मर्डर ऑन वेलेंटाइन नाइट - 35

 मर्डर ऑन वेलेंटाइन नाइट - 35

घर पहुंचकर साकेत ने डिनर लिया।
गौरव सर्व करते हुए बोला - " रिचा वाले केस का कुछ हुआ सर ? "
" चीज़ें उतनी आसान होती नहीं है , जितना कि हम उन्हें समझते हैं। "
" क्या मतलब ? "
" रिचा के इस केस को जितना मैं सुलझाने की कोशिश कर रहा हूँ , यह उतना ही उलझता जा रहा है। " - साकेत बोला - " आमतौर पर जब हमें किसी सवाल का जवाब ढूंढना होता है , तो हमे कुछ जानकारियां जुटानी पड़ती है। जैसे - जैसे हमारे पास जानकारियों का भंडार एकत्र होता जाता है , हमारे संशय दूर होते चले जाते हैं और हम अपने सवाल का जवाब जानने की दिशा में आगे बढ़ते जाते हैं।….लेकिन , रिचा के केस में ऐसा नहीं हो रहा है। इस केस में जैसे - जैसे जानकारियों का भंडार एकत्र हो रहा है , वैसे - वैसे संशय दूर होने के स्थान पर उलझनें बढ़ती ही जा रही है। हर नई जानकारी एक नई उलझन लेकर आती है और केस सुलझने के बजाय और अधिक उलझता जाता है। "
" आपने बड़े - बड़े केस सॉल्व किये है सर ! ये वाला भी कर ही लेंगे। "
डिनर खत्म करके साकेत स्टडी रूम में पहुंचा।
तिजोरी से उसने रिचा मर्डर केस की फ़ाइल निकाली और अब तक हासिल की हुई जानकारी पर एक सरसरी निगाह डाली।
इसके बाद उसने फोटो स्टूडियो से लाये लिफाफे को खोलकर एक - एक फोटो को ध्यान से देखना शुरू किया।
सबसे पहली फोटो थी , इंस्पेक्टर सोमेश मुखर्जी की !
" इंस्पेक्टर मुखर्जी का प्रमोशन कई सालों से रुका हुआ है , आम जनता का पुलिस पर अविश्वास इंस्पेक्टर मुखर्जी को काफी तकलीफ देता है और मुखर्जी चाहता है कि मैं रिचा के केस से खुद को अलग कर लूँ , महज इसलिए क्योंकि कातिल बहुत चालाक है ! मैं कातिल तक पहुंचने में असफल हो सकता हूँ और अगर ऐसा हुआ , तो मेरा जासूसी कैरियर संकट में पड़ सकता है !...उसे एकाएक मेरी परवाह क्यों होने लगी ? वह मुझे इस केस से दूर क्यों रखना चाहता है ?...क्या वजह हो सकती है इसकी ? " - साकेत ने काफी सोचा , लेकिन वजह उसकी समझ में नहीं आयी।
अगली फोटो थी , आर्ट्स कॉलेज के प्रिंसिपल महेंद्र चौबीसा की !
" प्रिंसीपल महेंद्र चौबीसा का रवैया तो सकारात्मक ही लग रहा है। लेकिन , उन्हीं के कॉलेज से एक के बाद एक लड़कियों के गायब होने की वजह से पूरा कॉलेज ही शक के दायरे में आ चुका है। शायद , इसीलिए वे इस केस में हर मुमकिन मदद करने के लिए तैयार है। "
तीसरी फोटो थी , पलक की !
