उस बारिश के बाद - 30

 उस बारिश के बाद - 30

माउन्ट आबू ट्रिप से सौरभ अकेला नहीं लौटा था। अब उसके 5 नए दोस्त थे और सबसे ज्यादा बेस्ट फ्रेंड थी - संजना!

अंकिता और आकाश से धोखा मिलने के बाद इस शहर में पहली बार उसने एक साथ 5 नए दोस्त बनाए थे। 

हां, जबलपुर में उसके कुछ दोस्त जरूर थे। लेकिन उनमें से ज्यादातर तो उसके कलीग ही थे। 

सौरभ को अब ऐसा लग रहा था जैसे कि उसका फिर से नया जन्म हुआ हो। अक्सर उदास रहने वाले सौरभ के चेहरे पर खुशी दिखाई देने लगी थी।

उसके मां - पापा भी उसे खुश देखकर बहुत खुश थे। 

लेकिन, यह खुशी अधिक समय तक रुकने वाली नहीं थी।

सौरभ जिस दिन ट्रिप से लौटा था, उसी दिन दोपहर में उसके मोबाइल पर अंकिता का कॉल आया।

मोबाईल पर एक निगाह पड़ते ही सौरभ के चेहरे पर क्रोध की रेखाएं उभरी। न चाहते हुए भी उसने कॉल पिक की।

“हैलो!” - सौरभ की हैलो सुनने के बाद अंकिता ने जो बोलना शुरू किया तो वो तभी रुकी, जब उसकी बात पूरी हो गई।

कॉल पर अंकिता ने जो कुछ कहा, था वो बड़ा ही धमाकेदार। क्योंकि अंकिता की बात सुनने के बाद सौरभ के लिए एक पल भी और रुकना मुश्किल हो गया। 

वह जल्दी से उठा और जितनी तेजी से भाग सकता था, भागते हुए सीढ़ियां उतरकर नीचे पहुंचा। अपनी उसी तेज गति से भागते हुए वह घर के पोर्च के पार्किंग एरिया में खड़ी कार की तरफ बढ़ा।

कार स्टार्ट करके उसने आगे बढ़ाई। आयरन गेट पर खड़ा गार्ड कार की तेज स्पीड को देखकर थोड़ा घबरा गया। जल्दी से उसने गेट खोला। गेट खोलने में वह एक पल की भी और देरी कर देता तो शायद कार गेट से टकरा ही जाती!

“ये बड़े लोगों के ढंग भी अजीब होते हैं।” - तेज गति से सड़क पर भागी जा रही कार को हैरत से देखते हुए गार्ड सोच रहा था - “छोटी - छोटी बातों पर भी ऐसे गाड़ी भगाने लगते हैं, जैसे जिन्दगी और मौत के बीच कोई जंग लड़नी हो।”

गार्ड ने सोचा तो ये मजाक में ही था। लेकिन, सौरभ के लिए ये मजाक की बात बिल्कुल भी नहीं थी। अंकिता ने फोन पर जो कुछ कहा था, उसके बाद सौरभ के लिए तो जिन्दगी और मौत के बीच एक तरह की जंग शुरू हो ही चुकी थी।

तेजी से हॉर्न बजाते हुए और सड़क पर कार को दाएं से बाएं और बाएं से दाएं लहराते हुए सौरभ कार को दौड़ा रहा था। रास्ते में आने वाले हर तरह के वाहन से जैसे रेस करता हुआ वह आगे बढ़ता जा रहा था।

शहर के बाहर के जिस एरिए में उसे पहुंचना था, वहां तक पहुंचने में उसे पूरे 30 मिनट लग गए। ये वही जगह थी, जहां पर अंकिता से वह पिछली बार मिला था।

पिछली बार की ही तरह इस बार भी अंकिता वहां पहले से ही मौजूद थी। उसे देखते ही सौरभ ने तेजी से ब्रेक लगाकर कार रोकी और तेज गति से ड्राइविंग सीट का गेट खोलकर बाहर निकला।

इस समय सौरभ की सांस बहुत तेज गति से चल रही थी और वह काफी सीरियस दिखाई दे रहा था। 

अंकिता की पीठ उसकी तरफ थी। उसने येलो कलर का सिम्पल सा सलवार सूट पहन रखा था। उसके हाथ में मोबाइल फोन था। उसे देखकर ऐसा लग रहा था, जैसे कि वह किसी गहरे विचार में खोई हुई हो।

“अंकिता!... तुम…तुम फोन पर ये क्या बोल रही थी!” - सौरभ आवेश भरे स्वर में बोला - “मैं विश्वास नहीं कर सकता और तुमको गलत साबित करने के लिए ही मैं यहां आया हूं। मैं कभी सोच भी नहीं सकता था कि तुम इतना गिर सकती हो!”

“तुमको जो करना है वो कर लेना।” - अंकिता पलटकर सौरभ की तरफ बढ़ते हुए बोली - “मैं जानती हूं कि आज जो मैं तुम्हें बताने जा रही हूं, उस पर विश्वास कर पाना तुम्हारे लिए असम्भव होगा और तुमने विश्वास कर भी लिया , तब भी तुम टूट जाओगे, टूटकर बिखर जाओगे।”

“कितना टूटूंगा और…कितना बिखरूंगा और…” - सौरभ एक - एक शब्द पर जोर देते हुए बोला - “पिछले तीन सालों से टूट ही तो रहा हूं…बिखर ही तो रहा हूं। तुमने और आकाश ने मिलकर जो घाव दिए है मुझे, अभी वे ठीक से भरे भी नहीं थे कि तुमने फिर से मुझे नए घाव देने की तैयारी कर ली! मैं नहीं जानता कि तुम ये सब क्यों और किस उद्देश्य से कर रही हो!”

“आज सारी गलतफहमी दूर हो जाएगी सौरभ!” -  अंकिता बोली - “तुम्हें टूटते और बिखरते नहीं देखना चाहती थी, इसीलिए तो मैंने तुमको कभी सच्चाई बताई ही नहीं। लेकिन, अब जबकि तुम्हारी लाइफ तबाही की ओर जाती ही जा रही है, तो ये मेरा कर्तव्य भी हो गया है और मजबूरी भी कि मैं तुमको वो कड़वी सच्चाई बता ही दूं, जिसकी वजह से मुझे खुद को तुमसे दूर कर लेना पड़ा, आकाश के साथ प्यार का नाटक करना पड़ा, तुम्हारी, मेरी और आकाश - तीनों की ही जिंदगी और रिश्तों को तबाही के कगार तक ले जाना पड़ा।”

“ये बार - बार तुम किस सच्चाई का राग अलाप रही हो!” - सौरभ चिल्लाते हुए बोला - “जरा मैं भी तो सुनूं कि आखिर ऐसा कौनसा सच है, जिसे जानने के बाद मैं टूटकर बिखर जाऊंगा!”

“बताऊंगी। पिछले तीन सालों से जिस सच्चाई को एक राज की तरह मैंने छिपाकर रखा हुआ है, आज वो सच्चाई मै तुमको बताऊंगी। लेकिन, पहले मैं तुम्हें कुछ दिखाना चाहती हूँ।”

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