मर्डर ऑन वेलेंटाइन नाइट - 33
" थैंक्स फ़ॉर एडवाइज ! " - साकेत बोला - " तुम्हारी जानकारी में अभय ने रिचा को कभी किसी तरह का नुकसान पहुंचाया था ? "
" नहीं। उसने कहा जरूर था ऐसा। धमकियां भी दी थी खुले तौर पर। लेकिन , ऐसा कुछ किया नहीं और सच बताऊँ तो ये बात मुझे बिलकुल भी समझ नहीं आयी कि अगर अभय रिचा को तबाह करना चाहता था तो उसने उसे कोई नुकसान क्यों नहीं पहुंचाया !...इसलिये इस बात की पूरी - पूरी संभावना है कि रिचा का कत्ल उसी ने किया हो ! "
" तुमने कहा था कि रिचा तुम्हारी दोस्त नहीं थी। तुम्हारी बस उससे जान - पहचान थी , एज ए क्लासमेट ! "
" सच कहा था। "
" अगर ये सच है तो यह कैसे मुमकिन हुआ कि रिचा के बारे में जो बात उसके बॉयफ्रेंड तक को नहीं पता , वह तुम्हें पता चल गयी ? "
" कौनसी बात ? "
" यही कि अभय रिचा को तबाह करना चाहता था ! "
सौरभ ने घूरकर साकेत की ओर देखा।
" इससे तो यही साबित होता है कि तुम रिचा के निजी जीवन से काफी हद तक वाकिफ थे , जिसका सीधा - सा अर्थ यह निकलता है कि रिचा न सिर्फ तुम्हारी दोस्त थी , बल्कि उससे भी कुछ ज्यादा थी ! भले ही यह दोस्ती रिचा के आकाश से ब्रेकअप के बाद शुरू हुई हो। "
सौरभ हँसते हुए एक बार फिर दार्शनिक हो उठा - " इंसान हमेशा इसी खुशफहमी में रहता है कि जो कुछ वो देख रहा है , सोच रहा है , समझ रहा है - सिर्फ वही सच है और बाकी सब झूठ !...लेकिन , कई बार वह गलत साबित हो जाता है और इसकी वजह यह होती है कि वो हमेशा वही देखता है जो वह देखना चाहता है , वह नहीं देखता जो हकीकत में उसे देखना चाहिये। "
" क्या मतलब ? "
" आपको यह तो दिख गया कि ब्रेकअप के बाद रिचा से मेरी नजदीकियां बढ़ गयी थी , लेकिन आप यह नहीं देख पाए कि इन नजदीकियों की वजह क्या थी ! "
" क्या थी ? "
" अभय ! "
साकेत बुरी तरह से चौंक उठा - " मैं समझा नहीं। "
" समझाता हूँ। " - मुस्कराते हुए सौरभ बोला - " रिचा और आकाश की लव स्टोरी पूरे कॉलेज में फेमस थी। वजह , पिछले दो सालों से वे रिलेशनशिप में थे। आजकल के नौजवानों के लिए इतने लंबे अरसे तक रिलेशनशिप में रह पाना आसान नहीं होता। लेकिन , रिचा और आकाश इसके अपवाद थे। यही वजह थी कि जब उनका ब्रेकअप हुआ तो सभी का ध्यान उनकी ओर आकर्षित हुआ। रिचा मेरे सम्पर्क में आयी , तो उसकी वजह से मुझ पर भी सबका ध्यान गया और इसका अर्थ वही निकाला गया , जो निकाला जा सकता था। सबको लगने लगा कि रिचा अब मेरे साथ थी , जबकि हकीकत यह थी कि मैं रिचा से पहले भी कुछ और लड़कियों से नजदीकियां बढ़ा चुका हूँ और इसकी सिर्फ एक वजह थी , अभय ! "
" तो , तुम कहना चाहते हो कि तुम अभय को शुरू से ही ऑब्जर्व कर रहे थे ! " - साकेत कुछ सोचते हुए बोला - " और इसी वजह से तुम रिचा और बाकी दूसरी लड़कियों के सम्पर्क में आये ! "
" आपका अंदाजा बिल्कुल सही है। "
" क्यों ?....मेरा सवाल है कि तुम्हें अभय को ऑब्जर्व करने की जरूरत ही क्यों पड़ी ?...क्या तुम साइकोलॉजी में किसी तरह की रिसर्च कर रहे हो , जिसके लिए अभय जैसे लड़के को ऑब्जर्व करने की जरूरत आ पड़ी ? "
सौरभ हँसा - " अभी तक मेरी ग्रेजुएशन भी कम्पलीट नही हुई है , तो किसी तरह की रिसर्च का तो सवाल ही नहीं उठता। लेकिन , अभय !...अभय बड़ा इंट्रेस्टिंग परसन है। "
" इस इंट्रेस्ट की वजह ? "
सौरभ दोबारा हँसा - " यह आप ना ही जाने , तो ज्यादा अच्छा है। "
" क्यों ? "
" आप यकीन नहीं कर पायेंगे। "
" तुमने कहा था , या तो तुम सच बोलोगे या फिर अपना मुँह बन्द रखोगे।...ऐसी स्थिति में यकीन ना करने का तो सवाल ही नहीं उठता। "