" पलक की रिंग किसी ने चुरा ली। रिंग चोरी की उस घटना की वजह से आकाश और रिचा का न केवल ब्रेकअप हो गया , बल्कि उनकी पूरी लाइफ ही तबाह हो गई।
अब तक पलक यही समझती रही कि रिंग चुराने वाला शख्स आकाश ही है। लेकिन , अब उसे लग रहा है कि वह कोई और भी हो सकता है।….कौन हो सकता है ?...पलक जानना चाहती है , वह शख्स कौन हो सकता है ?....इतने लंबे समय बाद अब पलक की रूचि फिर से असली रिंग चोर को जानने में हो रही है और इसीलिये वह मेरी मदद करने को भी तैयार हो गयी।….आकाश का कहना है कि रिंग चोरी के मामले में उसे पलक ने फंसाया हो सकता है।...सवाल है , क्यों ?...पलक ऐसा क्यों करेगी ? " - साकेत किसी निर्णय पर नहीं पहुंच पा रहा था।
चौथी फोटो थी , काव्या की !
" काव्या आकाश को मन ही मन चाहती थी और उसका साथ पाने के लिए कुछ भी कर सकती थी !....दो साल पहले उसने आकाश को प्रपोज किया था , उसका प्रपोज़ल एक्सेप्ट नहीं हुआ , तो आकाश की दोस्ती पाकर भी वह काफी खुश थी।….जब रिचा और आकाश का ब्रेकअप हुआ तो काव्या को आकाश के करीब आने का अवसर मिला। मतलब , रिचा और आकाश के ब्रेकअप से अगर किसी को फायदा हुआ था , तो वह काव्या ही थी !...लेकिन , वह अचानक गायब हो गई ! "
पांचवीं फोटो थी , सलोनी की !
" सलोनी , एक बिगड़ैल लड़की , जिसके माता - पिता का देहांत बचपन में ही हो चुका था। चाचा - चाची ने अपनी सगी बेटी की तरह जिसे पाल पोसकर बड़ा किया।
गलत संगत में पड़कर वह बिगड़ गई। चाचा प्रतापसिंह को डर था कि उसकी सोहबत में रहकर कहीं उसका बेटा सोनू भी बिगड़ ना जाये !
अभय जैसे बिगड़ैल लड़के के ग्रुप में वह शामिल थी। देर रात पार्टियां करना , बेवजह लड़ाई झगड़े करना , सिगरेट - शराब पीना - इन्हीं सब चीज़ों में अभय के पूरे ग्रुप की रुचि थी !....फिर एक दिन अचानक सलोनी गायब हो जाती है , ठीक काव्या की ही तरह ! "
अगली फोटो थी , पवन माथुर की !
" पवन माथुर , अपने बेटे आकाश से बेहद प्रेम करते हैं और रिचा से उतनी ही नफरत !....आकाश की लाइफ तबाह होने की मुख्य वजह वे रिचा को ही मानते हैं।...उनकी नजर में रिचा एक मनहूस लड़की थी , जिसने आकाश को हमेशा सिर्फ तकलीफ ही दी !...जिंदा थी , तब भी और मर गयी , तब भी ! "
अगली फोटो थी , शुभम की !
" शुभम , एक डिसेंट लड़का , जो रिचा को मन ही मन चाहता था। उसने कभी रिचा को प्रपोज करने की हिमाकत इसलिए नहीं की , क्योंकि वह आकाश के साथ थी।
लेकिन , जब आकाश से रिचा का ब्रेकअप हुआ , तो शुभम को एक अवसर मिला , जिसका लाभ उठाने का भरपूर प्रयास उसने किया ; हालांकि वह सफल नहीं हो पाया। "
अगली फोटो थी , अभय की !
" अभय , एक ऐसा लड़का , जिसका काम हरवक्त किसी न किसी को परेशान करना है। रिचा को ब्रेकअप के बाद से ही इसने परेशान करना शुरू कर दिया था। वह रिचा को तबाह करना चाहता था। रिचा उसकी टारगेट थी ! लेकिन , फिर भी उसने रिचा को कोई नुकसान नहीं पहुंचाया ! जिसका सीधा - सा अर्थ यही है कि उसने अपना इरादा बदल दिया था !....क्यों ?...रिचा से उसकी क्या दुश्मनी हो सकती है ?...यह तो सिर्फ अभय ही जानता है। "
अगली फोटो बड़ी महत्वपूर्ण थी , जिसे देखते ही साकेत के चेहरे पर व्यंग्यात्मक मुस्कान उभर आयी।
यह फोटो थी , सौरभ की !
