मर्डर ऑन वेलेंटाइन नाइट - 36

मर्डर ऑन वेलेंटाइन नाइट - 36

सुबह 7 बजे साकेत की आंख खुली।

उठते ही साकेत के दिमाग में जो पहला विचार आया , वो था - " कातिल कौन है ?....रिचा का कत्ल किसने किया ? " 

साकेत की निगाह पास ही टेबल पर रखे कैलेंडर की ओर गयी।

आज 18 तारीख हो चुकी थी।

16 तारीख को रागिनी ' रिचा मर्डर केस ' लेकर साकेत के पास आयी थी। 

मतलब , रिचा के केस की इन्वेस्टीगेशन का आज तीसरा दिन था !

पिछले दो दिनों से साकेत सिर्फ एक ही काम कर रहा था , रिचा के केस से सम्बंधित जानकारी एकत्र करना !....जानकारी तो उसने बहुत जुटा ली थी। लेकिन , रिचा के कातिल तक पहुंचने के लिए यह जानकारी पर्याप्त नहीं थी।

रात - दिन इसी केस पर काम कर रहा था वो।

साकेत की यह बड़ी बुरी आदत थी , या तो वह कोई काम करता नहीं था या फिर करता था तो सब कुछ भूलाकर काम के बिल्कुल पीछे ही पड़ जाता था।

बहरहाल , साकेत के सब्र का बांध अब टूटने लगा था।

वह जल्द से जल्द रिचा के कातिल तक पहुंचना चाहता था।

कुछ ही समय बाद साकेत के हाथ में कॉफी का कप था , जिसे लिए हुए वह बालकनी में खड़ा था।

सुबह की धूप उसे काफी अच्छी लग रही थी।

लेकिन , मस्तिष्क में सिर्फ एक ही सवाल उठ रहा था - " रिचा का कत्ल किसने किया ? "

जल्द ही कॉफ़ी खत्म करके साकेत बाथरूम में घुसा और करीब 9 बजे तक तैयार होकर अपनी कार को उदयपुर की सड़कों पर दौड़ाने लगा।

कुछ ही समय के बाद कार एक घर के सामने रूकी।

घर के सामने ही कार को पार्क करके साकेत ने कॉलबेल बजायी।

साकेत को कुछ समय प्रतिक्षा करनी पड़ी।

गेट खुला।

" कौन हो तुम ?...क्या चाहिये ? " - एक 19 - 20 साल का नौजवान साकेत से पूछ रहा था।

उसके बात करने के लहजे पर साकेत को गुस्सा तो बहुत आया , लेकिन वह संयमित स्वर में बोला - " साकेत अग्निहोत्री ! प्राइवेट डिटेक्टिव ! " 

नाम सुनते ही वह बुरी तरह से चौंक उठा। 

पलभर के लिए वह स्तब्ध - सा यूँ खड़ा रहा मानो , समझ ही न पा रहा हो कि उसे क्या करना चाहिए और क्या नहीं !

" पापा अभी घर पर नहीं है। " - वह थोड़ा काँपते स्वर में बोला।

साकेत हल्के - से मुस्कराया - " मैं तुम्हारे पिता से नहीं , तुमसे ही मिलने आया हूँ। "

" मुझसे…क्यों ? "

" तुम्हारा नाम अभय है ना ! "

" हाँ। "

" और तुम आर्ट्स कॉलेज में पढ़ते हो ! "

" जी ! " - अभय धीमे - से बोला - " लेकिन , बात क्या है ? "

" सब कुछ यहीं बताना पड़ेगा ?....भीतर नहीं बुलाओगे ? "

" हाँ , अंदर आइये। " -  गेट से हटते हुए अभय बोला।

वे ड्राइंग रूम में पहुंचे।

एक सोफे पर बैठते हुए साकेत ने पूछा - " रिचा को जानते हो तुम ? "

" रिचा ?...हाँ , जानता हूँ। " - बोलते हुए अभय के चेहरे पर पसीने की दो - एक बूँदे उभर आयी।

" कहाँ रहती है वो ? " 

अभय ने विस्मित निगाहों से साकेत की ओर देखा - " रहती थी…अब नहीं रहती। "

" क्या मतलब ? "

" रिचा अब इस दुनिया मे नहीं है , वो मर चुकी है। " - थोड़ा नर्वस होते हुए अभय बोला - " लेकिन , ये सब आप मुझसे क्यो पूछ रहे हैं ?....बात क्या है ? "

" रिचा के केस की इन्वेस्टिगेशन कर रहा हूँ और इसी के संबंध में तुमसे कुछ सवाल करने के लिए यहाँ आया हूँ। " - साकेत हल्के - से मुस्कराते हुए बोला।

" क्या ? " - अभय बुरी तरह से चौंक उठा - " आपको पहले से ही पता है कि रिचा मर चुकी है ? "

" हाँ। "

" फिर आपने ये क्यों पूछा कि वो कहाँ रहती ' है ' ?....आपको तो पूछना चाहिए था कि वो कहाँ रहती ' थी ' ? "

" बस यूं ही , टाइम पास कर रहा था , ठीक वैसे ही जैसे तुम किया करते हो कॉलेज में , हर किसी के साथ। "

