उस बारिश के बाद - 28

 उस बारिश के बाद - 28

पहाड़ से नीचे आते - आते सौरभ और संजना को 10 बज चुके थे। 


“कैसी अजीब बात है।” - संजना बोली - “अब मौसम भी साफ है और धूप भी निकल आई है। लग ही नहीं रहा कि कुछ देर पहले यहां कितनी तेज बारिश आई थी!”


“हां। सही कह रही हो।” - सौरभ ने कहा - “तो अब चलें।”

“हां।”


“ये मॉर्निंग वॉक मुझे हमेशा याद रहेगी।” - सौरभ बाइक पर बैठते हुए बोला।


“अच्छा! पर क्यों ?”


“एक तो यह मेरे लाइफ की पहली ऐसी मॉर्निंग वॉक थी, जो मैंने बाइक पर की और दूसरी बात पहाड़ पर बारिश में यह मॉर्निंग वॉक हुई।”


सौरभ की बात पर संजना खिलखिलाकर हँस पड़ी।

संजना की हँसी की आवाज सौरभ को दुनिया के किसी भी मधुर संगीत से ज्यादा सुरीली लगी।


बाइक स्टार्ट करते हुए सौरभ ने पहला गियर डाला और बाइक आगे बढ़ा दी।


कुछ ही समय बाद वे शहर के भीड़ भरे एरिया में आ गए।


एक रेस्टोरेंट को देखकर संजना बोली - “मॉर्निंग वॉक के बाद भूख भी लग आई है।.. चलो कुछ खाया जाए।”


सौरभ ने बाइक उस रेस्टोरेंट के सामने रोकी।


***


“मैंने सोच लिया आकाश!” - अंकिता दृढ़ निश्चय के साथ कह रही थी - “मैंने अब सोच लिया है कि मुझे क्या करना है!”


“क्या!... क्या सोच लिया तुमने ?... क्या करने वाली हो अब ?”


“आकाश! सौरभ को मैं अब वो सच्चाई बताने जा रही हूं, जो मैंने उसे पिछले तीन सालों से चाहते हुए भी नहीं बताई।…मुझे लगा था कि शायद सौरभ उस सच को सुन नहीं पाएगा और सुन लिया तो यकीन नहीं कर पाएगा।…सच सामने आने पर वह पूरी तरह टूट जाएगा!.. कितनी बड़ी बेवकूफ थी मैं! उसे टूटने से बचाने के लिए उसकी, तुम्हारी और खुद की भी जिन्दगी तबाह हो जाने दी मैंने!... लेकिन, अब और नहीं…मुझे लगा था कि वक्त के साथ सब कुछ अपने आप ही ठीक हो जाएगा। लेकिन, नहीं, मैं गलत थी…कुछ ठीक नहीं हुआ। पर अब मैं सब ठीक कर दूंगी…अब सौरभ सच सुनकर या तो पूरी तरह आबाद हो जाएगा या फिर नेस्तनाबूद!” - कहते - कहते अंकिता फूट - फूटकर रोने लगी थी।


“रोने की जरूरत नहीं है अंकिता!... देर से ही सही, लेकिन मुझे पूरा यकीन है कि इस बार तुमने सही फैसला लिया है।” - आकाश बोला - “सौरभ को सच बताना बहुत जरूरी है। उसको सच बताए बिना हमारा उद्देश्य पूरा नहीं होने वाला।”


*** 


सौम्या ने ईशान के घर की बेल बजाई।


गेट खोलने में ईशान ने एक पल भी नहीं लगाया। 


“क्या बात है!” - सौम्या अपने चिर - परिचित खुशनुमा अंदाज में बोली - “बड़ी जल्दी डोर ओपन कर दिया।…कहीं तुम गेट के पास ही तो नहीं खड़े थे!”


ईशान बोला कुछ नहीं। उसने सौम्या का हाथ पकड़ा और उसे की तरफ खींचकर गेट फिर से बन्द कर दिया।


सौम्या तो कुछ समझ ही नहीं पाई। अगले ही पल ईशान ने उसे अपने करीब खींचकर बाहों में भर लिया।


“इतनी बेसब्री!” - सौम्या आश्चर्य भरे स्वर में बोली - “ईशान! ये प्यार ही है या कुछ और!”


“ये तो मैं नहीं जानता।” - ईशान गहरी साँस लेते हुए बोला - “लेकिन, इतना तय है कि जब से तुम मिली हो, तुम्हारी अदाओं ने मुझे पागल बना दिया है।.. तुम्हारे बिना अब मैं एक पल भी नहीं रह सकता!”


ईशान ने जो कहा था, उससे सौम्या को एक पल के लिए तो अपने कानों पर यकीन ही नहीं हुआ। लेकिन, जल्दी ही उसे एक तरह की खुशी महसूस होने लगी।


“ईशान मुझसे प्यार करने लगा है।” - सौम्या सोच रही थी - “मैं कितनी खुशनसीब हूं, जो ईशान जैसा हैंडसम लड़का मेरी लाइफ में है!”


“तुम मजाक तो नहीं कर रहे ना ईशान!” - सौम्या ने ईशान के बालों में अंगुलियां फिराते हुए थोड़ा इमोशनल होकर पूछा।


“बिल्कुल नहीं!.. एक डॉक्टर बड़ा सीरियस किस्म का प्राणी होता है।” - ईशान ने सौम्या की नेक पर अपने होंठ रखते हुए कहा - “मैं हरदम तुम्हारी बाहों में रहना चाहता हूं।”


“इसका तो एक ही तरीका है।” - सौम्या अपना सिर ऊपर छत की तरफ उठाते हुए बोली।


“क्या ?” 


“हमें जल्दी से शादी कर लेनी चाहिए। फिर हमें कभी एक - दूसरे से अलग नहीं होना पड़ेगा।”


“हां। मैं जल्दी ही अपने घर वालो से इस बारे में बात करता हूं।” - कहते हुए ईशान के हाथ सौम्या के व्हाइट चेक्स वाले शर्ट के ऊपरी दो बटन खोलने में सफल हो गए और उसका सिर सौम्या के सीने में अपना सुकून ढूंढने लगा।


सौम्या भी अपने हाथों से ईशान का सिर थामकर उसे अपने सीने में धकेलने लगी।


दोनों के ही डगमगाते कदम आहिस्ता - आहिस्ता हॉल से बेडरूम की तरफ बढ़ने लगे। 


कुछ ही समय बाद वे ईशान के बेड पर थे। जब ईशान सौम्या के शर्ट के बाकी बटन भी खोल चुका, तो सौम्या ने शर्ट को अपने तन से अलग कर दिया।


ईशान का सिर सौम्या के सीने से फिसलते हुए उसकी नाभि तक आ पहुंचा था। 


सौम्या जल बिन मछली की तरह तड़प रही थी। ईशान के हाथ उसकी जीन्स के बटन पर शिरकत करने लगे थे।


“ईशान!.. ये नहीं!” - सौम्या के प्रतिरोध का ईशान पर कोई असर नहीं हुआ।


इसके बाद जो कुछ हुआ, उस पर न तो ईशान का कोई नियंत्रण रह गया था और न ही सौम्या का!


***


Post a Comment

0 Comments