मर्डर ऑन वेलेंटाइन नाइट - 29

मर्डर ऑन वेलेंटाइन नाइट - 29


 "  तुम अभय के बारे में कुछ बता रहे थे ? '' - एकाएक ही रिचा धीमे स्वर में बोली।

" लगता है , मेरी बातें तुम्हें बोर कर रही है। " - सौरभ मुस्कराते हुए बोला - " चिंता मत करो , मैं  तुम्हें ज्यादा बोर नहीं करूंगा। .....अब तक तुम समझ गयी होगी कि साइकोलॉजी में मेरे इंट्रेस्ट की वजह है , मानव व्यवहार ! इंसान बड़े ही अजीब किस्म का प्राणी है। वह कब किससे दोस्ती कर ले , कब किससे दुश्मनी कर ले , कब किससे प्यार कर बैठे और कब किसको धोखा दे दे , वो खुद भी नहीं जान पाता ! ...... आज हम जो है , जैसे है - जानती हो , उसकी वजह क्या है ? "

" क्या ? "

" हमारा व्यवहार ! ....  मानव व्यवहार ही उसके समूचे वज़ूद , उसके व्यक्तित्त्व के लिए ज़िम्मेदार है। .... और , जानती हो यह मानव व्यवहार किससे नियंत्रित होता है ? ... चौबीसों घंटे , यहां तक कि सोते वक़्त भी हम जो व्यवहार करते हैं , वो किससे नियंत्रित होता है ?..... जानती हो हमारे व्यवहार का रिमोट कंट्रोल किसके हाथ में होता है ? " - बोलते - बोलते सौरभ काफी उत्तेजित हो उठा था।

रिचा ने इनकार में सिर हिलाया।

" हमारे खुद के हाथों में। " - सौरभ इस तरह से बोल रहा था, मानो वह किसी बहुत बड़े रहस्य से पर्दा उठाने जा रहा हो - " और जानती हो , वह रिमोट कंट्रोल क्या है ?..... हमारा मस्तिष्क !... हमारा दिमाग !... हाँ , हमारे सम्पूर्ण व्यवहार का नियंत्रक है , हमारा दिमाग ! और साइकोलॉजी परोक्ष रूप से इसी दिमाग का अध्ययन है , क्योकि साइकोलॉजी मानव व्यवहार का अध्ययन करती है और मानव व्यवहार दिमाग से नियंत्रित होता है। ....... इसका अर्थ यह है कि किसी भी व्यक्ति के बारे में कोई भी जानकारी हासिल करने का या यूँ कहें कि किसी भी व्यक्ति के दिमाग को पढ़ने का सबसे बढ़िया तरीका है , शांतिपूर्ण तरीके से उसके व्यवहार को ऑब्ज़र्व किया जाए और अभय के मामले में मैंने यही किया है। .... पिछले दो सालों से मैं उसे ऑब्ज़र्व कर रहा हूँ और इसीलिए मैं उसके बारे में काफी कुछ जानता हूँ और यह पूर्वानुमान लगा सकता हूँ कि उसका अगला कदम क्या होगा। "

" क्या ? " - रिचा बुरी तरह से चौंक उठी - " तुम दो सालों से अभय को ऑब्जर्व कर रहे हो ? ... लेकिन क्यों ? "

" कॉलेज के पहले दिन से ही वह अपना रंग दिखा चुका था।  वह साबित कर चुका था कि वह कभी भी किसी के लिये भी कोई भी प्रॉब्लम खड़ी कर सकता है और एक पुरानी कहावत है कि अगर दुश्मन इतना शक्तिशाली हो कि उससे सीधे भिड़ना मुमकिन ना हो तो कम से कम उसकी रणनीतियों पर तो नज़र जरूर रखनी चाहिये , ताकि जरूरत के वक़्त उससे खुद की रक्षा की जा सके। "

" तो ये कहो ना कि अभय से खुद को बचाने के लिये तुम शुरू से ही उसके पीछे लगे हो और उसकी जासूसी करते रहे हो। " - रिचा बोली - " इसमें इतना घुमा फिराकर बोलने की क्या जरुरत है ? "

सौरभ मुस्कराया - " हाँ , अपने शब्दों में तुम इसे जासूसी कह सकती हो। लेकिन , मेरा ऑब्जर्व करना इस जासूसी से बहुत आगे की चीज है। "

" अच्छा ! जरा एक्सप्लेन करोगे ? "

" श्योर ! " - कहते हुए सौरभ ने बोलना शुरू किया - " अभय ने बेवजह तुम्हे परेशान किया और जब तुमने प्रिंसिपल सर से उसकी शिकायत करने की बात कही , तो उसने खुद इच्छा ज़ाहिर की कि उसकी शिकायत प्रिंसिपल से कर दी जाए और न केवल इच्छा ज़ाहिर की , बल्कि एक तरह से उसने इस बात के लिये तुम पर दबाव बनाया। ...... तुम बताओ , उसने ऐसा क्यों किया ? "

" मैं पहले ही बता चुकी हूँ कि वो बिलकुल मूर्ख किस्म का लड़का है , जो ये सोचता है कि वो खुद अपनी ही शिकायत करने की बात कहेगा , तो मैं ये सोचकर अपना इरादा बदल दूँगी कि प्रिंसिपल सर से शिकायत करने पर उसको कोई फर्क नहीं पड़ने वाला। "

" तुम ये कहना चाहती हो कि तुम प्रिंसिपल सर से उसकी शिकायत ना करो , इसीलिये उसने खुद कहा कि तुम उसकी शिकायत कर दो , ताकि शिकायत करने से कोई फायदा नहीं होने वाला है , ये सोचकर तुम शिकायत ही ना करो ? "

" बिलकुल। "

सौरभ मुसकराया - " मैंने अगर अभय की केवल जासूसी की होती , तो मैं यह अनुमान कभी नहीं लगा पाता कि उसने तुमसे अपनी ही शिकायत करने के लिये क्यों कहा ? "

" तो तुम जानते हो कि उसने ऐसा क्यों किया ? "

" हाँ। "

" क्यों किया ? "

" बताता हूँ।"


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