उस बारिश के बाद - 33
अंकिता के हृदय की गति इस समय सामान्य से कई गुना ज्यादा बढ़ चुकी थी। उसके हाथ में मोबाइल था। वॉट्सएप ओपन था और निगाहें मोबाइल स्क्रीन पर टिकी हुई थी। उसे ब्लैकमेलर के msg का इंतजार था। वह msg, जिसमें वह कोई ऐसा वीडियो भेजने वाला था, जिससे अंकिता को उसकी कही उस बात पर विश्वास हो जाता, जिस पर कि यकीन कर पाना उसे बिल्कुल ही असंभव लग रहा था।
उसे ज्यादा इंतजार नहीं करना पड़ा। जल्दी ही जिस अननोन नंबर से उसे कॉल आया था, उसी नंबर से अपने वॉट्सएप पर उसे एक वीडियो msg मिला। उसने जल्दी से वीडियो प्ले किया। उसे देखकर उसकी आँखें आश्चर्य से चौड़ी होती चली गई।
ब्लैकमेलर का कॉल फिर से आया।
“अब तो तुमको यकीन हो ही गया होगा कि जो भी कुछ मैंने कहा है वो सब सच है।” - वह शख्स बोला।
“हां।” - बड़ी ही मुश्किल से बोल पा रही थी अंकिता।
“गुड!” - ब्लैकमेलर की आवाज में खुशी की झलक थी - “तो, क्या फैसला किया तुमने ?... वैसे, अगर तुम सौरभ से सच्चा प्यार करती हो तो मेरे विचार से तुम मेरी दोनों ही शर्तें जरूर मान लोगी।”
“तुम.. तुम ये सब क्यों कर रहे हो ?.. क्यों हमारी हंसती - खेलती जिन्दगी को तबाह करना चाहते हो ?... आखिर तुम हो कौन ?” - कहते हुए रो ही तो पड़ी थी अंकिता।
“तुमसे मुझे कुछ लेना - देना नहीं है। रही बात ये सब करने की, तो इतना समझ लो कि इन सबकी वजह सौरभ है।”
“सौरभ!”
“हां। और ये तुम्हारी बदकिस्मती ही है कि तुम सौरभ की लाइफ से जुड़ी हुई हो। तुमको इस वक्त जो तकलीफ हो रही है, उसका मुझे बड़ा अफसोस है। लेकिन, इस सबकी वजह सौरभ ही है।”
“तुम क्या कहना चाहते हो ?... साफ - साफ कहो।”
“इस दुनिया में मेरा कोई सबसे बड़ा दुश्मन है, तो वो है, सौरभ!.. मैं उसे टूटते देखना चाहता हूं, बिखरते देखना चाहता हूं और ऐसा तभी हो सकेगा, जब उसका प्यार उसकी आंखों के सामने उसके दोस्त की बांहों में चला जाएगा।”
“क्या!” - ब्लैकमेलर की खतरनाक योजना को सुनकर अंकिता घोर आश्चर्य में पड़ गई - “लेकिन, ऐसी क्या दुश्मनी है तुम्हारी सौरभ से! और सौरभ तो बहुत अच्छा इंसान है। उसने भला तुम्हारा क्या बिगाड़ा है ?”
