उस बारिश के बाद - 23
सौम्या को घर पहुंचते - पहुंचते रात के 2 बज गए थे।
“बेल बजाना बेकार है। संजना गहरी नींद में सोई होगी।” - सोचते हुए सौम्या ने संजना को कॉल किया।
कॉल जल्द ही रिसीव हुई।
“संजू गेट खोल!” - सौम्या मोबाइल में बोली ही थी कि गेट खुल भी गया।
“बड़ी जल्दी दरवाजा खोल दिया। सोई नहीं क्या अभी तक ?” - सामने संजना को देखते ही सौम्या बोली।
“नींद नहीं आ रही थी तो बस हॉल में ही सोफे पर बैठी थी।” - कहते हुए संजना गेट से एक तरफ हटी।
भीतर आकर सौम्या ने गेट बन्द किया।
“मेरी चिंता तो नहीं हो रही थी !” - सौम्या बोली।
“अरे, नहीं। ये बात नहीं है।”
“फिर ?”
“कुछ नहीं।…वैसे अब तू आ गई है तो नींद भी आ ही जाएगी।”
सौम्या कुछ बोली नहीं। बस मुस्कुरा दी।
संजना जानती थी कि उसके दुलार की वजह से सौम्या थोड़ी लापरवाह हो गई थी। इसमें वह अपनी गलती मानती भी थी। लेकिन, बिन मां - बाप के दोनों बहनें अपना जीवन जी रही थी और संजना, सौम्या को मां - बाप की कमी बिल्कुल महसूस नहीं होने देना चाहती थी।
***
सुबह के 10 बज चुके थे।
संजना और सौम्या ब्रेकफास्ट कर चुकी थी और अब वे दोनों ही अपने - अपने मुकाम पर पहुंचने के लिए तैयार थी।
संजना ऑफिस के लिए निकल रही थी और सौम्या कॉलेज के लिए।
“ओके! संजू! शाम को मिलते हैं।” - स्कूटी स्टार्ट करते हुए सौम्या बोली।
“ओके डियर!” - संजना बोली।
सौम्या ने आज व्हाइट कलर का टॉप और नेवी ब्लू जीन्स पहनी थी।
शहर की सड़कों पर आज ट्रैफिक कुछ ज्यादा ही था। ईशान के ख्यालों में खोई सौम्या को कुछ ही देर लगी कॉलेज तक पहुंचने में।
जयपुर के आर्ट्स कॉलेज के बड़े से आयरन गेट से प्रविष्ट होते हुए वह ड्राइव वे पर स्कूटी चलाते हुए वह पार्किंग प्लेस तक पहुंची।
वहां अपनी कॉलेज फ्रेंड्स से हाय - हैलो करते हुए सौम्या ने स्कूटी पार्क की। तरह - तरह के परिधानों में सजे - धजे कॉलेज स्टूडेंट्स हर तरफ दिखाई दे रहे थे। कहीं - कहीं कुछ स्टूडेंट्स ग्रुप बनाकर खड़े थे और बातें कर रहे थे। उन सबको देखते हुए सौम्या लेफ्ट शोल्डर पर अपना बैग रखे क्लासरूम की तरफ जा ही रही थी कि रास्ते में उसे अंकुर मिल गया।
अंकुर उसी की क्लास में पढ़ता था। वह एक डिसेंट और गुड नेचर वाला समझदार लड़का था।
“अरे, तुम किधर जा रहे हो ?” - अंकुर को देखते ही सौम्या बोली - “क्लास अभी शुरू नहीं हुई क्या ?”
“क्लास तो अभी शुरू नहीं हुई। लेकिन..” - अंकुर सौम्या को ध्यान से देखते हुए बोला।
“ऐसे क्या देख रहे हो ?” - अंकुर को अपनी तरफ घूरते देख सौम्या ने पूछा।
“कल रात तुम सनशाइन नाइट क्लब में थी ना ?” - अंकुर ने जैसे विस्फोट सा करते हुए कहा।
“तुम्हे उससे क्या !”
