मर्डर ऑन वेलेंटाइन नाइट - 31

मर्डर ऑन वेलेंटाइन नाइट - 31

 " काव्या ने भरपूर कोशिश की। लेकिन वो रिचा की जगह कभी नही ले सकी। " - पलक बता रही थी - " इंसान चाहे जितनी भी कोशिश कर ले , पहला प्यार हमेशा के लिये स्थायी होता है और उसकी जगह कोई दूसरा नही ले सकता। "

" और सौरभ ? " - साकेत ने पूछा - " उसका क्या मैटर था ? "

" मैं इतनी इंटेलीजेंट होती , तो किसी अच्छे से कॉलेज में बायो या मैथ पढ़ रही होती। "

" क्या मतलब ? "

" सौरभ बड़ी पहुंची हुई चीज है। " - पलक बोली - " वो कब क्या करता है , कोई नही समझ सकता। "

" लेकिन , तुमने बताया कि कॉलेज में सब उसे सनकी और पागल समझते हैं ? "

" हाँ , ये सच है। अपनी हरकतों से लगता तो वह पागल ही है। लेकिन , वह जो दिखता है , वो है नही और जो हकीकत में वो है , उसे समझना हर किसी के बस की बात नही है। "

" तो तुम्हें क्या लगता है , उसके और रिचा के बीच मे कुछ था या नहीं ? "

" कुछ था तो सही। " - पालक सोचते हुए बोली - " लेकिन , प्यार ही था या कुछ और ?....कहा नहीं जा सकता। "

" ठीक है। क्या तुम मुझे सौरभ , अभय और शुभम का मोबाइल नंबर और एड्रेस बता सकती हो ? "

" हाँ , बता सकती हूँ। लेकिन , शुभम से आपको क्या लेना - देना ? ....मुझे लगता नही कि शुभम जैसा लड़का कभी कोई

मक्खी भी मार सकता है ! "

" अक्सर जो कुछ नही कर सकता , वही सब कुछ कर देता है। "

" ठीक है , मुझे क्या। मैं तो दे ही दूंगी। " - एक ब्लेंक पेपर पर तीनों के नाम , एड्रेस और मोबाइल नंबर लिखते हुए पलक बोली - " आप बस असली रिंग चोर का पता लगा लीजिये , ताकि मेरी बहुत बड़ी प्रॉब्लम सॉल्व हो सके। "

" कोशिश पूरी करूंगा। "

पलक ने जल्द ही अपना काम पूरा करके पेपर साकेत की ओर बढ़ाया।

" थैंक्स ! " - कहते हुए साकेत ने पलक से विदा ली।


□  □  □


5 बज चुके थे।

साकेत कार ड्राइव कर रहा था।

माइंड में अभय , सौरभ , शुभम , काव्या और आकाश घूम रहे थे।

" रिंग किसने चुरायी होगी ?....अभय रिचा को नुकसान पहुंचाना चाहता था....क्यों ? ....कहीं ऐसा तो नहीं कि वह भी रिचा से प्यार करता हो ?....और सौरभ ?....एक ऐसा शख्स , जिसे किताबों के अलावा किसी से कोई मतलब नहीं रहता , उसको रिचा की इतनी फिक्र क्यों थी ? "

साकेत के मस्तिष्क में सवालों के झंझावात उठ रहे थे।

जवाब जानने की तलब बढ़ती जा रही थी।

लेकिन , जवाब थे कहाँ ?

थे तो सिर्फ सवाल !

अपने सवालों का जवाब जानने के लिए वह हर बार एक नए शख्स से मिल रहा था। उसकी हर नयी मुलाकात , एक नए सवाल को जन्म दे रही थी , लेकिन जवाब... जवाब एक भी सवाल का नही मिल पा रहा था और यही वजह थी कि उसके पास सवाल तो ढेरों थे , लेकिन जवाब एक भी सवाल का नही था।

और अब सबसे बड़ा सवाल , जो सवाल न होकर एक तरह का यक्ष प्रश्न था कि आकाश ने यह क्यों कहा था कि उसे रिंग चोरी के मैटर में फंसाने की कोई ठोस वजह अगर किसी के पास थी , तो सिर्फ पलक के पास थी ?....क्या वजह थी वो ?...आकाश के मुताबिक इस सवाल का जवाब पलक ही दे सकती थी। लेकिन पता नही क्यों , न तो पलक ने इसके बारे में कुछ बताया और न ही साकेत पलक से इस बारे में कुछ पूछ पाया।....शायद इसलिये , क्योकि साकेत अच्छी तरह से जानता था कि पलक इस बारे में बात करने से बचना चाहेगी या फिर बात कर भी लेगी , तो सच छिपाने का प्रयास जरूर करेगी।

कुछ ही समय बाद कार एक घर के सामने रुकी।

साकेत ने कॉलबेल बजायी।

कुछ समय की प्रतिक्षा के बाद गेट खुला।

साकेत के सामने करीब 21 वर्षीय नौजवान प्रकट हुआ।

" मैं जानता था , मुझे आपके पास आने की जरूरत नही पड़ेगी , आप खुद ही मुझे ढूंढते हुए यहाँ आ जाओगे। " - सौरभ ने भीतर आने का संकेत करते हुए कहा।

साकेत एक पल के लिए ठिठका। 

फिर , जल्द ही खुद को संभालते हुए घर के भीतर दाखिल हुआ।

साकेत ने देखा , बाहर से सामान्य सा दिखने वाला वह घर भीतर से काफी बड़ा था।

" तुम मेरे पास किसलिये आना चाहते थे ? " - साकेत ने पूछा।

" आप बताईये , आप किसलिये आये हैं ? "

साकेत चौंका।

उदयपुर शहर के मशहूर डिटेक्टिव साकेत अग्निहोत्री ने जब भी किसी से कोई सवाल किया है तो उसे जवाब मिला है। 

लेकिन , आज पहली बार साकेत को सवाल के बदले जवाब ना मिलकर वही सवाल फिर से मिला था।

साकेत को थोड़ा बुरा तो लगा था। लेकिन , चेहरे से उसने कुछ जाहिर नहीं होने दिया।

" तुम्हारे कॉलेज की एक लड़की का कत्ल हुआ है। "

" तो ? " 

" उसके बारे में कुछ पूछताछ करनी है। "

" पूछिये। "

" यूँ ही खड़े - खड़े ? "

" अरे ! इतना बड़ा घर है। सोफे पर बैठकर आराम से पूछताछ करिये। "

वे हॉल में पहुंचे।

वहीं रखे एक सोफे की ओर संकेत करते हुए सौरभ बोला - " बैठिये। "

साकेत बैठा।

" अब इत्मीनान से पूछिये , क्या पूछना चाहते हैं आप ? “


Post a Comment

1 Comments

  1. आपकी लिखी रचना ब्लॉग "पांच लिंकों का आनन्द" पर सोमवार 16 फ़रवरी 2026 को लिंक की गयी है....

    http://halchalwith5links.blogspot.in
    पर आप सादर आमंत्रित हैं, ज़रूर आइएगा... धन्यवाद!

    !

    ReplyDelete