अभय दोबारा चौंका - " सर ! ये वक़्त मजाक या टाइम पास करने का नहीं है।...एक मर चुकी लड़की के सम्बंध में मजाक या टाइम पास करना अच्छी बात नहीं है। "

" सही कहा। लड़की का कत्ल कर देना अच्छी बात है , लेकिन लड़की के विषय में मजाक करना अच्छी बात नहीं है ! "

" य…ये आप क्या कह रहे हैं ? " - अभय एकाएक ही घबरा उठा।

" घबराओ नहीं , बस मेरे कुछ सवालों के जवाब दो। "

" पूछिये। "

" पलक को जानते हो ना ? " 

" हाँ , जानता हूँ। "

" आकाश के साथ उसका रिलेशन कैसा है ? "

" आकाश और पलक ? " - कुछ सोचते हुए अभय बोला - " आप तो रिचा के केस की इन्वेस्टिगेशन कर रहे हैं , फिर ये पलक और आकाश के बारे में क्यों पूछ रहे हैं ? "

" सवाल बहुत करते हो तुम। " - मुस्कराते हुए साकेत बोला - " तुम्हारे कॉलेज करीब एक महीने पहले रिंग चोरी की एक घटना हुई थी। "

" हाँ , आकाश ने पलक की रिंग चुरायी थी। "

" पलक और आकाश की आपस में कोई दुश्मनी वगैरह थी क्या ? "

" मुझे तो नहीं लगता। "

" प्यार - व्यार का कोई मामला ? "

अभय सोच में पड़ गया।

" हाँ , कुछ था तो सही ऐसा ! " - एकाएक ही अभय बोला - " लेकिन , इस बात को काफी टाइम हो गया है। "

" क्या था ? " - साकेत ने पूछा - " कितना टाइम हुआ है ? " 

" ये कॉलेज के शुरुआती दिनों की बात है। " - अभय ने बताना शुरू किया - "  हम सब कॉलेज में नए थे और हमारा फर्स्ट ईयर ही था। पलक शुरू से ही हाई प्रोफाइल लड़की रही है। दिखावा करने का उसे बहुत शौक रहा है। आकाश काफी आकर्षक और सीधा लड़का होने की वजह से पलक को पसंद आ गया था। पलक ने उस पर चांस मारने की कोशिश की। लेकिन , वह आकाश की पसंद नहीं बन सकी। सीधे और मासूम आकाश को रिचा जैसी सिम्पल लड़की ही अच्छी लगी। कुछ दिनों में रिचा और आकाश का नाम एक साथ लिया जाने लगा। पलक जैसी खूबसूरत लड़की को आकाश जैसे साधारण लड़के ने कोई भाव नहीं दिया , इस बात ने पलक का ईगो हर्ट कर दिया था।….इसके बाद से , मुझे तो पलक की आँखों में आकाश के लिए हमेशा ' अंगूर खट्टे हैं ' वाली भावना ही दिखायी दी। "

" मतलब , पलक और आकाश में दोस्ती जैसा कुछ भी नहीं था ! "

" सवाल ही नहीं उठता। "

" ठीक है। " - साकेत ने कहा - " अब एक सवाल का और जवाब दे दो , फिर मैं यहाँ से चला जाऊँगा और प्रयास करूँगा कि तुम्हें फिर कभी परेशान ना करना पड़े। "

" ऐसी कोई बात नहीं है सर ! " - अभय बड़े ही विनम्र स्वर में बोला - " जो बातें मुझे पता है , उन्हें बताने में भला क्या परेशानी हो सकती है !...आप अपना सवाल पूछिये। "

" इस सवाल से तुम्हें परेशानी जरूर होगी , क्योंकि यह तुम्हारे और रिचा के रिलेशन के बारे में है। "

" क्या ? " - अभय चौंका - " मेरे और रिचा के बीच में कुछ भी नही था। "

" जानता हूँ। " - साकेत बोला - " तुम दोनों के बीच प्यार या दोस्ती जैसा कुछ भी नहीं था। "

" फिर ? "

" दुश्मनी जैसा कुछ था।….क्या और क्यों….ये तुम बताओगे। "

अभय पहले थोड़ा नर्वस हुआ।

फिर एकाएक ही बोला - " आपको कोई गलतफहमी हुई है सर ! ऐसा कुछ भी नहीं था। "

साकेत मुस्कराया - " तुमने रिचा को अपना टारगेट बनाया हुआ था और तुम उसे तबाह कर देना चाहते थे। "

" आपको ये सब कैसे पता ? " - अभय बुरी तरह से शॉक्ड हो उठा - " किसने बताया ? "

" अब तुम उसका नाम जानना चाहते हो , जिसने मुझे तुम्हारे बारे में इन्फॉर्मेशन दी , ताकि अपने चार साथियों को साथ लेकर उसे कोई धमकी देने जा सको ? "

अभय के चेहरे पर पराजय के भाव उभरे।

अब वह समझ चुका था कि उसके सामने बैठा साकेत अग्निहोत्री नाम का ये शख्स उसके बारे में सारी इन्फॉर्मेशन कलेक्ट करने के बाद ही यहाँ आया है !


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