मर्डर ऑन वेलेंटाइन नाइट - 32
" 14 फरवरी की रात को तुम्हारी क्लासमेट रिचा का कत्ल हुआ था। " - साकेत ने बताया - " मैं उसी केस की इन्वेस्टिगेशन कर रहा हूँ। "
" जानता हूँ। " - सौरभ बोला।
" फिर तो मेरा नाम भी जानते ही होंगे ? "
" हाँ। " - सौरभ बोला - " साकेत अग्निहोत्री….प्राइवेट डिटेक्टिव ! "
" बिना मेरे कुछ बताये तुम्हारा इतना ज्यादा जानना , तुम्हें शक के दायरे में ला खड़ा कर सकता है। "
" परवाह नहीं। " - सौरभ लापरवाही से बोला - " वैसे , आप खुद भी यहाँ कुछ जानने ही आये हैं और ऐसे में , जितनी ज्यादा जानकारी मुझे होगी , उतनी ही ज्यादा आप भी हासिल कर पायेंगे। "
" काफी इंटेलिजेंट हो। "
" बचपन से। "
' बचपन ' शब्द सुनते ही साकेत को अपना बचपन याद हो आया।
वह बचपन , जिसमे कदम रखते ही ' मंदबुद्धि ' का टैग उस पर खुदबखुद लग गया था।
लेकिन यह वक़्त अपने तकलीफदेह बचपन को याद करने का नहीं , बल्कि एक महत्वपूर्ण केस की छानबीन करने का था।
" रिचा को तुम कितने समय से जानते थे ? " - मस्तिष्क में उभर रहे विचारों को विराम देते हुए साकेत ने पूछा।
" करीब दो सालों से। "
" दोस्त थी तुम्हारी ? "
" नहीं। " - सौरभ बोला - " बस जान - पहचान थी , एज ए क्लासमेट। "
" मैंने तो कुछ और ही सुना है। "
" क्या ? "
" रिचा तुम्हारी दोस्त थी और न केवल दोस्त , बल्कि उससे भी कुछ ज्यादा ! "
सौरभ मुस्कराया - " को - एजुकेशन में ये सब आम बातें होती है।… अब अगर किसी से कभी - कभार थोड़ी बहुत बातचीत करने का मतलब दोस्ती या उससे भी कुछ ज्यादा निकाला जाये , तो यह तो ' मतलब ' निकालने वाले की ही गलती हुई ना ! "
" थोड़ी बहुत बातचीत ? " - साकेत बोला - " मैंने जो सुना है , उसे ' थोड़ी बहुत बातचीत ' तो कतई नहीं कहा जा सकता। विशेष तौर पर , उस स्थिति में जबकि मामला ऐसे लड़के का हो , जो खुद को हमेशा ' रिज़र्व जोन ' में रखना पसंद करता है ! "
" लगता है मेरे बारे में सारी जानकारी हासिल करने के बाद ही आप यहाँ आये हैं। अब ऐसे में , मैं आपसे कोई झूठ बोलूँगा तो आप उसे बड़ी ही आसानी से पकड़ लेंगे। " - सौरभ कुछ सोचते हुए बोला - " इस स्थिति में तो मेरे पास सिर्फ दो ही रास्ते बचते हैं , या तो मैं सिर्फ सच बोलूँ या फिर अपना मुँह बन्द रखूं। "
" सच ही बोलो तो बेहतर है , क्योंकि तुम किसी आम इंसान के सामने नहीं , डिटेक्टिव साकेत अग्निहोत्री के सामने बैठे हो। "
" मैं बस मजाक कर रहा था। जितना सच आप जानना चाहते हो , उससे ज्यादा ही आपको मैं बताऊंगा। "
" दैट्स गुड ! " - साकेत बोला - " इस घर में तुम अकेले रहते हो ? "
" हाँ। "
" तुम्हारे माता - पिता कहाँ रहते हैं ? "
" सॉरी ! " - सौरभ गंभीरता से बोला - " मैंने कहा था , या तो मैं सच बोलूँगा या चुप रहूँगा और आपके इस सवाल का जवाब मैं नहीं दे पाउँगा। "
" वजह ? "
" आपका परिवार कहाँ है ? "
" क्या ? "
" आपके माता - पिता ? "
" तुम्हें इससे क्या मतलब ! "
" ठीक इसी तरह , आपको भी मेरे निजी जीवन से कोई मतलब नहीं होना चाहिये। "
" तुम कोई पार्ट टाइम जॉब करते हो ? "
" नहीं। "
" फिर जीवन निर्वाह और पढ़ाई के लिए पैसा कहां से लाते हो ? "
" आप फिर पर्सनल हो रहे हैं सर !..आप यहां जिस काम के लिए आये हैं , उस पर फोकस करिये। "
" ओके ! तो रिचा के बारे में बताओ। "
" क्या ? "
" कॉलेज में रिचा का कोई दुश्मन था ? "
" जहाँ तक मुझे पता है , रिचा का कत्ल उसकी कॉलोनी के आस पास ही हुआ था , फिर आप इस मामले को कॉलेज से क्यो जोड़ रहे हैं ? "
" क्योंकि वारदात की रात वह अपने कॉलेज - फ्रेंड आकाश के साथ थी। "
" तो आपको आकाश से पूछताछ करनी चाहिये , मुझ पर ये मेहरबानी क्यों ? "
