मर्डर ऑन वेलेंटाइन नाइट - 34
शाम के 6 बज चुके थे।
साकेत कार ड्राइव कर रहा था।
जल्द ही वह डिटेक्टिव एजेंसी पहुंचा।
बरखा अपनी सीट पर मौजूद थी।
साकेत ने उसे तवज्जो नहीं दी , जो कि बरखा के लिए कोई नई बात नहीं थी।
साकेत जब भी किसी बात को लेकर परेशान होता या कहीं पहुंचने की जल्दी में होता , तब वह ऐसा ही करता था।
बहरहाल , आज साकेत जल्दी में था।
उसे कुछ कॉल करने थे।
वह अपने केबिन में पहुंचा।
दराज में से उसने एक सिमकार्ड और मोबाइल निकाला।
सिमकार्ड मोबाइल में डालकर उसने एक नम्बर डायल किया।
" हेलो ! गुड इवनिंग सर ! " - फोन के उस तरफ से कोई बोला।
" रिपोर्ट करो। " - साकेत रूखे अंदाज़ में बोला।
" सर ! मैं पिछले 24 घंटे से उसके पीछे लगा हुआ हूँ। "
" कोई खास बात सामने आयी ? "
" हाँ सर ! वैसे तो वह पूरे दिन घर पर ही रहा। लेकिन , आज दिन में एक बजे के करीब कोई लड़का उसके घर आया था। "
साकेत को याद आया कि 2 से 3 बजे तक वह आकाश के घर पर ही था और उस दौरान आकाश वहाँ पर नहीं था।
" कौन था वो ? " - साकेत ने पूछा।
" ये तो नहीं पता। लेकिन वह जो भी था , आकाश से उसे कोई काम नहीं था , बल्कि आकाश को ही उससे कुछ काम था। "
" क्या मतलब ? "
" आकाश के पैरों का दर्द अभी भी बरकरार है और इस हालत में वह खुद बाइक चलाकर कहीं जा नहीं सकता।...वह लड़का आकाश को कहीं ड्रॉप करने के लिए आया था। "
" कहाँ पर ? "
" मैंने उसका पीछा किया था। वह आकाश को लेकर ' स्वागत रेस्टोरेंट ' गया था। वहाँ पर उसने आकाश को ड्रॉप किया और वहां से चला गया। इसके बाद करीब 3 बजे वह दोबारा वहाँ आया और उसने आकाश को उसके घर ड्रॉप किया। "
" आकाश पूरे 2 घंटे तक उसी रेस्टोरेंट में रुका रहा ? "
" जाहिर सी बात है। "
" लेकिन , इतने लंबे समय तक उसके रेस्टोरेंट में रुकने की वजह क्या हो सकती है ? "
" वजह बहुत बड़ी है सर ! आकाश अभी पूरी तरह से ठीक भी नहीं हुआ है और ऐसी हालत में उसका घर से बाहर किसी रेस्टोरेंट में जाना आम बात तो हो नहीं सकती। "
" वजह बोलो। "
" रागिनी ! "
साकेत बुरी तरह से चौंक उठा।
" क्या कहा तुमने ? " - साकेत ने दोबारा पूछा।
" रागिनी सर ! रागिनी शुक्ला ! "
" मतलब , आकाश रागिनी से मिलने के लिए स्वागत रेस्टोरेंट में गया था। "
" हाँ। "
" वह उसे अपने घर भी बुला सकता था। रागिनी से मिलने के लिए आकाश को किसी रेस्टोरेंट में मीटिंग अरेंज करने की क्या जरूरत थी ? "
" मुझे तो कुछ गड़बड़ लग रही है सर ! "
" उन लोगों के बीच क्या बातें हुई ? "
" सब कुछ तो मैं सुन नहीं पाया। लेकिन उनकी बातों से ये जरूर समझ आ रहा था कि वे दोनों काफी क्लोज है। "
" तुम्हें ऐसा लगा ? "
" जी सर ! "
" और कोई खास बात ? "
" सर ! दो घंटे तक उन लोगों का रेस्टोरेंट में सिर्फ बातें करने के लिए रुकना ही मेरी नजर में तो सबसे खास बात है। "