" सौरभ , जो खुद को समाजसेवी बताता है ! साइकोलॉजी में हद से ज्यादा रूचि रखने वाले इस शख्स का तो जीवन ही साइकोलॉजी से सरोबार लगता है।
रिचा से इसका कुछ सम्बन्ध तो अवश्य रहा होगा ! ...अभय को यह असामाजिक तत्व बताता है और उसे शुरू से ही ऑब्जर्व कर रहा है , ताकि उसकी योजनाओं का पता लगाकर वह उन सबको आगाह कर सके , जो अभय की योजनाओं का शिकार होने वाले हैं !...वह अभय से सीधे उलझना नहीं चाहता।
और सबसे बड़ी बात , उसे मेरे बारे में , यहाँ तक कि मेरे निजी जीवन के बारे में भी काफी कुछ पता है ! ….क्यों और कैसे ? …..कहीं ऐसा तो नहीं कि वह अभय की ही तरह मुझे भी ऑब्जर्व कर रहा हो ?...नहीं , ऐसा होना मुमकिन नहीं ! क्योंकि न तो मैं कोई असामाजिक तत्व हूँ और न ही मेरा उससे कोई प्रत्यक्ष सम्बन्ध है।...अगर कोई कड़ी है , जो हम दोनों को आपस में जोड़ती है , तो वह है , रिचा !....लेकिन , रिचा के मामले में सौरभ को मुझ पर नजर रखने की क्या जरूरत है ? और अगर वो ऐसा करता है , तो इसकी सिर्फ एक ही वजह हो सकती है ! " - उस वजह के बारे में सोचकर साकेत बुरी तरह से चौंक उठा - " क्या सौरभ रिचा का कातिल हो सकता है ?...नहीं , सौरभ के बारे में इतना जल्दी किसी नतीजे पर पहुंचना जल्दबाजी होगी।"
साकेत ने सारी फोटोज को यूँ ही मेज़ पर रख दिया।
अब उसके दिमाग में आकाश और रागिनी घूमने लगे।
" रागिनी !....जिस रात रिचा का कत्ल हुआ , रागिनी ने कॉल करके आकाश को घर बुलाया। लेकिन , आकाश नहीं पहुंच पाया , क्योंकि उसी रात उसका एक्सीडेंट हो गया था।...इसके अगले दिन भी रागिनी ने यह जानने की जरा भी कोशिश नहीं की कि पिछली रात आकाश मेरे घर क्यों नहीं पहुंच पाया था ! और तो और , जब इंस्पेक्टर सोमेश मुखर्जी ने रागिनी को आकाश के एक्सीडेंट के बारे में बताया , तब भी रागिनी उससे मिलने हॉस्पिटल नहीं गयी और अब , रागिनी उसी आकाश से मिलने रेस्टोरेंट में गयी है !....वह आकाश से अपने घर मिल सकती थी या खुद आकाश के घर जा सकती थी। लेकिन , उसने ऐसा कुछ नहीं किया।...क्या आकाश और रागिनी कुछ छिपाने का प्रयास कर रहे हैं ?...अगर हाँ , तो क्या ? और सबसे जरूरी सवाल…किससे ?......इन सबसे भी ज्यादा जरूरी बात , रागिनी रिचा की सगी बहन है ही नहीं ! वह एक अनाथ लड़की थी , जिसे रिचा के माता - पिता ने गोद लिया था ! "
साकेत किसी निर्णय पर नहीं पहुंच पा रहा था !
वह कई घंटों तक केस से जुड़े सभी लोगों के बारे में सोचता रहा , लेकिन , परिणाम कुछ नहीं निकला।
रात के करीब 2 बजे सोने के लिए वह बेडरूम में चला गया।

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