" मैं यह कर चुका हूँ। "
" तो कुछ पता चला ? "
साकेत मुस्कराया - " पता चला होता , तो यहाँ आने की जरूरत ही क्यों पड़ती ? "
" आकाश ने नही बताया रिचा के दुश्मन के बारे में कुछ ? "
" नहीं। उसे इस बारे में कोई जानकारी नहीं है। "
" होगी भी कैसे ! " - सौरभ व्यंग्य से मुस्कराया - " कभी - कभी बड़ा दुख होता है , उसके बारे में सोचकर। "
" दुख क्यों होता है ? "
" जीवन में उसने बस एक ही गलती की और वह भी इतनी बड़ी ! "
" कैसी गलती ? "
" प्यार करने की , रिचा से प्यार करने की। "
" प्यार करना गुनाह है ? "
" नहीं। प्यार करना गुनाह नहीं है , लेकिन किसी से सीरियसली प्यार करना बहुत बड़ा गुनाह है। "
" मैं समझा नहीं। "
" अरे , अग्निहोत्री सर ! " - सौरभ बिलकुल बेफिक्री से बोला - " इसमे ना समझने जैसा है ही क्या ! एक इंसान अपने पूरे जीवन में औसतन तीन लड़कियों से प्यार करता है। लेकिन , आकाश की गिनती उन दुर्लभ आशिकों में होती है , जिन्होंने ' तू नहीं तो कोई नहीं ' वाले फॉर्मूले को अपना सिद्धान्त वाक्य बना रखा है। "
" यह तो अच्छी बात है , इसमें बुराई ही क्या है। "
" आपकी नजर में हो सकती है यह अच्छी बात , मेरी नजर में तो मूर्खता है। "
" क्यों ? "
" इतिहास उठाकर देख लीजिये। " - सौरभ दार्शनिक की तरह बोला - " जिस - जिसने ' तू नही तो कोई नहीं ' वाले फॉर्मूले को अपनाया है , उन सबने अपनी लाइफ में अनगिनत दुःख और तकलीफें उठायी हैं और जो ' तू नहीं तो कोई और सही ' वाले फॉर्मूले पर चला है , उसका जीवन औसत रहा है। मतलब ऐसे लोग सीरियसली प्यार के साइड इफेक्ट से सुरक्षित बच निकलने में कामयाब रहे हैं। "
साकेत मुस्कराया - " और तुम्हारा क्या फॉर्मूला है ? "
" मेरा फार्मूला ? " - कुछ सोचते हुए सौरभ बोला - " न तू न कोई और। "
" मतलब , तुम प्यार - व्यार में बिलीव नहीं करते ? "
" नहीं। "
" वजह ? "
सौरभ मुस्कराया - " आप फिर पर्सनल हो रहे हैं। "
" सॉरी ! " - कहते हुए साकेत बोला - " तुम आकाश के बारे में कुछ बता रहे थे ? "
" हाँ , रिचा से सीरियसली प्यार करके उसने बहुत बड़ी गलती की थी। आकाश एक खुशमिजाज और अच्छे नेचर वाला लड़का था , लेकिन रिचा से ब्रेकअप के बाद…ब्रेकअप के बाद उसकी लाइफ बर्बाद हो गयी।….रिचा के प्यार ने उसे एक आम इंसान से शराबी बना दिया। "
" रिचा से ब्रेकअप के बाद आकाश का जो हाल हुआ था , उसे मैं उसके पिता ' पवन माथुर ' से सुन चुका हूँ। "
" ग्रेट ! आप उनसे भी मिल चुके हैं ?...फिर मेरा वक़्त क्यों जाया कर रहे हैं ? "
" रिचा के बारे में बताओ सौरभ ! " - साकेत बोला - " रिचा के दुश्मन के बारे में। "
" अभय ! अभय रिचा को दुश्मन मानता था , तबाह करना चाहता था उसकी लाइफ और मुझे पूरा भरोसा है कि अगर आप कॉलेज के किसी स्टूडेंट में रिचा के कातिल की छवि ढूँढ रहे हैं , तो वह अभय के अलावा किसी और में आपको मिल ही नहीं सकती। "
" कमाल है ! मैं इतने लोंगो से मिला हूँ। किसी ने भी इतने स्पष्ट रूप से ये नहीं बताया कि अभय ऐसा शख्स है जो किसी का कत्ल भी कर सकता है ? "
" आपने स्पष्ट रूप से पूछा भी तो नहीं होगा ! "
" हाँ , ये तो है। वैसे , अभय को रिचा से प्रॉब्लम क्या थी ? "
" नहीं पता। यह तो सिर्फ अभय ही बता सकता है। लेकिन , रिचा को तबाह करने वाली बात उसने खुद मुझसे कही थी और मेरी व्यक्तिगत सलाह है कि अभय से इस सवाल का जवाब पाने की उम्मीद बिलकुल मत करियेगा , क्योंकि अगर अभय ही कातिल हुआ तो आपकी हेल्प करना तो दूर रहा , वह और अधिक सतर्क होकर आपके लिए कोई भी मुसीबत खड़ी करने से परहेज नहीं करेगा। “

0 Comments