" ठीक है।...तुम अपना काम जारी रखो। "
" ओके सर ! "
साकेत ने फोन कट करके एक दूसरा नंबर डायल किया।
" हेलो , गुड़ इवनिंग सर ! "
" गुड़ इवनिंग ! " - साकेत बोला - " तुमने किया , जो मैंने कहा था ? "
" जी सर ! आदर्श नगर कॉलोनी और उसके आस पास के इलाके में रहने वाले हर एक शख्स के बारे में इतने कम समय में जानकारी जुटाना मुमकिन नही था तो मैंने एक आसान तरीका अपनाया। "
" क्या है वो आसान तरीका ? "
" रिचा की फेसबुक आइ डी से मैंने उसके उन सभी फ्रेंड्स को सेलेक्ट किया , जो उसकी कॉलोनी या आस पास के इलाकों में रहते हैं। "
" गुड़ ! कुछ मदद मिली इससे ? "
" खास मदद तो नहीं मिली। लेकिन , एक नयी जानकारी हाथ लगी है। "
" क्या ? "
" अंजली नाम की एक लड़की ने अपनी फेसबुक वॉल पर एक पोस्ट की हुई है। अंजली फेसबुक पर रिचा की फ़्रेंडलिस्ट में एड है और आदर्श नगर में ही रहती है। "
" क्या…लिखा क्या है , उस पोस्ट में ? "
" आज के टाइम में सगी बहनों में भी उतना प्यार देखने को नहीं मिलता , जितना इन दोनों बहनों के बीच है।...इस पोस्ट के साथ ही रिचा और रागिनी की फोटो भी शेयर की हुई है , जिससे यह साफ पता चलता है कि यह पोस्ट इन्ही दोनों बहनों के विषय में है। "
" इसका क्या अर्थ हुआ ? " - साकेत बुरी तरह से चौंककर चीख उठा - " ये दोनों सगी बहने नहीं है ? "
" पोस्ट से तो ऐसा ही लग रहा है सर ! और इस विषय में ज्यादा जानकारी तो अंजली से ही मिल सकती है। "
" ठीक है। तुम उस पोस्ट का लिंक मेरे व्हाट्सअप पर सेंड कर दो। "
" ओके सर ! " - कहने के साथ ही फोन कट कर दिया गया।
साकेत के लिए सस्पेंस बढ़ता जा रहा था।
" अब एक और नए रहस्य का खुलासा होने वाला है और इसके लिए मुझे जल्द से जल्द अंजली से मिलना होगा। " - बोलने के साथ ही साकेत उठ खड़ा हुआ और एजेंसी से बाहर निकलकर कार स्टार्ट की।
6.30 बज चुके थे।
कार आदर्श नगर की ओर चल पड़ी।
शीघ्र ही साकेत एक मकान की कॉलबेल बजा रहा था।
गेट खोलने वाली करीब 19 वर्ष की एक लड़की थी।
" आप कौन ? " - साकेत को देखते ही लड़की ने पूछा।
" साकेत अग्निहोत्री….प्राइवेट डिटेक्टिव ! "
" किससे मिलना है आपको ? "
" तुमसे। "
" लेकिन , मैं तो आपको जानती तक नहीं। " - चौंकते हुए लड़की बोली।
साकेत मुस्कराया - " तुम रिचा को जानती थी ? "
" हाँ। " - लड़की कुछ सोचते हुए बोली - " आप उसके बारे में तहकीकात कर रहे हैं ? "
" हाँ। तुम्हें कैसे पता ? "
" आपने बताया , आप डिटेक्टिव है और फिर रिचा का नाम लिया तो मुझे ये बात समझ आयी। "
" क्या मैं भीतर आ सकता हूँ ? " - काफी देर से गेट पर ही रुके हुए साकेत ने पूछा।
" हाँ , आइये ना ! "
वे ड्राइंग रूम में पहुंचे।
लड़की ने सोफे की ओर संकेत करके साकेत को बैठने के लिए कहा।
" तुम रिचा को कब से जानती थी ? "