अंकिता के इस सवाल पर उसे ब्लैकमेलर की तेज हँसी सुनाई दी।
“तुम बहुत चालाक हो। तुम मेरे बारे में सब कुछ जान लेना चाहती हो। लेकिन, जान नहीं पाओगी और अब जो शर्तें मैंने रखी है, उनको जल्दी पूरा करो। तुम्हारे पास कल शाम तक का वक्त है। कल शाम तक सौरभ को ये यकीन हो जाना चाहिए कि तुम और आकाश एक दूसरे से प्यार करते हो। अगर ऐसा नहीं हुआ तो मुझे ये वीडियो वायरल करने में एक पल भी नहीं लगेगा।” - कहने के साथ ही ब्लैकमेलर ने कॉल कट कर दी।
अंकिता के हाथ से मोबाइल छूटकर बेड पर ही गिर गया। उसकी आंखों से आंसुओं की नदी सी बहने लगी। वह बेड पर अपने घुटने मोड़कर बैठ गई।
इस समय उसके दोनों हाथों की हथेलियां उसके मूंह पर थी। जोर - जोर से सिसकियां भरते हुए वह लगातार रोए जा रही थी। इस प्रक्रिया में उसका पूरा शरीर बुरी तरह से कांप रहा था।
इस समय उसे ऐसा लग रहा था, जैसे कि वह इस पूरी दुनिया में अकेली, बिल्कुल अकेली है!... उसे ऐसा कोई भी शख्स याद नहीं आ रहा था, जिसके सामने वह दिल खोलकर रो सके। ऐसा कोई नहीं था, जिसे वह अपनी तकलीफ बता सके।
एक सौरभ ही तो था, जिससे वह अपना हर सुख - दुःख, हर तकलीफ शेयर किया करती थी। लेकिन, आज जो तकलीफ उसे झेलनी पड़ रही थी, उसके बारे में वह सौरभ को नहीं बता सकती थी।
ऐसे समय में उसे सिर्फ एक ही शख्स का खयाल आया और वह था, आकाश!
“हां, आकाश!... मैं आकाश को बता सकती हूं।” - अंकिता ने सोचा - “वैसे भी मुझे आकाश को तो बताना ही पड़ेगा।”
अंकिता ने आकाश का नंबर मिलाया और जो कुछ भी उसके साथ हुआ था, वो सब विस्तार से बताया।
“य.. ये तुम क्या कह रही हो अंकिता!” - सारी बात सुनकर आकाश बोला - “भला कोई ऐसे ब्लैकमेल कैसे कर सकता है। हमें पुलिस के पास जाना चाहिए।”
“नहीं आकाश! ऐसा किया तो वह वीडियो वायरल कर देगा और फिर सौरभ!.. सौरभ को जब उस वीडियो के बारे में पता चलेगा, तो वह तो बिल्कुल ही टूट जाएगा।”
“तो, अब तुम क्या चाहती हो ?”
“पता नहीं।” - अंकिता हताशा भरे स्वर में बोली - “लेकिन, फिलहाल तो उस ब्लैकमेलर की बात मानने के अलावा और कोई रास्ता समझ नहीं आ रहा।”
“क्या!” - आकाश चकित स्वर में बोला - “ये तुम क्या कह रही हो ?... तुम जानती भी हो, इसका अंजाम क्या होगा!... हम सबकी जिंदगियां बिखर जाएगी!”
“जानती हूं। लेकिन, हमारे पास और कोई रास्ता भी तो नहीं है।…तुम मेरा साथ दोगे ना आकाश ?”
“मुझे ये ठीक तो नहीं लग रहा है। लेकिन, सौरभ मेरा बेस्ट फ्रेंड है और उसके लिए मैं कुछ भी कर सकता हूं। इसीलिए मैं वो सब करूंगा, जो उसके लिए सही है।”
***
रात के 10 बज चुके थे।
उस पब में लोगों की भीड़ के साथ ही शोर भी काफी बढ़ चुका था। अंकिता और आकाश एक - दूसरे की बांहों में बाहें डाले इस तरह से डांस कर रहे थे, जैसे कि सिर्फ प्रेमी युगल ही कर सकते हैं।
सौरभ उन दोनों को यूं एक साथ देखकर आश्चर्य में पड़ गया। वह यकीन ही नहीं कर पा रहा था कि जो कुछ वह इस समय देख रहा था, वह सच भी था!
देखकर भी शायद वह विश्वास नहीं करता। लेकिन, जब उसने अंकिता को आकाश से वे तीन मैजिक वर्ड कहते सुना, तो उसका दिल हजार टुकड़ों में बंट गया।
कुछ ही देर बाद उसकी हालत ऐसी हो गई कि वह अपने पैरों पर खड़े रहने में भी असमर्थ था।
वो तो चंचल ने उसे संभालकर वहीं रखे एक सोफे पर बिठाया, नहीं तो वह तो फर्श पर ही गिर पड़ता।
***

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