उस बारिश के बाद - 31

 उस बारिश के बाद - 31

“क्या ?” - सौरभ ने उत्सुकता भरे स्वर में पूछा - “कितना कुछ तो दिखा चुकी हो पिछले तीन सालों में तुम मुझको!... अब और क्या दिखाना चाहती हो ?”

“सुनी - सुनाई बातें झूठी भी हो सकती है सौरभ!” - अंकिता किसी दार्शनिक की तरह बोल रही थी - “लेकिन, जो कुछ हम अपनी आंखों से देखते हैं, उस पर विश्वास करना थोड़ा सरल होता है।”

“तुम कहना क्या चाहती हो ?” - सौरभ लगभग चीखते हुए बोला - “जो कुछ कहना है, साफ - साफ और बात को घुमाए बिना कहो।”

“ठीक है। तो अब मैं सीधे उस बात पर आती हूँ, जो मैं पिछले तीन साल से तुमसे कहना चाह रही थी। लेकिन, कभी कह नहीं पाई। क्योंकि मुझे डर था कि उस बात को, उस सच को सुनकर तुम टूट जाओगे।…पर, सच्चाई छिपाने से भी टूट तो तुम गए ही हो! इसीलिए मैंने फैसला कर लिया है कि आज मैं तुमको वो सच्चाई बताकर ही रहूंगी, जिसको छिपाने की वजह से तुम टूटकर बिखर गए, मैं तुम्हारी नजरों से हमेशा - हमेशा के लिए गिर गई और तुम्हारा बेस्ट फ्रेंड आकाश तुम्हारा सबसे बड़ा दुश्मन बन गया।”

“क्या है वो सच्चाई!... बोलो भी अब!”

“बताती हूँ लेकिन, उससे पहले मैं जो दिखाना चाहती हूं, वो बिना आवेशित हुए, बिना गुस्सा किए बड़ी ही शान्ति से और ठंडे दिमाग से देखो और समझने की कोशिश करो।” - कहते हुए अंकिता ने अपने मोबाइल का स्क्रीन लॉक खोला।

मोबाईल में अंकिता ने तीन साल पहले की कॉल लॉग ओपन की। इसके बाद उसने मोबाइल की स्क्रीन सौरभ के सामने करते हुए कहा - “तीन साल पहले, जब तुमने हमेशा - हमेशा के लिए इस शहर को छोड़कर जाने का फैसला कर लिया था, उसके कुछ दिन पहले ही मुझे अननोन नंबर से एक कॉल आया था। कॉल करने वाले ने जो कुछ मुझसे कहा था, उस पर मैंने बिल्कुल भी यकीन नहीं किया। क्योंकि यकीन करने लायक वो बात थी भी नहीं।…लेकिन, जब उसने मेरे वॉट्सएप पर एक वीडियो भेजा, तब मैं उसकी बात पर यकीन करने के लिए मजबूर हो गई।”

सौरभ ने वह कॉल लॉग देखी। अंकिता जिसे अननोन नंबर बता रही थी, उसका नंबर उसने 'ब्लेकमेलर'  के नाम से सेव कर रखा था। उस कॉल लॉग के मुताबिक उस नंबर पर अंकिता के मोबाइल से सिर्फ दो ही बार बात की गई थी। दोनों ही बार बात 27 दिसंबर, 2022 को हुई थी। पहली कॉल सिर्फ 1 मिनट 22 सेकंड तक चली थी, जबकि दूसरी कॉल करीब 15 मिनट तक चलती रही थी।

“ये था कौन और तुमने इसका नंबर ब्लैकमेलर के नाम से क्यों सेव कर रखा है ?” - आश्चर्य चकित होते हुए सौरभ ने पूछा।

“ये कौन था, यह तो मैं आज तक नहीं जान पाई और रही बात इसका नंबर ब्लैकमेलर के नाम से सेव करने की, तो ऐसा मैने इसलिए किया था, क्योंकि इस शख्स का मुझे कॉल करने के पीछे उद्देश्य ही मुझे ब्लैकमेल करना था।”

“कितने रुपयों की डिमांड की थी इसने ?” 

सौरभ के सवाल से अंकिता के चेहरे पर व्यंग्य भरी मुस्कान उभर आई।

“आमतौर पर जब कोई किसी को ब्लैकमेल करता है तो उसका एक ही उद्देश्य होता है - ढेर सारे रुपए हासिल करना। लेकिन, इस शख्स ने ऐसा कुछ नहीं किया। मुझे ब्लैकमेल करने के पीछे इस शख्स का उद्देश्य रुपए हासिल करना नहीं था।”

“फ़िर ?”

“इसका उद्देश्य बड़ा खतरनाक था। इतना खतरनाक कि कोई सोच भी नहीं सकता।”

“क्या ?... क्या चाहता था वो ?”

“तकलीफ देना चाहता था वो। दर्द पहुंचाना चाहता था, दुःख और कष्ट पहुंचाना चाहता था।”

“तब तो वह जरूर कोई ऐसा शख्स रहा होगा, जिसकी तुमसे कोई दुश्मनी रही होगी।”

“हां, यह सच है कि उसकी दुश्मनी रही थी। दुश्मन ही था वो। लेकिन मेरा नहीं, तुम्हारा!”

“क्या ? मेरा दुश्मन ?.... ये तुम क्या कह रही हो!” - बुरी तरह से चौंक पड़ा था सौरभ।

“वही जो सच है। तुम हमेशा से जानना चाहते थे ना कि मेरे और आकाश के बीच अचानक प्यार कैसे पनप गया !... कल तक जो तुम्हारा दोस्त हुआ करता था, वही तुम्हारी गर्लफ्रेंड को तुमसे क्यों छीन ले गया!... बताऊंगी सौरभ! आज मैं तुमको सब कुछ बताऊंगी।” - कहते - कहते रो ही तो पड़ी थी अंकिता - “उस ब्लैकमेलर की वजह से तुम्हारे साथ - साथ मैंने और आकाश ने भी कितना दर्द सहा है, सब कुछ बताऊंगी आज। तीन साल पहले दिल पर पत्थर रखकर जो फैसला मैंने लिया था, उसकी सजा आज तक भुगत रही हूं मैं। वो क्या फैसला था और उस ब्लैकमेलर की वजह से कैसा गंदा खेल शुरू करना पड़ा था मुझे…सब बताऊंगी सौरभ! आज तुमको मैं सब सच - सच बताऊंगी।”

इसके बाद अंकिता सौरभ को वो सब बताने लगी, जो तीन साल पहले घटित हुआ था और जिसकी वजह से न केवल उसकी बल्कि आकाश और सौरभ की जिन्दगी भी उलझकर रह गई थी।…सौरभ गलतफहमियों का शिकार हुआ था, आकाश ने अपना बेस्ट फ्रेंड खोया था और उसने अपनी जिन्दगी, अपने प्यार सौरभ को खो दिया था।

***


Post a Comment

0 Comments