मर्डर ऑन वेलेंटाइन नाइट - 37

 मर्डर ऑन वेलेंटाइन नाइट - 37

" जब आप मेरे बारे में इतना कुछ जानते ही हो , तो कुछ और जान लोगे तो क्या फर्क पड़ जायेगा। " - अभय बोला - " हाँ , यह सच है कि रिचा को मैंने टारगेट बनाया था।….उसके लिए मेरे मन में नफरत भरी पड़ी थी। "
" वजह ? "
" आप मेरे बारे में काफी कुछ जान चुके हैं , ऐसा मुझे लगता है। " - अभय थोड़ा इमोशनल होते हुए बोला - " लोग मेरे बारे में क्या सोचते हैं , इसकी मुझे परवाह नहीं है। लेकिन , सच तो यह है कि कोई इंसान चाहे कितना ही अच्छा या बुरा हो , हर एक की पर्सनल लाइफ जरूर होती है और किसी भी इंसान को किसी दूसरे की पर्सनल लाइफ में दखल नहीं देना चाहिये।….रिचा ने मेरी पर्सनल लाइफ में दखलंदाजी की और यही वजह थी कि मैं उससे नफरत करता था। "
" थोड़ा डिटेल में बताओगे ? "
अभय ने बताना शुरू किया - " एक साल पहले , जब मैं सेकेंड ईयर में था , मुझे सीमा नाम की एक लड़की से प्यार हो गया। सीमा फर्स्ट ईयर की स्टूडेंट थी और कॉलेज में नई आयी थी। उसे ज्यादा कुछ पता नहीं था मेरे बारे में ! और सच कहूँ तो मैंने अपनी पूरी लाइफ में इतनी सीधी और मासूम लड़की कभी नहीं देखी थी। शायद इसीलिये वह पहली ही नजर में मुझे भा गयी थी। उसके पीछे मैंने अपने साथियों को भी लगाया हुआ था , ताकि उसे कोई भी प्रॉब्लम हो तो सबसे पहले मुझे पता चले और मैं उसकी हेल्प करके उसे इम्प्रेस कर सकूँ।….अपनी योजना के मुताबिक मैंने कई मामलों में उसकी हेल्प की , वह मुझसे इम्प्रेस भी होने लगी थी। फिर एक दिन जतिन ने मुझसे कहा - " तुम उसे प्रपोज़ क्यों नहीं कर देते ? "
" मुझ जैसे लड़के को वो पसंद करेगी ? "
" क्यों ? " - वह चौंका - " क्यों नहीं करेगी पसंद ? वह तो तुमसे इम्प्रेस्ड है ना ? "
" लगता तो है। लेकिन , मेरी इमेज तो बिगड़ी हुई है ना पूरे कॉलेज में ! "
" अरे ! ये तुम क्या बोल रहे हो ?...किसी ने सच ही कहा है , प्यार इंसान को पागल बना देता है। जिस इमेज को बनाने के लिए तुम हर किसी पर रौब झाड़ते फिरते हो , वही इमेज तुमको आज बिगड़ी हुई लग रही है ! "
" ऐसी बात नहीं है। " - मैं बोला - " मैं बस ये सोच रहा था कि अगर उसने मना कर दिया तो ? "
" मुझे नहीं लगता कि वो ऐसा करेगी। लेकिन , पता तो चल जाएगा कि उसके मन में क्या है ! "
जतिन की ये बात मुझे ठीक लगी कि उसे प्रपोज़ करने से कम से कम ये तो पता चल ही जायेगा कि उसके मन में मेरे लिए क्या है ! "
उस दिन तो मैं हिम्मत नहीं कर पाया। लेकिन , अगले दिन मैंने सोच लिया था कि मैं सीमा को प्रपोज़ करके रहूँगा।
उस दिन वह अकेली ही घूम रही थी।
मैं उसके पास जाकर बस यूँ ही इधर - उधर की बातें करने लगा।
कुछ देर बाद मैं बोला - " मैं…मैं तुमसे कुछ कहना चाहता हूँ। "
" हाँ , बोलो ना ! "
" सीमा ! आ...आई लव यू। "
मेरे मुँह से वे तीन मैजिक वर्ड निकले ही थे कि अचानक ' चटाक ' की आवाज वातावरण में गूँज उठी। " - बोलते - बोलते अभय हाइपर हो उठा था , जो इस बात का प्रमाण था कि वह सीमा से सच्चा प्यार करता था।
" सीमा ने तुम्हें थप्पड़ मारी थी , सिर्फ इसलिए कि तुमने उसे प्रपोज किया ? " - साकेत चौंका।
" नहीं। " - अभय ने बताया - " थप्पड़ मुझे सीमा ने नहीं , रिचा ने मारी थी। "
" क्या ? " - साकेत चौंका - " रिचा बीच में कैसे आ गई ? "
" ठीक इसी तरह मैं भी चकित हुआ था कि मेरे और सीमा के बीच में ये रिचा कैसे आ गई ? " - कहते हुए अभय फिर से अतीत में डूब गया - " ये क्या हरकत है ? " - रिचा को अपने सामने देखकर मैं चीखा।
" हरकत ? " - रिचा ने कहा - " हरकत तो तुम कर रहे हो। हर किसी को परेशान करना , लड़ाई - झगड़ा करना और लड़कियों के साथ बदतमीजी करना - यही सब करते रहते हो और अब इस मासूम सीमा को परेशान कर रहे हो ? "
" यह तुम क्या कह रही हो रिचा ? " - सीमा को जैसे यकीन ही नहीं हो रहा था - " अभय तो हमेशा मेरी हेल्प करता है और…"
" तुम कुछ मत बोलो सीमा ! इस कॉलेज में नई हो ना , इसीलिए तुम्हें पता नहीं है कि अभय किस तरह का लड़का है। "
" लेकिन , तुम्हें इसे मारना नहीं चाहिये था। "
रिचा ने घूरकर सीमा को देखा - " पहले जाओ और चार लोगों से पता करो कि अभय का रियल नेचर कैसा है ! उसके बाद मुझे नहीं लगता कि तुम कभी अभय से बात करना भी पसंद करोगी। "
रिचा अपना काम करके जा चुकी थी।
सीमा अभी भी हैरत भरी नजरों से मुझे देख रही थी।
मैं कुछ भी बोलने की स्थिति में नहीं था।
सीमा भी बिना कोई शब्द कहे वहाँ से चली गयी।
अब वहाँ मैं अकेला था , बिल्कुल अकेला !
इसी समय जतिन वहाँ आया - " तुमने उसे प्रपोज किया ? "
मैंने उसे खा जाने वाली नजरों से देखा।
" उसने मना कर दिया ? " - संशय भरे शब्दों में उसने पूछा।
मैंने इनकार में सिर हिलाया।
" फिर ? "
वहाँ जो कुछ हुआ था , मैंने संक्षेप में बताया।


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