" बचपन से। " - अंजली ने बताया - " हम साथ ही खेले और बड़े हुए हैं। "
" फिर तो तुम रागिनी को भी जानती होगी ? "
" हाँ। रिचा की बहन है। "
" सगी ? "
" क्या ? "
" रिचा , रागिनी की सगी बहन थी ? "
" सर ! यह किस तरह का सवाल है ? "
" मैंने सुना है कि रागिनी और रिचा सगी बहने नही है। तुम्हें क्या लगता है ? "
" इससे फर्क नहीं पड़ता सर ! " - अंजली थोड़ा इमोशनल होते हुए बोली - " रागिनी और रिचा में जो प्यार था , वो तो सगी बहनों में भी नहीं होता। "
" तो , जो मैंने सुना , वो सच है ? "
" हाँ , रिचा रागिनी की सगी बहन नहीं थी। "
" अंकल की लड़की रही होगी ? "
अंजली ने इनकार में सिर हिलाया।
" तो बड़े पापा की या ताऊजी की लड़की ? "
अंजली का सिर दोबारा इनकार में हिला।
" फिर ? "
" रागिनी , रिचा के पिता की गोद ली हुई संतान है। "
अंजली के इस कथन ने साकेत के मस्तिष्क में ऐसा विस्फोट किया , मानो एक साथ कई डाइनामाइट फूट पड़े हो !
साकेत को यकीन नहीं हुआ कि जो कुछ वो सुन रहा था , वो सच था !
तभी तो उसे पूछना पड़ा - " तुम सच कह रही हो ? "
" इसमें छिपाने जैसा कुछ है ही नहीं। हर कोई इस बात को जानता है। " - अंजली लापरवाही से बोली।
" लेकिन , ऐसा क्यों हुआ ? " - साकेत ने पूछा - " रिचा के माता - पिता को रागिनी को गोद लेने की जरूरत क्यो पड़ी ? "
अंजली ने बताना शुरू किया - " रिचा के माता - पिता की शादी के 7 साल बाद भी उनकी कोई संतान नहीं हुई , तो उन्होंने उदयपुर के ही एक अनाथालय से एक बच्ची को गोद ले लिया। उसका नाम रागिनी था और उस वक़्त वह मात्र 1 साल की थी। रागिनी ने उनके जीवन को खुशियों से भर दिया। रागिनी के आते ही उनकी किस्मत भी बदल गयी और महज 1 साल बाद ही रिचा का जन्म हुआ। अब उनकी एक नहीं , दो बेटियां थी और उनका स्वभाव इतना अच्छा था कि उन्होंने दोनों में कभी कोई भेद नहीं किया। रागिनी और रिचा दोनो को ही उन्होंने अपनी सगी बेटियों की तरह पाला। "
" रिचा के माता - पिता तो किसी कार एक्सीडेंट में मारे गए थे ना ? "
" हाँ। पता नहीं , उनके साथ ऐसा क्यों हुआ ? लेकिन , जब तक वे रहे , उनकी फैमिली एक आदर्श फैमिली रही और उनकी डैथ के बाद भी दोनों बहनें अच्छे से रह ही रही थी। फिर , पता नहीं रिचा के साथ कैसे वो सब…" - कहते - कहते अंजली की रुलाई फुट पड़ी।
भरपूर आँसू बहा लेने के बाद अंजली ने रुमाल से अपने आँसू पोंछे - " सॉरी ! "
" इट्स ओके अंजली ! " - साकेत बोला - " अब मुझे चलना चाहिए। "
जल्द ही साकेत बाहर निकल आया।
7 बज चुके थे।
साकेत कार में बैठा और कार स्टार्ट की।
कुछ ही समय बाद उसकी कार फोटो स्टुडियो के सामने रूकी।
स्टूडियो मालिक फोटोज का एक लिफाफा लेकर आया।
लिफाफा उसने साकेत की ओर बढ़ाया।
साकेत ने फोटोज का बिल पे किया और कार घर की ओर दौड़ा दी।
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