम लोग फाइनल ईयर में आ गए थे। रिचा की वजह से मुझे मेरा प्यार नहीं मिल पाया था , इसीलिए मैंने भी तय कर लिया था कि मै कुछ ऐसा करूँगा , जिससे आकाश , रिचा से अपना रिश्ता हमेशा - हमेशा के लिए तोड़ दे। लेकिन , मेरे दिमाग में कोई योजना आ नही रही थी। इसी दौरान भाग्य ने मेरा साथ दिया और वह घटना घटित हो गई।….किसी ने सच ही कहा है कि अगर अपने लक्ष्य के बारे में बार - बार सोचा जाये , तो वह किसी न किसी रूप में पूरा हो ही जाता है। "
" हुआ क्या था ? "
अभय मुस्कराते हुए बोला - " आकाश ने पलक की रिंग चुरा ली थी और इसी वजह से रिचा ने उससे ब्रेकअप कर लिया था।...मैं चाहता था कि आकाश रिचा को छोड़ दे और रिचा आकाश के बिना उसी तरह दुखी रहे , जैसे मुझे सीमा के बिना रहना पड़ा था। लेकिन , यहाँ तो उल्टा ही हो गया। रिचा ने खुद ही आकाश को छोड़ा और दुःखी भी खुद ही हुई।...लेकिन , चाहे जैसे भी हुआ हो , मेरा मकसद तो पूरा हो गया। फिर भी मैं उसे और परेशान करना चाहता था और इसीलिए मैंने उसे थोड़ा परेशान किया और मजबूर किया कि वो प्रिंसीपल से मेरी शिकायत करके कुछ दिन के लिए मुझे कॉलेज से रेस्टीकेट करवा दे और हुआ भी ऐसा ही।...मुझे पांच दिन के लिए कॉलेज से रेस्टीकेट कर दिया गया। मैं चाहता था कि रिचा कोई गलती करे , मुझसे सीधे दुश्मनी करे और फिर मैं उससे अपना बदला लूँ। पाँच दिनों के बाद जब मैं कॉलेज लौटा , तो मैंने योजना बना ली थी कि मुझे रिचा को किस तरह से टॉर्चर करना है !...लेकिन , जब मैंने रिचा की हालत देखी तो मैने अपना इरादा बदल दिया। "
" क्या हुआ था रिचा की हालत को ? "
" आकाश से ब्रेकअप करना रिचा के लिए आसान था , वो उसने कर भी लिया। लेकिन , वह खुद अंदर से टूट चुकी थी। उसका मायूस चेहरा देखकर किसी का भी मन दुखी हो सकता था।...मेरा बदला तो वैसे ही पूरा हो चुका था। मुझे अब कुछ करने की जरूरत नहीं थी। "
" और इसीलिये , तुमने कुछ नहीं किया और रिचा को छोड़ दिया ? "
" हाँ। "
" कहानी अच्छी है अभय ! " - साकेत बोला - " रिचा से तुम्हारी दुश्मनी थी , उसको तुमने अपना टारगेट बनाया था। फिर भी न तुमने पलक की रिंग नहीं चुरायी , न तुमने रिचा का कत्ल नहीं किया और तुम्हारा टारगेट भी पूरा हो गया ! "
" य…ये आप क्या कह रहे हैं ? " - अभय थोड़ा घबराते हुए बोला - " रिंग आकाश ने छुरायी थी और रिचा का कत्ल मैं क्यों करूँगा ? "
" तो तुमने रिचा को कभी कोई नुकसान नहीं पहुंचाया ? "
" बिल्कुल भी नहीं। "
" ठीक है। तुम कहते हो , तो मान लेता हूँ। " - साकेत खड़े होते हुए बोला - " लेकिन , अगर रिचा के क़त्ल में तुम्हारा हाथ हुआ , तो तुम बचोगे नहीं। "
अभय बहुत ज्यादा घबराया हुआ था।
साकेत बाहर निकल आया।
वह कार में बैठा और उसने कार स्टार्ट की।
सुबह के 10 बज चुके थे।
साकेत कार ड्राइव कर रहा था।
लेकिन , उसका मस्तिष्क बिल्कुल भी शांत नहीं था।
उसके दिमाग में अनगिनत विचार उठ रहे थे।
कई लोग थे , जिन पर उसे शक था।
लेकिन , उन सब में से कातिल कौन हो सकता है , यह साकेत को समझ नहीं आ रहा था।
और सवाल महज ये नहीं था कि कातिल कौन है ! कुछ और भी सवाल थे , जिनके जवाब अभी तक अनुत्तरित थे और वे सारे सवाल साकेत के मस्तिष्क में उथल - पुथल मचा रहे थे।
" कौन हो सकता है कातिल ?....पलक की रिंग सच में आकाश ने ही चुरायी थी या वो किसी की साजिश का हिस्सा बना था ? अगर ये आकाश के खिलाफ किसी की साजिश थी , तो उस साजिश का सूत्रधार कौन था ?....काव्या और सलोनी कैसे और कहाँ लापता हो गयी ? वे दोनों जिंदा भी है या नहीं ? " - साकेत का दिमाग काम नहीं कर रहा था।
साकेत ने कार सड़क के किनारे रोकी।
उसने अपने मोबाइल से एक नंबर डायल किया।
महज 5 मिनट बात करके उसने कार दोबारा स्टार्ट की।
उसे अब बस एक और शख्स से मिलना था और इसके बाद उसे तय करना ही था कि आखिर कातिल है कौन ?
□ □ □

0 Comments