" समाजसेवा। "
" क्या ? "
" मैं समाजसेवक हूँ और अभय को ऑब्जर्व करने के पीछे वजह यही है , समाजसेवा। "
" तुम मजाक अच्छा कर लेते हो। "
" यह मजाक नहीं है। " - आँखों में गंभीरता के भाव लिए सौरभ बोला - " मैंने कहा था , आप यकीन नहीं कर पायेंगे। "
" तुम जरा विस्तार से बताओगे ? "
" कॉलेज के शुरुआती दिनों में ही मैं समझ गया था कि अभय एक ' असामाजिक तत्व ' है। "
" क्या मतलब ? "
" असामाजिक तत्व। " - सौरभ बोला - " किसी भी देश के समाज में तीन तरह के लोग रहते हैं। पहले वे लोग , जो समाज को लाभ पहुंचाते हैं। ऐसे लोग समाज सुधारक कहलाते हैं। "
" तुम्हारे जैसे लोग ! "
" दूसरे वे लोग , जो समाज को नुकसान पहुंचाते हैं। ऐसे लोग असामाजिक तत्व कहलाते हैं। "
" अभय जैसे लोग ! "
" तीसरे वे लोग , जो समाज को न फायदा पहुंचाते हैं , न नुकसान ! ऐसे लोग समाज से कोई मतलब नहीं रखते , इन्हें बस खुद से मतलब होता है। पैसा बनाना , मौज मस्ती करना और खुद की लाइफ जीना - बस इसी में ये अपनी जिंदगी खपा देते हैं। इन्हें तटस्थ या उदासीन कहा जा सकता है।...आप जैसे लोग ! "
साकेत चौंका - " मतलब , मैं तटस्थ हूँ ? "
" ये आपसे बेहतर और कौन बता सकता है ?...समाज से आपको कोई मतलब है ? "
" सच है। " - साकेत बोला - " सामाजिक दृष्टि से तुम्हारी बात सच है।...तुम अभय के बारे में अपनी बात जारी रखो। " मैं जान चुका था कि अभय जैसा लड़का किसी का भी नुकसान करने से नही चुकेगा। इसीलिए मैंने इसे ऑब्जर्व करना शुरू किया और जिस - जिसको अभय ने नुकसान पहुंचाना चाहा , उन सभी को मैंने वक़्त रहते आगाह कर दिया था। "
" और इसी बीच तुम कुछ लड़कियों के संपर्क में आये ,, जिनमें से एक लड़की रिचा भी थी ! "
" हाँ और उसे भी मैंने चेतावनी दी थी , लेकिन उसने मेरी बात को सीरियस नहीं लिया। "
" तुम कहते हो कि अभय एक असामाजिक तत्व है , जो हर किसी को नुकसान पहुंचाता रहता है और अभय जिस किसी को अपना टारगेट बनाता है , उसे तुम पहले ही सचेत कर देते हो। इसी वजह से तुम शुरू से ही अभय को ऑब्जर्व कर रहे हो !...मेरा सवाल यह है कि तुम अभय से सीधे क्यों नहीं टकराते हो। "
" आप चाहते हैं कि मैं सीधा ही उससे भिड़ जाऊँ और कहूँ कि आ बैल मुझे मार ? "
" तुमने खुद कहा है कि तुम समाज सुधारक हो। "
" समाज सुधारक होने का अर्थ यह नहीं है कि हम सड़क पर उतरकर किसी से भी मारपीट करने लगे।...मैं बेहद शांत तरीके से अपना काम करता हूँ , इस तरह से कि सांप भी मर जाये और लाठी भी ना टूटे। "
" तो अभय से तुम्हारी कोई व्यक्तिगत दुश्मनी नहीं है ? "
" नहीं ! " - सौरभ दृढ़तापूर्वक बोला - " अभय मेरा दुश्मन है , क्योंकि वो समाज दुश्मन है। "
" जानते हो ऐसे दुश्मन को क्या कहते हैं ? "
" क्या ? "
" जानी दुश्मन ! " - साकेत बोला - अभय तुम्हारा जानी दुश्मन है। "
सौरभ मुस्कराया - " आप बिल्कुल सही है। "
" ठीक है , मिस्टर सौरभ ! " - साकेत बोला - " चलता हूँ। मुझे उम्मीद थी कि तुमसे काफी जानकारी हासिल हो पाएगी। "
" आपके सभी सवालों के ठीक - ठीक जवाब देने की कोशिश की है मैंने। " - सौरभ बोला - " फिर भी कोई और सवाल रह गया हो तो आप पूछ सकते हैं। "
" सवाल तो सिर्फ एक ही है सौरभ !...रिचा का कत्ल किसने किया ? " - साकेत ने सीधे सौरभ की आँखों में देखते हुए पूछा।
" यकीन मानिए , मैं नहीं जानता। लेकिन , जानना जरूर चाहता हूँ। उम्मीद है आप जल्द ही पता लगा लेंगे। "
साकेत कुछ नहीं बोला।
उसने सौरभ से विदा ली।
जल्द ही साकेत की कार सड़कों पर दौड़ रही थी।
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