“मतलब वो तुम ही थी !”
“हां थी मैं वहां।…और इसमें इतना हैरान होने वाली क्या बात है! .. लड़कियों को नाइट क्लब में जाना अलाउ नहीं होता क्या!”
“ऐसी तो कोई बात नहीं है।”
“फिर ?”
“फिर!”
“अरे, ये पूछ क्यों रहे हो ?”
“अच्छा!.. वो!.. मैने देखा था ना तुमको वहां।”
“पर, मैंने तो तुमको नहीं देखा।”
“कैसी देखती !... तब तुम शायद सोई हुई थी।”
“क्या ?” - आश्चर्य से सौम्या की आँखें चौड़ी होती चली गई।
“दीवार के सहारे लगे एक सोफे पर लेटे देखा था तुमको मैने।” - अंकुर बोलते जा रहा था - “उसी सोफे पर तुम्हारी रेड शर्ट भी पड़ी देखी थी।”
“शट अप!” - सौम्या इतना जोर से चीखी कि आसपास के सारे स्टूडेंट्स की निगाह उसकी तरफ उठ गई।
“अब इतना ओवर रिएक्ट मत करो।” - अंकुर शान्त स्वर में बोला - “नहीं तो हर कोई यहां तुमसे तुम्हारे इस रिएक्शन की वजह पूछने लगेगा, तब क्या बताओगी सबको ?... कल रात जिस हालत में तुमको मैंने देखा, मुझे तो अभी तक भी यकीन नहीं आ रहा कि वह तुम ही थी!”
“देखो, तुम फालतू बकवास करना बंद करो। मैं तो तुम्हे बहुत अच्छा इंसान समझती थी। लेकिन, तुम तो ऐसी वाहियात बातें कर रहे हो कि…”
“सिर्फ बातें ही कर रहा हूं और बातें भी क्या! सिर्फ सच्चाई बयां कर रहा हूं।…मैं अच्छा इंसान हूं या नहीं, यह अभी के लिए इंपॉर्टेंट नहीं है।.. तुम क्या हो, ये इंपोर्टेंट है।.. मतलब, एक ऐसी लड़की, जिसके पीछे कॉलेज के कई लड़के दीवाने बने घूमते हैं। जो किसी को घास तक नहीं डालती।…उसे उस हालत में देखकर मैं तो बिल्कुल यकीन नहीं कर पाया।”
“ये मेरी लाइफ है और इसमें तुमको दखल देने की कोई जरूरत नहीं है!” - सौम्या फिर चिल्लाई।
“तुम्हारी बहन NGO में काम करती है ना!”
“तो ?”
“वह भी ऐसे ही लोगों की निजी जिन्दगी में दखल देती है ना!”
“वो लोगों की मदद करने के लिए ऐसा करती है। तुम्हारी तरह नहीं कि…”
सौम्या की बात सुनकर अंकुर मुस्कुराया।
“मैं भी तो वही करने की कोशिश कर रहा हूं।”
“क्या मतलब ?”
“रात को तुमको जिस हालत में मैने देखा था, मेरी जगह कोई और होता तो अब तक तुम्हारा वीडियो वायरल भी हो चुका होता, मैने तो बनाया तक नहीं।”
“तुम मुझसे ये सब क्यों कह रहे हो ? तुम चाहते क्या हो ?”
“सौम्या! तुम एक अच्छी इंसान हो। किसी से प्यार करना बुरा नहीं है। लेकिन, प्यार को सार्वजनिक करना खतरनाक हो सकता है।” - बोलते हुए अंकुर वहां से चला गया।
अंकुर ने जो कहा था, उसमें सच्चाई तो थी ही। साथ ही सौम्या के लिए चेतावनी भी थी। सच में उसे सावधान रहने की जरूरत थी।
***

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